बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ 26 मई को गेट जाम आंदोलन का ऐलान, हजारों मजदूरों के जुटने का दावा

बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ 26 मई को गेट जाम आंदोलन का ऐलान, हजारों मजदूरों के जुटने का दावा

author News देखो Team
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#गिरिडीह #मजदूर_आंदोलन : छंटनीग्रस्त मजदूरों की बहाली को लेकर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी गई।

बालमुकुंद फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के आठवें दिन माले और असंगठित मजदूर मोर्चा ने 26 मई को फैक्ट्री गेट जाम आंदोलन का ऐलान किया है। नेताओं ने आरोप लगाया कि मजदूरों की छंटनी और शोषण के बावजूद प्रबंधन कोई पहल नहीं कर रहा है। संगठनों ने गिरिडीह उपायुक्त को आवेदन देकर मामले की जांच की मांग की और चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर हजारों आंदोलनकारी जेल भरो आंदोलन में शामिल होंगे। कार्यक्रम में कई विधायक, पूर्व विधायक और मजदूर संगठनों के नेता शामिल होने वाले हैं।

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  • 26 मई को बालमुकुंद फैक्ट्री गेट जाम आंदोलन का ऐलान।
  • सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो और निरसा विधायक अरूप चटर्जी होंगे शामिल।
  • माले और असंगठित मजदूर मोर्चा ने उपायुक्त को सौंपा आवेदन।
  • छंटनीग्रस्त 5 मजदूरों की बहाली की उठी मांग।
  • नेताओं ने फैक्ट्री प्रबंधन पर शोषण और मनमानी के लगाए आरोप।
  • आंदोलन में 13 प्रखंडों से हजारों लोगों के जुटने का दावा।

बालमुकुंद फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ मजदूरों का आंदोलन लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। अनिश्चितकालीन धरने के आठवें दिन माले और असंगठित मजदूर मोर्चा ने 26 मई को फैक्ट्री गेट जाम आंदोलन करने की घोषणा की। नेताओं ने कहा कि यदि 25 मई तक छंटनी किए गए मजदूरों को वापस काम पर नहीं रखा गया तो बड़े स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा। इसको लेकर गिरिडीह उपायुक्त को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग भी की गई है।

पपरवाटांड़ में हुई रणनीतिक बैठक

गिरिडीह के पपरवाटांड़ स्थित जिला कार्यालय में माले जिला सचिव अशोक पासवान और किसान नेता पूरन महतो की अगुवाई में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मजदूर आंदोलन को व्यापक रूप देने की रणनीति बनाई गई।

बैठक में विधानसभा में उठे मुद्दों, श्रम मंत्री संजय यादव के जवाब और श्रम अधीक्षक द्वारा जारी पत्र पर चर्चा की गई। नेताओं ने बताया कि गिरिडीह एसडीओ, मुफ्फसिल थाना प्रभारी और श्रम अधीक्षक को पहले ही ज्ञापन सौंपा जा चुका है।

26 मई को होगा बड़ा आंदोलन

माले जिला सचिव अशोक पासवान ने कहा कि धरना के आठ दिन बीत जाने के बाद भी फैक्ट्री प्रबंधन ने कोई सकारात्मक पहल नहीं की है। उन्होंने चेतावनी दी कि मजदूरों के अधिकारों के लिए अब निर्णायक आंदोलन किया जाएगा।

अशोक पासवान ने कहा: “25 मई तक यदि पांच मजदूरों को वापस काम पर नहीं लिया गया तो 26 मई को हजारों की संख्या में फैक्ट्री गेट जाम किया जाएगा। लोकतांत्रिक आंदोलन के माध्यम से मजदूरों का हक लेकर रहेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि फैक्ट्री में स्थानीय मजदूरों की संख्या और उन्हें दिए जा रहे मानदेय की भी जांच कराई जाएगी।

मजदूर शोषण और पर्यावरण नुकसान के आरोप

किसान नेता पूरन महतो ने फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूरों के शोषण और आसपास के खेतों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।

पूरन महतो ने कहा: “फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों का शोषण कर रहा है। आसपास के खेतों को भी नुकसान पहुंचा है, जिसका मुआवजा मिलना चाहिए।”

वहीं माले नेता राजेश सिन्हा ने फैक्ट्री प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री में स्थानीय लोगों को पर्याप्त रोजगार नहीं दिया जा रहा है और आवाज उठाने वालों पर फर्जी मुकदमे किए जाते हैं।

राजेश सिन्हा ने कहा: “फैक्ट्री में 70 प्रतिशत स्थानीय लोग काम नहीं कर रहे हैं। जीएसटी चोरी, अवैध बालू तस्करी और नदी से पानी उठाने जैसे मामलों की भी जांच होनी चाहिए।”

15-16 घंटे काम कराने का आरोप

असंगठित मजदूर मोर्चा के केंद्रीय सचिव कन्हाई पांडेय ने कहा कि फैक्ट्री में मजदूरों से जबरन लंबे समय तक काम कराया जाता है और विरोध करने पर दबाव बनाया जाता है।

कन्हाई पांडेय ने कहा: “बालमुकुंद फैक्ट्री मजदूरों के साथ अन्याय कर रही है। जबरन 15-16 घंटे काम कराया जाता है और फर्जी मुकदमे किए जाते हैं।”

उन्होंने जिला प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की।

हजारों आंदोलनकारियों के जुटने का दावा

नेताओं ने दावा किया कि 26 मई के आंदोलन में 13 प्रखंडों से जिला कमिटी, राज्य कमिटी और विभिन्न संगठनों के हजारों लोग शामिल होंगे।

सकलदेव यादव, मुन्ना राणा, मुस्तकीम अंसारी, अशोक मिस्त्री, नागेश्वर महतो, अजीत राय और रामलाल मुर्मू ने कहा कि आंदोलन को लेकर व्यापक तैयारी की जा रही है।

नेताओं ने कहा: “जिला प्रशासन 1000 आंदोलनकारियों के जेल भरने की तैयारी कर ले। मजदूरों के अधिकारों से समझौता नहीं होगा।”

वहीं सलामत अंसारी और मसूदन कोल ने कहा कि अभी भी समय है कि फैक्ट्री प्रबंधन वार्ता के जरिए समाधान निकाले, अन्यथा आंदोलन तय है।

कई वरिष्ठ नेता रहेंगे मौजूद

26 मई को होने वाले आंदोलन में सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो, निरसा विधायक अरूप चटर्जी, पूर्व विधायक विनोद सिंह, पूर्व विधायक राजकुमार यादव और यूनियन महासचिव निताय महतो के शामिल होने की जानकारी दी गई।

बैठक में राजेश सिन्हा, कन्हैया पाण्डेय, शेखर सुमन दास, मनूवर हसन बंटी, सलामत अंसारी, सकलदेव यादव, मुन्ना राणा, मुस्तकीम अंसारी, नागेश्वर महतो, अजीत राय, अशोक मिस्त्री और मसूदन कोल समेत कई लोग मौजूद रहे।

मधुबन में होगा माले का जिला सम्मेलन

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जून के प्रथम सप्ताह में मधुबन पीरटांड़ में माले का जिला सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें 5000 से अधिक कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है।

सम्मेलन में रैली, खुला सत्र और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम की मॉनिटरिंग राज्य सचिव मनोज भक्त, पूर्व विधायक विनोद सिंह और राजकुमार यादव द्वारा की जा रही है।

न्यूज़ देखो: मजदूर आंदोलन अब बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदलता दिख रहा

बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब केवल कुछ मजदूरों की बहाली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह श्रमिक अधिकार, स्थानीय रोजगार और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। लगातार बढ़ते विरोध और बड़े नेताओं की भागीदारी से साफ है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक हो सकता है। प्रशासन के लिए जरूरी है कि समय रहते निष्पक्ष जांच कर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। लोकतांत्रिक आंदोलनों को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर हालात पैदा कर सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मजदूरों की आवाज को सुनना ही समाधान की पहली शर्त

किसी भी उद्योग की असली ताकत उसके मेहनतकश मजदूर होते हैं। यदि श्रमिकों की समस्याओं को अनदेखा किया जाएगा तो असंतोष बढ़ना तय है। इसलिए जरूरी है कि मजदूरों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए सभी पक्ष संवेदनशीलता के साथ आगे आएं।

लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन लोगों की आवाज उठाने का वैधानिक माध्यम है। प्रशासन, उद्योग और समाज को मिलकर ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां न्याय और संवाद दोनों कायम रहें।

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