
#डुमरी #बिरसाहरितग्रामयोजना #आमबागवानी : पंचायत स्तरीय किसान सम्मेलन में अनुभव साझा, तकनीकी जानकारी से हुए लाभान्वित
डुमरी प्रखंड के मँझगाँव पंचायत अंतर्गत ग्राम बरटोली में बुधवार को एक दिवसीय पंचायत स्तरीय आम बागवानी किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया। मँझगाँव पंचायत की मुखिया ज्योति बहेर देवी के नेतृत्व एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में मँझगाँव और नवाडीह पंचायत के लगभग 200 किसानों ने भाग लिया।
- 200 प्रगतिशील किसानों की सक्रिय भागीदारी
- बिरसा हरित ग्राम योजना के अनुभव साझा
- बागवानी की तकनीकी प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी
- अंतः-फसल से अतिरिक्त आय बढ़ाने पर जोर
- सफल किसानों ने साझा किए अपने अनुभव
योजना की सफलता पर चर्चा
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य किसानों के बीच बिरसा हरित ग्राम योजना की उपलब्धियों को साझा करना और आगामी कृषि वर्ष के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में बागवानी की प्रमुख प्रक्रियाओं, पौधरोपण, रख-रखाव एवं तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।
आम बागवानी से सशक्त होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
मुखिया ज्योति बहेर देवी ने कहा कि आम बागवानी पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का सशक्त माध्यम है। उन्होंने किसानों से इस योजना से अधिक से अधिक जुड़ने की अपील की।
नवाडीह पंचायत के मुखिया चैतनलाल मिंज एवं खेतली पंचायत के उपमुखिया जवाहर कवर ने बागवानी पैच के भीतर अंतः-फसल (इंटरक्रॉपिंग) को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने आश्वस्त किया कि आजीविका संवर्धन हेतु किसानों को हर संभव सरकारी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
सफल किसानों ने साझा किए अनुभव
सम्मेलन में पांच सफल बागवानी किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि बागवानी के साथ अन्य फसलों की खेती कर वे अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं। किसानों ने पौधों की संतोषजनक वृद्धि, मनरेगा के तहत समय पर मजदूरी भुगतान और समूह आधारित तकनीकी मार्गदर्शन को लाभकारी बताया।
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर उपमुखिया ब्रजेन्द्र पंडित, जेएसएलपीएस के जिला परियोजना समन्वयक अशोक, डुमरी जेएसएलपीएस से उत्तम, संबंधित पंचायतों के रोजगार सेवक, पंचायत सचिव एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
न्यूज़ देखो विश्लेषण
बिरसा हरित ग्राम योजना जैसी पहलें पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को जोड़कर किसानों की आय में स्थायी वृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। यदि किसान तकनीकी सलाह और समूह आधारित मॉडल को अपनाते रहें, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।
खेती में नवाचार, आय में विस्तार
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