सिलम जतरा में नागपुरी संस्कृति का भव्य उत्सव, रंगारंग कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब

सिलम जतरा में नागपुरी संस्कृति का भव्य उत्सव, रंगारंग कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब

author MD. Waris
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#रायडीह #सिलम_जतरा : पारंपरिक रीति-रिवाज और नागपुरी कला ने गांव को उत्सवमय बनाया।

रायडीह प्रखंड के सिलम गांव में रविवार को वार्षिक जतरा के अवसर पर भव्य नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि युवा नेता मिशिर कुजूर ने फीता काटकर किया। जतरा में पारंपरिक पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सामाजिक सहभागिता देखने को मिली। आयोजन ने गांव की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया।

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  • सिलम गांव में वार्षिक जतरा के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक आयोजन।
  • मिशिर कुजूर ने फीता काटकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
  • महतो मांगू उरांव और बैगा भोला उरांव ने पारंपरिक रीति से पूजा संपन्न कराई।
  • प्रसिद्ध नागपुरी गायिकाओं और कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां।
  • युवा समिति सिलम की सक्रिय भूमिका, बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता।

रायडीह प्रखंड के सिलम गांव में आयोजित वार्षिक जतरा इस वर्ष भी पूरे उल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में सुबह से ही गांव में उत्सव का माहौल देखने को मिला। जतरा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और आसपास के गांवों से भी लोग बड़ी संख्या में कार्यक्रम देखने पहुंचे। आयोजन का मुख्य आकर्षण नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा, जिसने ग्रामीण परिवेश में सांस्कृतिक चेतना को जीवंत कर दिया।

मुख्य अतिथि ने जतरा की महत्ता पर डाला प्रकाश

कार्यक्रम का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि मिशिर कुजूर ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा:

मिशिर कुजूर ने कहा: “जतरा हमारे पुरखों की धरोहर और गांव की पहचान है। इसे जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।”

उन्होंने आगे कहा कि सिलम गांव की युवा समिति ने जिस तरह से लगातार जतरा का आयोजन कर परंपरा को जीवंत रखा है, वह सराहनीय है। जतरा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने और पीढ़ियों को जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पुराने समय में जतरा के अवसर पर दूर-दराज के रिश्तेदार एकत्र होते थे और आज भी यह परंपरा सिलम गांव में जीवित है।

पारंपरिक पूजा और सामाजिक मंगलकामना

सांस्कृतिक कार्यक्रम से पूर्व सिलम गांव के मांगू उरांव (महतो) और भोला उरांव (बैगा) ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार जतरा स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान मुर्गा बलि देकर गांव, घर और समाज की सुख-शांति, समृद्धि, अच्छी वर्षा और अच्छी फसल की कामना की गई। पूजा के समय बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे और सभी ने सामूहिक रूप से मंगलकामना की।

अतिथियों का पारंपरिक सम्मान

पूजा-अर्चना के उपरांत कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और माला पहनाकर किया गया। आयोजन समिति की ओर से सभी अतिथियों को सम्मानित किया गया, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी गरिमामय बन गया। ग्रामीणों ने अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत कर अपनी सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया।

नागपुरी कलाकारों की प्रस्तुति ने मोहा मन

कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध नागपुरी गायिकाओं चिन्ता देवी, सोनी कुमारी, जगदीश बड़ाईक और अनिल मुंडा ने अपने गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं चर्चित डांसर सारिका नायक ने अपने सशक्त नृत्य से समां बांध दिया। नागपुरी गीत-संगीत पर दर्शक झूमते नजर आए और देर शाम तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।

आयोजन समिति और प्रशासन की सहभागिता

कार्यक्रम को सफल बनाने में सिलम गांव की आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मौके पर समिति के अध्यक्ष संजीव कुमार उरांव, उपाध्यक्ष रविन्द्र सिंह, सचिव रंजन उरांव, कोषाध्यक्ष आकाश साहु सहित प्रदुमन सिंह, सतीश साहु, मंगल लोहरा, खुशमन नायक, भरत प्रधान, राजू सिंह, विरेंद्र उरांव, जितराम लोहरा, सुगिया देवी, देवमुनी देवी, सरिता देवी मौजूद रहे।

साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रायडीह थाना के सत्रुधन असरफ, राय लालो और दिपांकर साहू भी कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: परंपरा और संस्कृति की जीवंत मिसाल

सिलम गांव का वार्षिक जतरा यह दर्शाता है कि ग्रामीण समाज आज भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा हुआ है। युवा समिति की सक्रियता और ग्रामीणों की सहभागिता ने आयोजन को सफल बनाया। ऐसे आयोजन सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं और लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सांस्कृतिक चेतना से मजबूत होता समाज

जतरा जैसे आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम हैं।
जब गांव एकजुट होकर परंपरा को निभाता है, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
आप भी अपनी स्थानीय संस्कृति को संजोने में भागीदार बनें।
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Written by

रायडीह, गुमला

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