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झारखंड की दिशा और दशा पर युवा महा बैठक में उठी आवाजें, भूमि अधिकार और पहचान संरक्षण पर गहन मंथन

#रांची #युवा_मंथन : नागड़ा टोली के सरना भवन में झारखंडी अस्मिता और भूमि अधिकारों पर युवाओं की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न
  • सर्ना भवन, नागड़ा टोली में युवाओं की महा बैठक सफलतापूर्वक आयोजित।
  • बैठक की अध्यक्षता अजय टोप्पो ने की, बड़ी संख्या में युवा व बुद्धिजीवी शामिल।
  • CNT–SPT कानून उल्लंघन, भू-माफिया–अधिकारी गठजोड़, बाहरी आबादी बढ़ने जैसे मुद्दों पर चर्चा।
  • मुख्य वक्ताओं प्रदीप टोप्पो, पंकज टोप्पो, दीपक लकड़ा, प्रेम मुर्मू, एल. एम. उरांव ने विचार रखे।
  • युवाओं को भूमि संरक्षण, सांस्कृतिक अस्मिता और अधिकारों के बचाव में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान।

झारखंड की दिशा और दशा को लेकर राज्यहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर रविवार को रांची के नागड़ा टोली स्थित सरना भवन में युवाओं की महा बैठक आयोजित हुई। अजय टोप्पो की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बड़ी संख्या में युवा, सामाजिक प्रतिनिधि और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राज्य की पहचान, सांस्कृतिक अस्तित्व, भूमि अधिकार और जनसंख्या संरचना में बदलाव जैसे गंभीर विषयों पर गहन मंथन किया गया। उपस्थित लोगों ने अपनी-अपनी चिंताएं साझा कीं और स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदमों की आवश्यकता पर बल दिया।

CNT–SPT कानून और जनजातीय अस्तित्व पर बढ़ती चुनौतियाँ

बैठक के दौरान वक्ताओं ने CNT–SPT कानून के लगातार हो रहे उल्लंघन पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह कानून झारखंड की पहचान और भूमि सुरक्षा की रीढ़ है, और इसका कमजोर होना सीधे तौर पर मूलवासी–आदिवासी समाज के अस्तित्व पर प्रभाव डालता है। साथ ही, भू-माफियाओं और कुछ अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत को झारखंड की भूमि नीति के लिए बड़ा खतरा बताया गया।
वक्ताओं ने इस पर भी जोर दिया कि बाहरी आबादी का तेजी से बढ़ना और स्थानीय जनसंख्या में गिरावट एक गंभीर सामाजिक और सांस्कृतिक संकट का संकेत है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।

वक्ताओं ने युवाओं की भूमिका को बताया निर्णायक

कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं—प्रदीप टोप्पो, पंकज टोप्पो, समाजसेवी दीपक लकड़ा, प्रेम मुर्मू और एल. एम. उरांव—ने कहा कि झारखंड की सांस्कृतिक अस्मिता, पारंपरिक अधिकार और भूमि संरक्षण के लिए युवा ही सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन सामूहिक जागरूकता, संगठन और सक्रियता से इन खतरों का समाधान संभव है।
वक्ताओं ने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और भू-माफियाओं पर कड़ी निगरानी के बिना स्थायी समाधान संभव नहीं है।

झारखंडी अस्मिता की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प

बैठक में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सरकार को भूमि-संबंधी मामलों में कठोर और पारदर्शी नीति अपनानी चाहिए और मूलवासी–आदिवासी समाज की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही, युवाओं को गांव-गांव, टोला-टोला जागरूकता फैलाकर समाज को संगठित करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
अंत में अध्यक्ष अजय टोप्पो ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या समूह का नहीं, बल्कि जनहित का है, और इसे पूरे बल, एकता और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

युवाओं का बढ़ता नेतृत्व और झारखंड के भविष्य की उम्मीद

बैठक ने यह संकेत दिया कि राज्य के युवा अब अपने अधिकारों, संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा के लिए व्यवस्थित रूप से आगे आ रहे हैं। सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर बढ़ती जागरूकता झारखंड के भविष्य और पहचान दोनों के लिए उम्मीद जगाती है। इस आयोजन ने न सिर्फ मुद्दों को सामने रखा, बल्कि समाधान की दिशा में सामूहिक प्रयास का मार्ग भी सुझाया।

न्यूज़ देखो: झारखंडी पहचान की लड़ाई में युवाओं की एकजुटता की मिसाल

यह बैठक बताती है कि राज्य की सांस्कृतिक और भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता और एकजुटता कितनी महत्वपूर्ण है। जब युवा आगे आते हैं, तब बदलाव की दिशा भी साफ दिखने लगती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अब समय जागरूकता से एकजुटता की ओर बढ़ने का

आज के युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे अपने समाज, संस्कृति और भविष्य की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएं। परिवर्तन तभी मजबूत होगा जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे। अपनी राय कॉमेंट करें और इस खबर को साझा करें ताकि जागरूकता दूर-दूर तक पहुंचे।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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