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छतरपुर में भारतीय नववर्ष पर भव्य आरती, राष्ट्रीय सेवा मंच ने निभाई 16 वर्षों की परंपरा

#छतरपुर #पलामू #भारतीयनववर्ष : चैत्र प्रतिपदा पर भास्कर आरती से गूंजा शहर।

पलामू के छतरपुर में भारतीय नववर्ष एवं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा मंच द्वारा भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। उदयीमान सूर्य भगवान भास्कर की आरती के साथ आयोजन की शुरुआत हुई। विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखी गई।

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  • राष्ट्रीय सेवा मंच द्वारा 16 वर्षों से आयोजित परंपरागत आरती कार्यक्रम।
  • प्रियरंजन पाठक के नेतृत्व में भगवान भास्कर की भव्य आरती।
  • 151 दीपों से सजा आकर्षक दीप प्रज्वलन समारोह।
  • विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुति
  • सैकड़ों लोगों की उपस्थिति, बच्चों को दिया गया सहभागिता प्रमाणपत्र।

पलामू जिले के छतरपुर में भारतीय नववर्ष और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर राष्ट्रीय सेवा मंच द्वारा भव्य एवं दिव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में परंपरा, संस्कृति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां उदयीमान भगवान भास्कर की आरती के साथ नववर्ष का स्वागत किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय छहमुहान स्थल पर किया गया, जहां प्रातःकालीन वातावरण में श्रद्धा और भक्ति की धारा प्रवाहित होती नजर आई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों ने इस आयोजन में भाग लिया।

16 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा

राष्ट्रीय सेवा मंच के केंद्रीय अध्यक्ष प्रियरंजन पाठक समर्पण के नेतृत्व में यह आयोजन लगातार 16 वर्षों से किया जा रहा है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा:

“राष्ट्रीय सेवा मंच तथा समाज सेवा के लिए समर्पित है मेरा जीवन।”

उन्होंने आगे बताया:

“यह परंपरा पिछले 15 वर्षों से चली आ रही है और जब तक जीवन रहेगा, यह आयोजन जारी रहेगा।”

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भारतीय नववर्ष का महत्व बताया

प्रियरंजन पाठक ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के महत्व को विस्तार से समझाते हुए बताया कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसी तिथि को सिखों के द्वितीय गुरु अंगदेव जी का प्राकट्य हुआ था।

उन्होंने यह भी बताया कि:

  • इसी दिन से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होती है
  • महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना इसी दिन की
  • यह ऋतु परिवर्तन का भी प्रतीक है

उन्होंने कहा कि इस दिन प्रकृति भी नवजीवन का संदेश देती है, जब पेड़ों में नए पत्ते और फूल खिलते हैं।

दीप प्रज्वलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम

कार्यक्रम में पूनम तिवारी और सोनम पाठक द्वारा 151 दीपों को सजाकर दीप प्रज्वलन किया गया, जिसने पूरे माहौल को दिव्य बना दिया।

सुबह 4:00 बजे से ही अंशु, कसक, लाडो और काजल द्वारा भू-अलंकरण का कार्य किया गया।

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के संगीत शिक्षक अंजनी आचार्य के नेतृत्व में सलोनी, खुशी, अंजलि, जानवी, पलक, अंशुका, सुप्रिया, काजल, सुहाना, माही, श्रेया सहित कई विद्यार्थियों ने भजन और आरती प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विभिन्न स्कूलों की भागीदारी

कार्यक्रम में कई शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जिनमें प्रमुख रूप से:

  • एमवीडी पब्लिक स्कूल जेलहाता – निर्देशक धीरज सिंह, प्राचार्य रेनू सिंह के नेतृत्व में
  • एमएस डीएवी इंटरनेशनल स्कूल, लोहरसेमी चैनपुर – प्राचार्य पूर्णिमा मिश्र और शिक्षकों के मार्गदर्शन में
  • वीपीएम न्यू विजन पब्लिक स्कूल
  • एजुकेशन ट्री कोचिंग संस्थान

इन संस्थानों के छात्रों ने भजन, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर आयोजन को भव्य बनाया।

भजन प्रस्तुति ने बांधा समा

कार्यक्रम में महानायक उमाशंकर मिश्रा ने “जरा देर ठहरो राम…” भजन प्रस्तुत कर सभी उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही।

जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति

इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता विभाकर नारायण पांडे ने कहा:

“राष्ट्रीय सेवा मंच का यह कार्य सराहनीय है, जो बच्चों को हमारी संस्कृति से जोड़ रहा है।”

कार्यक्रम में केंद्रीय महासचिव अर्चना सिंह, पलामू सचिव प्रेम प्रकाश दुबे, निभाकर नारायण पांडे, डॉ. प्रेमचंद, बृजेश शुक्ला, संजू शुक्ल, घनश्याम ठाकुर, मणि शंकर, सच्चिदानंद पाठक, श्याम बिहारी राय, नवीन सिंह, रानी, सुप्रिया, रविंद्र नाथ ठाकुर, विजय ठाकुर सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

प्रमाण पत्र वितरण के साथ समापन

कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया और प्रसाद वितरण के साथ आयोजन का समापन हुआ।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी बना।

न्यूज़ देखो: परंपरा से जुड़ाव का संदेश

छतरपुर में आयोजित यह कार्यक्रम दिखाता है कि अगर समाज संगठित हो तो परंपराएं जीवंत रहती हैं। बच्चों को संस्कृति से जोड़ने की यह पहल सराहनीय है, लेकिन क्या यह प्रयास पूरे वर्ष जारी रहेगा—यह महत्वपूर्ण सवाल है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी संस्कृति से जुड़ें, नई पीढ़ी को आगे बढ़ाएं

भारतीय नववर्ष हमें अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर देता है।
जरूरी है कि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को सिर्फ त्योहारों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें जीवन का हिस्सा बनाएं।

अपने बच्चों को भी इन मूल्यों से जोड़ें और उन्हें सही दिशा दें।
अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और संस्कृति संरक्षण की इस पहल का हिस्सा बनें।

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