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मानव जीवन के 94 कर्म मनुष्य के अधीन, शेष 6 विधि के नियंत्रण में: पंडित राम निवास तिवारी का आध्यात्मिक विवेचन

#संपादकीय #धार्मिक_दर्शन : मणिकर्णिका घाट की परंपरा से जीवन कर्म और मृत्यु रहस्य की व्याख्या।

पलामू जिले के विश्रामपुर में प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित राम निवास तिवारी ने मानव जीवन, कर्म और मृत्यु से जुड़े गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने काशी के मणिकर्णिका घाट की परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि चिता भस्म पर लिखा जाने वाला अंक 94 कर्म सिद्धांत से जुड़ा है। उनके अनुसार मानव जीवन में कुल 100 कर्म होते हैं, जिनमें से 94 मनुष्य के अधीन और 6 विधि अर्थात ब्रह्मा के नियंत्रण में होते हैं। यह विवेचना जीवन को सत्कर्म की ओर प्रेरित करने वाला गहन संदेश देती है।

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  • पंडित राम निवास तिवारी ने कर्म सिद्धांत पर विस्तार से प्रकाश डाला।
  • काशी के मणिकर्णिका घाट की परंपरा में 94 अंक का विशेष महत्व।
  • मानव जीवन के 100 कर्मों का आध्यात्मिक विवेचन।
  • 94 कर्म मनुष्य के अधीन, 6 कर्म विधि के नियंत्रण में।
  • गीता के सिद्धांतों से जोड़ा गया कर्म और पुनर्जन्म का रहस्य।

पलामू जिले के विश्रामपुर क्षेत्र में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित राम निवास तिवारी ने मानव जीवन के कर्म, मृत्यु और पुनर्जन्म से जुड़े एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह विषय आम जनमानस के लिए अत्यंत उपयोगी है, लेकिन इसके गूढ़ अर्थों से बहुत कम लोग परिचित हैं।

मणिकर्णिका घाट और 94 अंक का रहस्य

पंडित राम निवास तिवारी ने बताया कि काशी के मणिकर्णिका घाट पर जब चिता शांत हो जाती है, तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 अंक लिखता है। यह परंपरा दर्शाती है कि मृत व्यक्ति के 94 कर्म शिव के चरणों में विलीन हो गए
उन्होंने कहा कि इस परंपरा की जानकारी प्रायः खांटी बनारसी या आसपास के लोग ही जानते हैं, बाहर से आने वाले लोग इसके अर्थ से अनभिज्ञ रहते हैं।

मानव जीवन के 100 कर्मों का सिद्धांत

पंडित राम निवास तिवारी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार मानव जीवन में कुल 100 कर्म माने गए हैं। इनमें से 94 कर्म ऐसे हैं, जिन्हें मनुष्य अपने विवेक और प्रयास से कर सकता है, जबकि 6 कर्म विधि अर्थात ब्रह्मा के अधीन होते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि:

“हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश जैसे 6 कर्म मनुष्य के वश में नहीं होते, यह विधि द्वारा निर्धारित होते हैं।”

मृत्यु के बाद क्या साथ जाता है

उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि मृत्यु के बाद मनुष्य मन और पांच ज्ञानेन्द्रियों को अपने साथ लेकर जाता है। यही संख्या 6 है।
अगला जन्म किस देश, किस परिवार और किन परिस्थितियों में होगा, यह केवल प्रकृति और विधि को ही ज्ञात होता है। इसलिए चिता पर लिखा जाने वाला 94 यह दर्शाता है कि 94 कर्म भस्म हो गए, जबकि 6 कर्म आत्मा के साथ आगे की यात्रा में जाते हैं

सत्कर्म की ओर प्रेरणा देने वाली सूची

पंडित राम निवास तिवारी ने मानव जीवन को धर्म, नैतिकता और मानवता के मार्ग पर ले जाने वाले 100 शुभ कर्मों की विस्तृत सूची भी साझा की। उन्होंने बताया कि इन कर्मों का पालन करने से जीवन सार्थक बनता है और आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

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इनमें सत्य बोलना, अहिंसा, दया, क्षमा, माता-पिता का सम्मान, समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण, योग, ध्यान, दान, सेवा, नैतिक आचरण और आध्यात्मिक साधना जैसे कर्म शामिल हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले 94 कर्म मनुष्य के आचरण से जुड़े हैं, जबकि अंतिम 6 कर्म — हानि, लाभ, जीवन, मरण, यश और अपयश — विधि के अधीन माने जाते हैं।

जीवन दर्शन का सार

पंडित राम निवास तिवारी ने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवनकाल में 94 कर्मों को सत्कर्म और धर्म के अनुरूप कर लेता है, तो उसका जीवन और मृत्यु दोनों ही कल्याणकारी बन जाते हैं। यही कारण है कि काशी की परंपरा में 94 अंक लिखकर यह संदेश दिया जाता है कि मनुष्य अपने अधीन कर्मों से मुक्त हो चुका है और शेष कर्म विधि के साथ आगे बढ़ेंगे

न्यूज़ देखो: कर्म दर्शन से जुड़ा गूढ़ संदेश

यह विवेचना बताती है कि भारतीय परंपरा में कर्म और मृत्यु केवल धार्मिक क्रियाएं नहीं, बल्कि गहरे दार्शनिक अर्थ समेटे हुए हैं। पंडित राम निवास तिवारी द्वारा समझाया गया 94 कर्म सिद्धांत जीवन को जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ जीने की प्रेरणा देता है। ऐसे विषय समाज में आत्मचिंतन और सत्कर्म की भावना को मजबूत करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सत्कर्म अपनाएं, जीवन को सार्थक बनाएं

जीवन की दिशा हमारे कर्म तय करते हैं। यदि हम अपने अधीन कर्मों को सही मार्ग पर ले जाएं, तो भविष्य स्वतः उज्ज्वल होगा। इस विचार को दूसरों तक पहुंचाएं, अपनी राय साझा करें और सत्कर्म की प्रेरणा समाज में फैलाने में सहभागी बनें।

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Ram Niwas Tiwary

बिश्रामपुर, पलामू

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