
#डुमरी #कुपोषण_मुक्त : आंगनवाड़ी सेविकाओं को पोषण, शिशु देखभाल और स्वास्थ्य निगरानी का दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण।
गुमला जिले के डुमरी प्रखंड सभागार में कुपोषण मुक्त समाज निर्माण के उद्देश्य से दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एकजुट संस्था द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण में खेतली और मझगांव पंचायत की आंगनवाड़ी सेविकाओं को पोषण, शिशु स्वास्थ्य और कुपोषण रोकथाम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। यह प्रशिक्षण डुमरी और जारी प्रखंड में चरणबद्ध रूप से संचालित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जमीनी स्तर पर बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार लाना रहा।
- डुमरी प्रखंड सभागार में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन।
- एकजुट संस्था द्वारा कुपोषण मुक्त समाज निर्माण पर जोर।
- खेतली और मझगांव पंचायत की 25 सेविका दीदियों को प्रशिक्षण।
- शिशु के सुनहरे 1000 दिन और पोषण संतुलन पर विशेष सत्र।
- कुपोषण रोकथाम, टीकाकरण और वृद्धि निगरानी की दी गई जानकारी।
- प्रशिक्षण में पंकज ठाकुर सहित संस्था के पदाधिकारी रहे मौजूद।
डुमरी प्रखंड में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आंगनवाड़ी सेविकाओं की क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। कार्यक्रम का उद्देश्य सेविकाओं को वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारी देकर उन्हें अपने-अपने गांवों में कुपोषण के खिलाफ प्रभावी भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाना रहा।
चरणबद्ध तरीके से हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम
एकजुट संस्था द्वारा यह प्रशिक्षण बैच प्रणाली के तहत आयोजित किया गया। जानकारी के अनुसार, पिछले माह बैच 1 और 2 में जारी प्रखंड की सभी सेविका दीदियों का प्रशिक्षण पूरा किया गया था। वहीं इस माह बैच 3 और 4 के अंतर्गत डुमरी प्रखंड के 7 पंचायतों की सेविकाओं को प्रशिक्षित किया गया। इसके बाद बैच 5 में खेतली एवं मझगांव पंचायत की कुल 25 आंगनवाड़ी सेविका दीदियों का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
पहले दिन शिशु पोषण पर रहा फोकस
प्रशिक्षण के पहले दिन सेविकाओं को शिशु के सुनहरे 1000 दिन की अवधारणा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान बच्चों के आहार में गुणवत्ता सुनिश्चित करने, पोषण संतुलन बनाए रखने और कुपोषण के प्रकारों पर चर्चा की गई। साथ ही स्तनपान के महत्व और स्तनपान कराने की सही प्रक्रिया पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
दूसरे दिन कुपोषण रोकथाम और स्वास्थ्य निगरानी
प्रशिक्षण के दूसरे दिन सेविकाओं को कुपोषण रोकने के उपाय, टीकाकरण की अहमियत, PLA बैठक के संचालन, बच्चों की वृद्धि निगरानी और ग्राफ प्लाटिंग की तकनीक सिखाई गई। इसके अलावा समर अभियान से जुड़ी जानकारियां भी साझा की गईं, ताकि गर्मी के मौसम में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा सके।
गांव-गांव पहुंचेगा प्रशिक्षण का लाभ
कार्यक्रम में यह स्पष्ट किया गया कि प्रशिक्षण के दौरान दी गई सभी जानकारियों का उपयोग सेविकाएं अपने-अपने गांवों में करेंगी। इससे कुपोषण को कम करने, बच्चों के स्वास्थ्य और समग्र विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। सेविकाओं को यह भी बताया गया कि वे नियमित निगरानी और समुदाय की भागीदारी से बेहतर परिणाम हासिल कर सकती हैं।
प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों की रही सक्रिय भागीदारी
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंकज ठाकुर ने मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका निभाई। वहीं एकजुट संस्था के प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक अभिनंदन घोष, फील्ड फैसिलिटेटर गीता एक्का सहित खेतली और मझगांव पंचायत की आंगनवाड़ी सेविका दीदियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी और व्यवहारिक बताया।
कुपोषण के खिलाफ सामूहिक प्रयास
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि कुपोषण केवल स्वास्थ्य विभाग की समस्या नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। आंगनवाड़ी सेविकाएं इस लड़ाई की सबसे मजबूत कड़ी हैं, जिनके माध्यम से सरकारी योजनाएं और जागरूकता सीधे समुदाय तक पहुंचती हैं।
न्यूज़ देखो: जमीनी स्तर पर मजबूत हो रही पोषण की लड़ाई
डुमरी और जारी प्रखंड में आयोजित यह प्रशिक्षण कुपोषण के खिलाफ जमीनी स्तर पर किए जा रहे ठोस प्रयासों को दर्शाता है। सेविकाओं को वैज्ञानिक जानकारी और व्यावहारिक कौशल देकर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में यह एक सराहनीय कदम है। अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षण की सीख गांवों में कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
स्वस्थ बचपन से सशक्त समाज
कुपोषण मुक्त समाज की नींव स्वस्थ बचपन से रखी जाती है। आंगनवाड़ी सेविकाओं की यह भूमिका आने वाली पीढ़ी को मजबूत बनाने में अहम है।
समाज को भी इस प्रयास में साथ देना होगा।
पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनें।
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