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उसरी नदी के दोनों किनारों पर लगेंगे 4000 पेड़, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

#गिरिडीह #उसरीनदीसंरक्षण : दशकभर के जनआंदोलन के बाद हरित विकास योजना को मिली प्रशासनिक मंजूरी।

गिरिडीह जिले में उसरी नदी के संरक्षण और हरित विकास के लिए दोनों किनारों पर 4000 पेड़ लगाने का निर्णय लिया गया है। पूर्वी जॉन के डीएफओ मनीष तिवारी ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि नदी किनारे के साथ-साथ शहर के 1 से 36 वार्डों में खाली पड़ी जमीन पर भी पौधरोपण किया जाएगा। यह पहल उसरी बचाव अभियान की दस वर्षों की सतत मेहनत का परिणाम मानी जा रही है। योजना के तहत इस महीने से पौधरोपण शुरू कर बरसात से पहले सभी पेड़ों की घेराबंदी पूरी की जाएगी।

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  • उसरी नदी के दोनों किनारों पर लगाए जाएंगे 4000 पौधे
  • डीएफओ मनीष तिवारी ने पौधरोपण योजना की पुष्टि की।
  • राजेश सिन्हा की अगुवाई में चला उसरी बचाव अभियान पिछले 10 वर्षों से सक्रिय।
  • 1 से 36 वार्डों की खाली जमीन पर भी हरित विकास की योजना।
  • वन विभाग द्वारा इस महीने से पौधरोपण कार्य शुरू करने की तैयारी।

गिरिडीह जिले में बहने वाली उसरी नदी लंबे समय से अतिक्रमण, प्रदूषण और उपेक्षा का शिकार रही है। ऐसे में नदी के संरक्षण और शहर के पर्यावरण संतुलन को सुधारने के उद्देश्य से दोनों किनारों पर 4000 पेड़ लगाने का फैसला एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस निर्णय से न सिर्फ नदी का सौंदर्य बढ़ेगा, बल्कि जल संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय पर्यावरण को भी मजबूती मिलेगी।

डीएफओ मनीष तिवारी से मुलाकात में हुई पुष्टि

समाजसेवी एवं माले नेता राजेश सिन्हा ने पूर्वी जॉन के डीएफओ मनीष तिवारी से मुलाकात कर इस योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। डीएफओ मनीष तिवारी ने बताया कि वन विभाग द्वारा नदी किनारे और शहरी क्षेत्रों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। सर्वे के आधार पर उन स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां पौधरोपण सबसे अधिक प्रभावी होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पौधे लगाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनके संरक्षण और दीर्घकालिक देखभाल की भी ठोस व्यवस्था की जाएगी।

उसरी बचाव अभियान की दस साल की मेहनत

उसरी नदी को बचाने के लिए उसरी बचाव अभियान पिछले दस वर्षों से लगातार सक्रिय रहा है। इस अभियान की अगुवाई राजेश सिन्हा कर रहे हैं, जिसमें सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। नदी की सफाई, जनजागरूकता, पदयात्रा और प्रशासनिक दबाव जैसे कई प्रयास इस अभियान के तहत किए गए।

अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि यह पौधरोपण योजना उसी संघर्ष और निरंतर प्रयास का परिणाम है, जिसने प्रशासन को ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

वन विभाग की भूमिका और कार्ययोजना

वन विभाग ने इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए तैयारी तेज कर दी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस महीने से पौधरोपण कार्य शुरू होगा और बरसात तक सभी 4000 पौधे घेराबंदी के साथ लगाए जाएंगे, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को मिलाकर एक संयुक्त टीम बनाई जाएगी, जो इन पौधों के रखरखाव और निगरानी की जिम्मेदारी निभाएगी। इससे जनभागीदारी भी सुनिश्चित होगी और पौधों के जीवित रहने की संभावना बढ़ेगी।

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राजेश सिन्हा का आह्वान और जनसहयोग

राजेश सिन्हा ने स्थानीय नागरिकों से अपील करते हुए कहा:

राजेश सिन्हा ने कहा: “अपने-अपने वार्ड का फोटो भेजिए और यह बताइए कि वहां कितने पेड़ लगाए जा सकते हैं। हम सब मिलकर इस काम को बेहतर करने की गारंटी करेंगे। पिछली बार हमने मुफ्त सेवा दी थी, इस बार वन विभाग सेवा देगा।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा प्रयास है।

राज्य सरकार की भूमिका और बड़े वादे

उसरी नदी के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार के नगर विकास मंत्री ने भी कई आश्वासन दिए हैं। नदियों के संरक्षण के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा सीसीएल द्वारा छिलका डेम के लिए दिए गए धन को जल्द उपयोग में लाने की बात कही गई है।

साथ ही, नदी किनारे पदयात्रियों के लिए कॉरिडोर बनाने जैसे दीर्घकालिक प्रस्ताव भी सामने आए हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर इन योजनाओं की गति को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

आंदोलन की चेतावनी और भविष्य की रणनीति

उसरी बचाव अभियान के नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यदि विकास और संरक्षण से जुड़े वादे समय पर पूरे नहीं हुए, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। विशेष रूप से सिहोडीह शास्त्री नगर के लिए पुल निर्माण को लेकर चेतावनी दी गई है।

अभियान से जुड़े नेताओं ने कहा है कि मांगें पूरी नहीं होने पर राजेश सिन्हा की अगुवाई में उसरी नदी क्षेत्र में पैदल यात्रा और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

न्यूज़ देखो: जनआंदोलन से उपजी हरित उम्मीद

उसरी नदी के दोनों किनारों पर 4000 पेड़ लगाने का निर्णय यह दर्शाता है कि निरंतर जनआंदोलन और जनदबाव से सकारात्मक बदलाव संभव है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम है, बल्कि प्रशासन और समाज के बीच सहयोग का उदाहरण भी है। अब चुनौती इस योजना के समयबद्ध और ईमानदार क्रियान्वयन की है। क्या सरकार और विभाग अपने वादों पर खरे उतरेंगे, यह देखने वाली बात होगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

हरियाली से ही बचेगा भविष्य, आज कदम उठाना जरूरी

नदियों और पर्यावरण की रक्षा केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संभव है। उसरी नदी के किनारे लगने वाले ये पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनरेखा बन सकते हैं। अगर हर नागरिक अपने वार्ड और मोहल्ले में जिम्मेदारी निभाए, तो बदलाव निश्चित है।

अब समय है आगे आने का। अपनी राय साझा करें, इस खबर को लोगों तक पहुंचाएं और उसरी नदी को बचाने की इस मुहिम का हिस्सा बनें।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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