खाकी का मानवीय चेहरा: धुरकी थाना प्रभारी की पहल से सुखलदरी जलप्रपात में बढ़ेगा पर्यटन आकर्षण

खाकी का मानवीय चेहरा: धुरकी थाना प्रभारी की पहल से सुखलदरी जलप्रपात में बढ़ेगा पर्यटन आकर्षण

author Shashi Bhushan Mehta
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#धुरकी #गढ़वा #पर्यटन_सुरक्षा : मकर संक्रांति मेले से पहले पुलिस की पहल से सुगम हुआ मार्ग, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।

गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड में स्थित प्रसिद्ध सुखलदरी जलप्रपात मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी को लगने वाले वार्षिक मेले के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बार मेले की खास पहचान धुरकी थाना प्रभारी की मानवीय पहल बनी है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दुर्गम रास्ते को सुगम बनाया। साथ ही मेले को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। यह पहल अंतर्राज्यीय पर्यटन और श्रद्धालुओं की सुविधा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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  • 14 जनवरी मकर संक्रांति को सुखलदरी जलप्रपात में भव्य मेले का आयोजन।
  • धुरकी थाना प्रभारी जनार्दन राउत ने स्वयं मार्ग निर्माण में निभाई सक्रिय भूमिका।
  • छत्तीसगढ़ से आने वाले सैलानियों के लिए बनाया गया सुरक्षित अस्थायी पथ।
  • भारी पुलिस बल और महिला पुलिस की विशेष तैनाती।
  • झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश से उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब।

गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड में झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित सुखलदरी जलप्रपात न केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले के कारण भी इसकी अलग पहचान है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 14 जनवरी को यहां हजारों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचने वाले हैं।

थाना प्रभारी की मानवीय पहल बनी चर्चा का विषय

इस बार सुखलदरी मेला केवल प्रकृति और धार्मिक आस्था के कारण नहीं, बल्कि धुरकी थाना प्रभारी जनार्दन राउत की संवेदनशील और मानवीय पहल के कारण भी चर्चा में है। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को पहले जलप्रपात तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। दुर्गम और जोखिमभरे रास्ते के कारण कई लोग मेले में शामिल नहीं हो पाते थे।

इस समस्या को देखते हुए थाना प्रभारी ने स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से पत्थरों और लकड़ियों के सहारे कनहर नदी के बीच एक सुरक्षित अस्थायी पथ तैयार करवाया। इस पहल से अब छत्तीसगढ़ की ओर से आने वाले श्रद्धालु और सैलानी बिना परेशानी सुखलदरी जलप्रपात तक पहुंच सकेंगे।

सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम

मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए धुरकी पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

भारी पुलिस बल की तैनाती

मेले के सभी प्रवेश द्वारों, प्रमुख रास्तों और जलप्रपात क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय घटना को रोका जा सके।

खतरनाक क्षेत्रों की बैरिकेडिंग

कनहर नदी के गहरे पानी, फिसलन भरी चट्टानों और जोखिम वाले क्षेत्रों को बैरिकेडिंग कर सील किया जाएगा। इन स्थानों पर पुलिस जवानों की तैनाती रहेगी, ताकि पर्यटक सुरक्षित दायरे में ही भ्रमण करें।

सादे लिबास में पुलिस

असामाजिक तत्वों और हुड़दंगियों पर नजर रखने के लिए सादे लिबास में पुलिसकर्मी भी मेले में तैनात रहेंगे।

महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान

महिला श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल की विशेष तैनाती की गई है, जो हर स्तर पर सहायता के लिए मौजूद रहेंगी।

तीन राज्यों की संस्कृति का संगम

सुखलदरी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालु कनहर नदी के पवित्र जल में स्नान कर सूर्य उपासना करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और हर साल श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो रही है।

थाना प्रभारी की इस पहल से अंतर्राज्यीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

प्रशासन की अपील

मेले को लेकर थाना प्रभारी जनार्दन राउत ने स्पष्ट संदेश दिया:

जनार्दन राउत ने कहा: “पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी पहली जिम्मेदारी है। हमने न केवल रास्ता सुगम किया है, बल्कि मेले के दौरान चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात की है। सभी सैलानियों से अपील है कि वे स्वच्छता बनाए रखें और गहरे पानी से दूर रहें।”

स्थानीय लोगों में संतोष

स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों ने भी पुलिस की इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि इससे न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि सुखलदरी जलप्रपात की पहचान एक सुरक्षित और व्यवस्थित पर्यटन स्थल के रूप में और मजबूत होगी।

न्यूज़ देखो: सुरक्षा और संवेदनशीलता का बेहतर उदाहरण

धुरकी थाना प्रभारी की यह पहल बताती है कि खाकी केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और जनसेवा का भी प्रतीक है। सुखलदरी जैसे संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर इस तरह की तैयारी प्रशासन और जनता के बीच भरोसे को मजबूत करती है। अब देखना होगा कि भविष्य में इस मॉडल को अन्य पर्यटन स्थलों पर कैसे अपनाया जाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षित पर्यटन, साझा जिम्मेदारी

सुखलदरी जैसे प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा और स्वच्छता हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि प्रशासन और आमजन मिलकर नियमों का पालन करें, तो पर्यटन सुरक्षित और आनंददायक बन सकता है। इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और जिम्मेदार पर्यटन का संदेश आगे बढ़ाएं।

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Written by

डंडई, गढ़वा

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