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गारू पूर्वी वन क्षेत्र में 30 महिलाओं को मिल रहा आवासीय सिलाई प्रशिक्षण, जनभागीदारी योजना से आत्मनिर्भरता की मजबूत पहल

#लातेहार #महिला_सशक्तिकरण : पलामू व्याघ्र परियोजना की जनभागीदारी योजना से महिलाओं को मिला आजीविका का नया अवसर।

लातेहार जिले के गारू पूर्वी वन क्षेत्र में पलामू व्याघ्र परियोजना के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आवासीय सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। जनभागीदारी योजना के अंतर्गत 30 गरीब और बेरोजगार महिलाओं व युवतियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन गारू पूर्वी वन क्षेत्र के रेंजर उमेश कुमार दुबे ने किया। यह पहल वन संरक्षण के साथ स्थानीय समुदाय को आजीविका से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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  • गारू पूर्वी वन क्षेत्र में 30 महिलाओं और युवतियों को आवासीय सिलाई प्रशिक्षण।
  • पलामू व्याघ्र परियोजना की जनभागीदारी योजना के तहत कार्यक्रम संचालित।
  • उद्घाटन रेंजर उमेश कुमार दुबे ने किया।
  • प्रशिक्षण के बाद सभी महिलाओं को सिलाई मशीन दी जाएगी।
  • हजारीबाग से आईं मास्टर ट्रेनर महिलाओं को दे रही हैं प्रशिक्षण।

लातेहार जिले के गारू पूर्वी वन क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक और व्यावहारिक पहल देखने को मिल रही है। पलामू व्याघ्र परियोजना के दक्षिणी वन प्रमंडल द्वारा संचालित जनभागीदारी योजना के तहत स्थानीय महिलाओं और युवतियों को स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत न केवल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, बल्कि प्रशिक्षण के बाद आजीविका के संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

जनभागीदारी योजना के तहत शुरू हुआ प्रशिक्षण

गारू पूर्वी वन क्षेत्र में आयोजित इस आवासीय सिलाई मशीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन रेंजर उमेश कुमार दुबे ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है।

रेंजर उमेश कुमार दुबे ने कहा:
“यह योजना जल, जंगल, जीव, जीविका और जीवन के मूल उद्देश्य को ध्यान में रखकर संचालित की जा रही है। वन संरक्षण तभी सफल होगा, जब स्थानीय समुदाय को आजीविका के सुरक्षित और स्थायी विकल्प मिलें।”

पूरी तरह आवासीय है प्रशिक्षण व्यवस्था

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की खास बात यह है कि यह पूरी तरह आवासीय है। प्रशिक्षणार्थी महिलाओं के रहने और भोजन की पूरी व्यवस्था वन विभाग द्वारा की गई है। इससे महिलाओं को घर-परिवार की जिम्मेदारियों या आर्थिक बाधाओं के बिना प्रशिक्षण लेने का अवसर मिल रहा है।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी महिलाओं को सिलाई मशीन उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे घर बैठे स्वरोजगार शुरू कर सकें। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि वे अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग भी कर सकेंगी।

पहले भी मिल चुका है महिलाओं को लाभ

रेंजर उमेश कुमार दुबे ने जानकारी दी कि इससे पहले भी गारू पूर्वी वन क्षेत्र में इसी तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अब तक कुल 60 महिलाओं और युवतियों को सिलाई प्रशिक्षण का लाभ दिया गया है। इनमें से कई महिलाएं वर्तमान में सिलाई के माध्यम से अपनी आजीविका चला रही हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

यह दर्शाता है कि जनभागीदारी योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

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अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा दिया जा रहा प्रशिक्षण

प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हजारीबाग से मास्टर ट्रेनर पूनम कुमारी और निसरत प्रवीण को बुलाया गया है। दोनों प्रशिक्षक महिलाओं को सिलाई मशीन चलाने के साथ-साथ कपड़ों की कटिंग, डिजाइनिंग और व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण दे रही हैं।

प्रशिक्षण शिविर को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए वनरक्षक मंजू कुमारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो प्रशिक्षण की निगरानी और व्यवस्थाओं का दायित्व संभाल रही हैं।

कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

उद्घाटन अवसर पर प्रभारी वनपाल रूपेश कुमार, पंकज कुमार पाठक, पंकज कुमार, समाजसेवी अजीत कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे महिलाओं के लिए एक मजबूत अवसर बताया।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करती हैं।

न्यूज़ देखो: वन संरक्षण के साथ आजीविका का संतुलित मॉडल

गारू पूर्वी वन क्षेत्र में चल रहा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बताता है कि वन संरक्षण और मानव विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं। जब स्थानीय समुदाय को आजीविका से जोड़ा जाता है, तो वे भी जंगल और पर्यावरण की रक्षा में सहभागी बनते हैं। यह मॉडल अन्य वन क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आत्मनिर्भर महिलाएं, सशक्त समाज की नींव

जब महिलाओं को हुनर और संसाधन मिलते हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है।
गारू पूर्वी वन क्षेत्र की यह पहल दिखाती है कि सही दिशा में किया गया प्रयास किस तरह जीवन बदल सकता है।

इस खबर को साझा करें, महिला सशक्तिकरण की ऐसी पहलों पर चर्चा करें और सकारात्मक बदलाव के लिए अपनी आवाज बुलंद करें। आपकी जागरूकता ही ऐसी योजनाओं को आगे बढ़ाती है।

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Akram Ansari

बरवाडीह, लातेहार

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