
#सिमडेगा #मानवीय_पहल : पुलिस आरक्षी ने रक्तदान कर थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची की जान बचाई।
सिमडेगा में थैलेसीमिया से पीड़ित एक 9 वर्षीय बच्ची को समय पर रक्त न मिलने से संकट उत्पन्न हो गया था। ब्लड बैंक में ओ-पॉजिटिव रक्त उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में पुलिस प्रशासन से सहायता मांगी गई। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक आरक्षी ने स्वेच्छा से रक्तदान कर बच्ची के उपचार में अहम भूमिका निभाई। यह घटना पुलिस की संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी का सशक्त उदाहरण बनी।
- पिथरा नवाटोली निवासी रोनिका कुल्लू को तत्काल ओ-पॉजिटिव रक्त की जरूरत।
- 29 जनवरी की रात्रि पुलिस अधीक्षक को दी गई सूचना।
- आरक्षी 502 देव कुमार दास ने स्वेच्छा से रक्तदान किया।
- 30 जनवरी 2026 को सदर अस्पताल ब्लड बैंक में रक्तदान।
- मानवीय कार्य के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा प्रशस्ति पत्र से सम्मान।
सिमडेगा जिले में मानवता और कर्तव्यनिष्ठा का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है, जहां पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप और एक आरक्षी के निस्वार्थ रक्तदान से थैलेसीमिया पीड़ित एक मासूम बच्ची की जान बचाई जा सकी। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए राहत बनी, बल्कि समाज में पुलिस की संवेदनशील भूमिका को भी उजागर करती है।
बीमारी और आपात स्थिति की जानकारी
दिनांक 29 जनवरी को रात्रि लगभग 9 बजे सामाजिक कार्यकर्ता प्रभात कुमार के माध्यम से पुलिस अधीक्षक सिमडेगा को सूचना प्राप्त हुई कि पिथरा नवाटोली निवासी बिनोद कुल्लू की 9 वर्षीय पुत्री रोनिका कुल्लू गंभीर बीमारी थैलेसीमिया से पीड़ित है। बच्ची की स्थिति गंभीर थी और उसे तत्काल ओ-पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता थी। परिजनों द्वारा ब्लड बैंक से संपर्क करने पर पता चला कि आवश्यक रक्त उपलब्ध नहीं है।
पुलिस प्रशासन से सहायता की अपील
रक्त की अनुपलब्धता के कारण बच्ची का उपचार बाधित होने की आशंका बढ़ गई। इस आपात स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता के माध्यम से पुलिस प्रशासन से सहायता की अपील की गई। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक सिमडेगा ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।
रक्तदाता की पहचान और त्वरित कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार परिचारी प्रवर द्वारा तुरंत ओ-पॉजिटिव रक्त समूह वाले पुलिस कर्मी की पहचान की गई। इसके बाद अपर समाहर्ता के अंगरक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त आरक्षी 502 देव कुमार दास ने आगे बढ़कर स्वेच्छा से रक्तदान करने की सहमति दी।
सदर अस्पताल में रक्तदान
दिनांक 30 जनवरी 2026 को आरक्षी देव कुमार दास ने सदर अस्पताल, सिमडेगा के ब्लड बैंक में जाकर रक्तदान किया। उनके इस त्वरित और निस्वार्थ कदम से थैलेसीमिया पीड़ित बालिका के उपचार को गति मिली और परिजनों को बड़ी राहत मिली।
आरक्षी देव कुमार दास ने कहा: “एक पुलिसकर्मी होने के नाते समाज की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। यदि मेरे रक्त से किसी की जान बच सकती है, तो यह मेरे लिए गर्व की बात है।”
परिजनों और समाज की प्रतिक्रिया
रक्तदान के बाद बच्ची के परिजनों ने पुलिस प्रशासन और रक्तदाता आरक्षी के प्रति आभार व्यक्त किया। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्य समाज में विश्वास और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।
पुलिस की संवेदनशीलता का उदाहरण
यह पूरा घटनाक्रम सिमडेगा पुलिस की संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय क्षमता और सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आपात स्थिति में बिना किसी औपचारिकता के सहायता उपलब्ध कराना पुलिस की सकारात्मक छवि को और मजबूत करता है।
प्रशस्ति पत्र से सम्मान
आरक्षी देव कुमार दास के इस मानवीय और सराहनीय कार्य के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि अन्य कर्मियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
न्यूज़ देखो: जब वर्दी मानवता की मिसाल बन जाए
यह खबर दिखाती है कि पुलिस की भूमिका केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में मानव जीवन की रक्षा भी उसका अहम दायित्व है। एक आरक्षी द्वारा किया गया यह रक्तदान प्रशासनिक संवेदनशीलता का परिणाम है। ऐसे उदाहरण समाज और पुलिस के बीच विश्वास को और मजबूत करते हैं। सवाल यह है कि क्या ऐसे मानवीय कार्यों को संस्थागत स्तर पर और बढ़ावा दिया जाएगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
एक बूंद रक्त एक नई जिंदगी की उम्मीद
जब समय पर मदद मिल जाए, तो एक साधारण प्रयास भी किसी के लिए जीवनदान बन सकता है। रक्तदान जैसे कार्य समाज को जोड़ते हैं और मानवीय मूल्यों को जीवित रखते हैं। ऐसे उदाहरण हमें भी आगे बढ़कर मदद करने की प्रेरणा देते हैं।







