कॉफी विद एसडीएम में युवाओं को मिला मार्गदर्शन, गढ़वा में प्रतियोगी परीक्षार्थियों के सपनों को नई उड़ान

author Sonu Kumar
3 months ago 1 Views Download E-Paper
#गढ़वा #युवा_मार्गदर्शन : एसडीएम के संवाद कार्यक्रम में रणनीति, प्रेरणा और प्रतियोगी पुस्तकों की सौगात।

गढ़वा सदर अनुमंडल में एसडीएम संजय कुमार के साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम “कॉफी विद एसडीएम” के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के साथ विशेष संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और परीक्षा रणनीति, समय प्रबंधन व मानसिक संतुलन पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। डीटीओ धीरज प्रकाश ने अपने संघर्ष और सफलता के अनुभव साझा किए। यह पहल युवाओं को सही दिशा और संसाधन उपलब्ध कराने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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  • कॉफी विद एसडीएम में 50 से अधिक प्रतियोगी परीक्षार्थी हुए शामिल।
  • एसडीएम संजय कुमार ने रणनीति, अनुशासन और निरंतरता पर दिया जोर।
  • डीटीओ धीरज प्रकाश ने साझा किए संघर्ष और सफलता के अनुभव।
  • प्रतियोगी पुस्तकों का नववर्ष उपहार के रूप में वितरण।
  • युवाओं को उत्तर-लेखन, मॉक टेस्ट और समय प्रबंधन की सलाह।

गढ़वा सदर अनुमंडल में युवाओं के भविष्य निर्माण की दिशा में एक सराहनीय पहल देखने को मिली, जब सदर एसडीएम संजय कुमार के नियमित साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम “कॉफी विद एसडीएम” के अंतर्गत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं के साथ संवाद आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 50 से अधिक युवा शामिल हुए, जिन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे संवाद कर अपने सवाल रखे और मार्गदर्शन प्राप्त किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मोटिवेशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही दिशा, व्यावहारिक रणनीति और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना भी रहा। नववर्ष के अवसर पर आयोजित इस संवादात्मक कार्यक्रम को युवाओं ने अपने लिए एक सकारात्मक शुरुआत बताया।

रणनीति, अनुशासन और निरंतरता पर एसडीएम का संदेश

कार्यक्रम के दौरान एसडीएम संजय कुमार ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं होतीं, बल्कि यह धैर्य, आत्मविश्वास, निरंतर अभ्यास और सही रणनीति की कसौटी होती हैं।

एसडीएम संजय कुमार ने कहा: “असफलता से डरने के बजाय उससे सीख लें। लक्ष्य स्पष्ट हो और रणनीति मजबूत हो, तो सफलता निश्चित है।”

उन्होंने युवाओं से अनुशासित दिनचर्या अपनाने, सीमित संसाधनों में बेहतर योजना बनाने और नकारात्मक संगत से दूर रहने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन का दायित्व केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि युवाओं को सही मार्गदर्शन देना भी है।

डीटीओ धीरज प्रकाश ने साझा किए संघर्ष और सफलता के अनुभव

कार्यक्रम में जिला परिवहन पदाधिकारी सह जिला कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने स्वयं के प्रतियोगी परीक्षा के अनुभव साझा करते हुए युवाओं को बताया कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में भी यदि निरंतर परिश्रम और सही रणनीति अपनाई जाए, तो सफलता अवश्य मिलती है।

डीटीओ धीरज प्रकाश ने कहा: “नियमित उत्तर-लेखन, मॉक टेस्ट और आत्ममूल्यांकन ही प्रतियोगी परीक्षाओं की असली तैयारी है।”

उन्होंने प्रतियोगी माहौल में पढ़ाई करने, समय प्रबंधन, अच्छी पुस्तकों के चयन और मानसिक संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उनके अनुभव युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत साबित हुए।

नववर्ष के उपहार में प्रतियोगी पुस्तकों की सौगात

कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि युवाओं को लगभग सभी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित मानक पुस्तिकाएं उपहार स्वरूप प्रदान की गईं। यह पुस्तकें नववर्ष के अवसर पर युवाओं के लिए प्रेरणादायी उपहार के रूप में दी गईं।

इस मौके पर एसडीएम संजय कुमार और डीटीओ धीरज प्रकाश ने संयुक्त रूप से कहा कि पुस्तकें केवल पढ़ाई का साधन नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण का आधार होती हैं। डीटीओ धीरज प्रकाश ने अपने स्तर से भी कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी पुस्तकों का वितरण किया।

उत्तर-लेखन और मानसिक संतुलन पर विशेष मार्गदर्शन

कार्यक्रम में युवाओं को नियमित उत्तर-लेखन अभ्यास, मॉक टेस्ट देने, कमजोर विषयों की पहचान करने और आत्मविश्लेषण करने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए केवल पढ़ना नहीं, बल्कि लिखने की गति और प्रस्तुति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

साथ ही तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर भी चर्चा की गई। युवाओं को बताया गया कि लंबी तैयारी के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखना सफलता की कुंजी है।

युवा ही राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी

अपने संबोधन में एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि उन्हें समय रहते मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलें, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और राष्ट्र का भविष्य भी बदल सकते हैं। उन्होंने युवाओं से नशाखोरी और भटकाव से दूर रहकर लक्ष्य पर केंद्रित रहने की अपील की।

संवादात्मक माहौल में युवाओं ने रखे सवाल

पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल अत्यंत उत्साहपूर्ण और संवादात्मक रहा। युवाओं ने परीक्षा पैटर्न, विषय चयन, कोचिंग बनाम स्व-अध्ययन और करियर विकल्पों से जुड़े सवाल पूछे, जिनका अधिकारियों ने सहज और व्यावहारिक उत्तर दिया। युवाओं ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे नियमित रूप से आयोजित करने की मांग भी की।

न्यूज़ देखो: प्रशासन और युवाओं के बीच भरोसे का पुल

“कॉफी विद एसडीएम” जैसे कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि प्रशासन यदि युवाओं से सीधे संवाद करे तो मार्गदर्शन प्रभावी बनता है। प्रतियोगी पुस्तकों का वितरण और अधिकारियों का अनुभव साझा करना युवाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऐसे प्रयास कितनी निरंतरता से आगे बढ़ते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सपनों को दिशा दें, मेहनत को पहचान दिलाएं

युवा यदि सही मार्गदर्शन और संसाधन पाएंगे तो सफलता दूर नहीं। इस प्रेरक पहल को अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाएं। अपनी राय साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और किसी एक युवा के सपने को दिशा देने में सहभागी बनें।

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