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रांची में देश की कला और परंपरा का संगम, राष्ट्रीय हस्तशिल्प एक्सपो में झलका ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का स्वरूप

#रांची #हस्तशिल्प : हरमू मैदान में देशभर से आए शिल्पकारों ने सजाया हुनर का मेला, हस्तनिर्मित वस्तुओं ने खींचा लोगों का मन
  • हरमू मैदान रांची में राष्ट्रीय हस्तशिल्प एक्सपो का भव्य आयोजन जारी।
  • देशभर से आए 150 से अधिक शिल्पकारों ने लगाए अनोखे स्टॉल।
  • 24 नवंबर तक चलेगा हैंडलूम एक्सपो, वोकल फॉर लोकल पर विशेष जोर।
  • कश्मीर से कन्याकुमारी तक की कला और संस्कृति का अद्भुत संगम।
  • तसर सिल्क, डोकरा कला, बांस-लकड़ी उत्पादों सहित कई पारंपरिक वस्तुएं आकर्षण का केंद्र।

राजधानी रांची इन दिनों रंगों, कारीगरी और परंपरा का केंद्र बनी हुई है। हरमू मैदान में आयोजित राष्ट्रीय हस्तशिल्प एक्सपो ने शहर की सांस्कृतिक धड़कन को नई ऊर्जा दी है। देश के कोने-कोने से आए शिल्पकार अपने हुनर और परंपरागत कलाओं के माध्यम से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार कर रहे हैं।

देशभर के कलाकारों की एकजुटता

इस एक्सपो में तमिलनाडु, तेलंगाना, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों से आए कलाकारों ने अपने अनोखे उत्पादों के साथ भागीदारी की है। कुल 150 से अधिक स्टॉलों पर देश की विविध परंपराओं और कला का मिश्रण देखने को मिल रहा है। कहीं कश्मीर की ऊनी शॉलों की गर्माहट है, तो कहीं दक्षिण भारत के पीतल के बर्तनों की चमक। बिहार और बंगाल की पारंपरिक साड़ियाँ भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

वोकल फॉर लोकल की दिशा में कदम

रांची का यह हैंडलूम एक्सपो 24 नवंबर तक चलेगा, और इसका मुख्य उद्देश्य है हस्तनिर्मित वस्तुओं तथा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना। ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना के तहत स्थानीय उद्यमियों और कारीगरों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया है। झारखंड की तसर सिल्क, डोकरा कला, बांस और लकड़ी से बने उत्पाद मेले की शोभा बढ़ा रहे हैं।

खरीदारी नहीं, अनुभव का मेला

यह एक्सपो केवल खरीदारी का स्थल नहीं, बल्कि अनुभव और सांस्कृतिक मेलजोल का मंच भी बन गया है। आयोजन स्थल पर हर उम्र और हर वर्ग के लोगों के लिए कुछ न कुछ खास है। बच्चों के लिए झूले और मनोरंजन की व्यवस्था की गई है, वहीं फूड कोर्ट में देशभर के स्वादिष्ट व्यंजन उपलब्ध हैं। लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे माहौल को जीवंत बनाए हुए हैं।

शिल्पकारों ने सराहा रांची की संस्कृति

कश्मीर से आए एक शिल्पकार ने बताया कि रांची के लोगों की कला और हस्तशिल्प के प्रति लगन देखकर उन्हें अत्यंत खुशी हुई। वहीं केरल से आए व्यापारी ने कहा कि यहां के ग्राहक हस्तनिर्मित वस्तुओं के प्रति जागरूक हैं और पारंपरिक कला को सम्मान दे रहे हैं। आयोजक समिति का मानना है कि इस तरह के आयोजन न केवल कारीगरों को आर्थिक सहयोग प्रदान करते हैं, बल्कि उनके हुनर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी दिलाते हैं।

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न्यूज़ देखो: कला से जुड़ती देश की आत्मा

राष्ट्रीय हस्तशिल्प एक्सपो न केवल व्यापार का केंद्र है, बल्कि संस्कृति, परंपरा और एकता का प्रतीक बनकर उभरा है। यह आयोजन देश के हर कोने के कलाकारों को एक मंच पर लाता है, जहां वे अपने कौशल को निखारते हैं और साझा पहचान का निर्माण करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से भारत की आत्मा — उसकी विविधता — को नई ताकत मिलती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

परंपरा से प्रगति की ओर

रांची का यह हस्तशिल्प मेला हमें याद दिलाता है कि हमारी संस्कृति ही हमारी ताकत है। अब समय है कि हम सब मिलकर स्थानीय कारीगरों और उनके हुनर का समर्थन करें।
अपने शहर की कला को सराहें, इस खबर को शेयर करें और कमेंट में बताएं कि आपको कौन-सी पारंपरिक वस्तु सबसे अधिक पसंद आई।

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