#डुमरी #निजीस्कूलविवाद : मनमानी फीस और शिक्षक शोषण पर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग।
गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड में निजी स्कूलों की फीस मनमानी के खिलाफ युवा कांग्रेस ने आवाज उठाई है। जिला महासचिव सरफराज अहमद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने अनुमंडल पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इसमें अभिभावकों से अत्यधिक शुल्क वसूली और शिक्षकों के शोषण के आरोप लगाए गए हैं। संगठन ने पूरे मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
- डुमरी में निजी स्कूलों के खिलाफ युवा कांग्रेस का ज्ञापन।
- सरफराज अहमद (गुड्डू) के नेतृत्व में SDO से मुलाकात।
- अभिभावकों से मनमानी फीस वसूली का आरोप।
- शिक्षकों को कम वेतन और देरी से भुगतान की शिकायत।
- प्रशासन से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग।
गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड में संचालित निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर अब विरोध तेज हो गया है। जिला युवा कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रशासन के समक्ष गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से अत्यधिक शुल्क वसूला जा रहा है और शिक्षकों के साथ भी शोषण हो रहा है, जिस पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा ज्ञापन
इस संबंध में जिला युवा कांग्रेस के जिला महासचिव सरफराज अहमद (गुड्डू) के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अनुमंडल पदाधिकारी से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से प्रखंड के निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
अभिभावकों पर बढ़ता आर्थिक बोझ
ज्ञापन में कहा गया है कि डुमरी प्रखंड के अधिकांश निजी विद्यालयों में हर साल नए सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया जाता है।
एडमिशन फीस, री-एडमिशन फीस, किताब-कॉपी, स्कूल ड्रेस, जूते, बैग और बस शुल्क जैसे विभिन्न मदों के नाम पर भारी रकम वसूली जाती है। इससे खासकर मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
सरफराज अहमद (गुड्डू) ने कहा: “शिक्षा के नाम पर इस तरह की मनमानी वसूली अभिभावकों पर अन्याय है और इसे रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है।”
शिक्षकों के शोषण का भी आरोप
युवा कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को बेहद कम वेतन दिया जा रहा है। कई मामलों में उन्हें समय पर वेतन भी नहीं मिलता।
योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक भी मजबूरी में कम वेतन पर काम करने को विवश हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है और इसका असर शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ता है।
स्कूलों की व्यवस्था पर सवाल
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कई निजी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की कमी है और शिक्षण स्तर भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। स्कूलों द्वारा जो दावे किए जाते हैं, वे वास्तविकता से मेल नहीं खाते।
अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए भारी फीस देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और गुणवत्ता नहीं मिलती।
प्रशासन से प्रमुख मांगें
युवा कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं:
- निजी विद्यालयों द्वारा ली जा रही मनमानी फीस पर तत्काल रोक
- सभी स्कूलों की फीस संरचना की जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित
- शिक्षकों और कर्मचारियों के शोषण पर रोक के लिए ठोस कदम
- शिक्षा की गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं की नियमित निगरानी
इन मांगों के माध्यम से संगठन ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अभिभावकों को राहत दिलाने की दिशा में कदम उठाने की अपील की है।
प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि
ज्ञापन की प्रतिलिपि उपायुक्त, गिरिडीह, प्रखंड विकास पदाधिकारी, डुमरी और प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, डुमरी को भी भेजी गई है, ताकि इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
बढ़ती नाराजगी और संभावित असर
डुमरी क्षेत्र में निजी स्कूलों की फीस को लेकर अभिभावकों में पहले से ही नाराजगी देखी जा रही थी। अब युवा कांग्रेस के हस्तक्षेप के बाद यह मुद्दा और भी प्रमुख हो गया है।
आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और जांच के परिणाम पर सभी की नजर रहेगी।
न्यूज़ देखो: शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, जवाबदेही तय होना जरूरी
डुमरी में उठाया गया यह मुद्दा केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर में निजी शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है। फीस नियंत्रण, शिक्षकों की स्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता जैसे सवालों पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है। प्रशासन की भूमिका यहां निर्णायक होगी कि वह अभिभावकों और छात्रों के हितों की रक्षा कैसे करता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक अभिभावक ही बदल सकते हैं शिक्षा व्यवस्था
शिक्षा केवल एक सेवा नहीं, बल्कि समाज की नींव है। यदि इसमें पारदर्शिता और गुणवत्ता नहीं होगी, तो भविष्य भी प्रभावित होगा।
अभिभावकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना होगा और गलत के खिलाफ आवाज उठानी होगी। सामूहिक प्रयास से ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव है।
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