
#गिरिडीह #औद्योगिक_हादसा : काम के दौरान दुर्घटना में मजदूर की मौत।
गिरिडीह जिले के बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री में 05 जनवरी 2026 की देर रात कार्य के दौरान हुए एक गंभीर हादसे में 28 वर्षीय मजदूर राजाराम कुशवाहा की मौत हो गई। घटना की सूचना फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा परिजनों को फोन के माध्यम से दी गई, जिसके बाद घायल मजदूर को पहले निजी नर्सिंग होम ले जाया गया और फिर धनबाद रेफर किया गया। धनबाद पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह हादसा मजदूर सुरक्षा और फैक्ट्री प्रबंधन की जिम्मेदारी को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है।
- बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री, गिरिडीह में हुआ हादसा।
- दुर्घटना में 28 वर्षीय मजदूर राजाराम कुशवाहा की मौत।
- परिजनों ने शव रखकर फैक्ट्री गेट पर मुआवजे की मांग की।
- गिरिडीह के निजी अस्पताल से धनबाद किया गया था रेफर।
- मृतक के परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं।
- जेएलकेएम नेता नागेंद्र चंद्रवंशी ने दी आंदोलन की चेतावनी।
गिरिडीह जिले के औद्योगिक क्षेत्र से एक दुखद और हृदयविदारक खबर सामने आई है, जहां अड़की क्षेत्र में स्थित बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री में काम के दौरान एक जानलेवा दुर्घटना घटी। इस हादसे में फैक्ट्री में कार्यरत युवा मजदूर राजाराम कुशवाहा की असमय मृत्यु हो गई। घटना के बाद से पूरे इलाके में गहरा शोक, आक्रोश और तनाव का माहौल बना हुआ है।
कैसे घटी घटना
मृतक के भाई राधेश्याम कुशवाहा के अनुसार, रविवार देर रात करीब 11 बजे फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से उन्हें फोन कर बताया गया कि उनके भाई राजाराम काम के दौरान हुए हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सूचना मिलते ही परिजन गिरिडीह स्थित एक निजी नर्सिंग होम पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक बताते हुए मजदूर को धनबाद रेफर कर दिया।
परिजनों का कहना है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का ठीक से पालन नहीं किया गया, जिसके चलते यह दुर्घटना हुई। धनबाद पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद राजाराम कुशवाहा को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
परिवार पर टूटा संकट
मृतक राजाराम कुशवाहा अपने पीछे पत्नी, एक 8 वर्षीय पुत्री और एक 3 वर्षीय पुत्र छोड़ गए हैं। वह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। परिजनों ने बताया कि उनकी कमाई से ही पूरे घर का खर्च चलता था। अचानक हुई इस मौत से परिवार का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
धरने पर बैठे परिजनों ने प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, स्थायी आर्थिक सहायता और बच्चों की पढ़ाई–लिखाई की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएगा।
फैक्ट्री गेट पर प्रदर्शन
घटना के विरोध में सोमवार सुबह से ही सैकड़ों स्थानीय लोग और मृतक के परिजन फैक्ट्री के मुख्य गेट पर शव रखकर धरने पर बैठ गए। वे लगातार मुआवजा और प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। धरने के कारण फैक्ट्री परिसर के बाहर माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। मजदूर संगठन भी इस घटना को लेकर प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
जेएलकेएम नेता ने उठाए गंभीर सवाल
इस मामले में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता नागेंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी अब तक फैक्ट्री प्रबंधन का कोई भी प्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुंचा है। यह प्रबंधन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
नागेंद्र चंद्रवंशी ने कहा: “मजदूर की मौत बेहद दुखद है और प्रबंधन का रवैया गैरजिम्मेदाराना है। यदि परिजनों की जायज मांगें नहीं मानी गईं तो हम सड़क जाम करने को मजबूर होंगे। आगे होने वाले किसी भी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन की होगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि ओपेन कास्ट माइंस और फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन जिले में बार–बार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई। पुलिस अधिकारियों द्वारा धरने पर बैठे लोगों को समझाने और वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर यह भी पता लगाया जा रहा है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और सुरक्षा उपकरण मौजूद थे या नहीं।
अन्य मजदूरों में भी इस घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि फैक्ट्री में काम के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दुख न झेलना पड़े।
प्रबंधन की चुप्पी से बढ़ रहा रोष
खबर लिखे जाने तक बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। प्रबंधन की चुप्पी के कारण पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि घायल मजदूर को समय पर बेहतर इलाज क्यों नहीं उपलब्ध कराया गया और घटना के बाद तत्काल राहत क्यों नहीं दी गई।
जिले में बढ़ते औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बीच मजदूर सुरक्षा, बीमा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर यह घटना एक चेतावनी की तरह सामने आई है। सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
न्यूज़ देखो: मजदूर सुरक्षा पर गंभीर आत्ममंथन जरूरी
बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री में हुआ यह हादसा स्पष्ट संकेत देता है कि औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर अभी भी पर्याप्त सजगता नहीं है। एक युवा मजदूर की मौत से उसका पूरा परिवार बेसहारा हो गया है, जो बेहद चिंताजनक है। फैक्ट्री प्रबंधन को तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए परिजनों से वार्ता करनी चाहिए और उचित मुआवजा देना चाहिए। प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन हो। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
इंसाफ और सहायता के लिए एकजुट हों नागरिक
यह समय गिरिडीह जिले के लोगों के लिए सजग और सक्रिय बनने का है।
औद्योगिक विकास तभी सार्थक है जब मजदूर सुरक्षित हों।
पीड़ित परिवार को न्याय और सम्मानजनक मुआवजा मिलना उनका अधिकार है।
प्रशासन से मांग करें कि सभी फैक्ट्रियों में सुरक्षा ऑडिट हो।
मजदूरों के लिए बीमा और आपात चिकित्सा सुविधा अनिवार्य की जाए।
स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराया जाए।
इस घटना से सीख लेते हुए समाज को जागरूक होना होगा।
आप सभी पाठकों से विनम्र अपील है कि इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, पीड़ित परिवार के समर्थन में आवाज उठाएं और लेख को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।





