
#हुसैनाबाद #चौहरमल_जयंती : सांस्कृतिक कार्यक्रम में उमड़ा जनसमूह—समता और वीरता का संदेश।
पलामू के हुसैनाबाद क्षेत्र के गम्हरिया गांव में 713वीं वीर चौहरमल जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें विधायक जनार्दन पासवान सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में सामाजिक समता और वीरता का संदेश दिया गया। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही।
- गम्हरिया गांव में 713वीं वीर चौहरमल जयंती मनाई गई।
- जनार्दन पासवान (विधायक) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारी भीड़ और उत्साह।
- राजू पासवान ने भक्ति और लोकगीत प्रस्तुत किए।
- कई जनप्रतिनिधि और समाजसेवियों की उपस्थिति।
पलामू जिले के हुसैनाबाद नगर पंचायत अंतर्गत गम्हरिया गांव में वीर शिरोमणि बाबा चौहरमल की 713वीं जयंती बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर हर वर्ष की तरह इस बार भी भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिससे पूरे आयोजन में आध्यात्मिक और उत्सव का माहौल बन गया।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ
इस आयोजन का शुभारंभ मुख्य अतिथि चतरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक जनार्दन पासवान और संस्थापक अखिलेश पासवान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
जनार्दन पासवान ने कहा: “वीर चौहरमल जयंती सामाजिक समता, त्याग और वीरता का प्रतीक है।”
वीर चौहरमल के योगदान पर प्रकाश
विधायक जनार्दन पासवान ने अपने संबोधन में बताया कि बाबा चौहरमल पासवान समाज के महान लोकनायक थे और उन्हें कुल देवता के रूप में भी पूजा जाता है। उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि बाबा चौहरमल के सिद्धांत आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक हैं और हमें उनके मार्ग पर चलने की आवश्यकता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में बंधा समां
कार्यक्रम में भोजपुरी गायक राजू पासवान (नवादा, बिहार) ने अपने गीतों के माध्यम से वीर चौहरमल की जीवनी प्रस्तुत की, जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
एक दर्शक ने कहा: “गीतों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।”
ऐतिहासिक कथा का उल्लेख
कार्यक्रम के दौरान रेशमा और चौहरमल की प्रसिद्ध कथा का भी उल्लेख किया गया, जो सामाजिक समरसता और प्रेम का प्रतीक मानी जाती है।
बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति
इस आयोजन में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें—
अखिलेश पासवान, विकास कुमार पासवान, अजय कुमार भारती, शशी कुमार, रामेश्वर राम उर्फ छठन पासवान, ऊषा देवी, रीता देवी, मुन्ना कुमार देव, विनय कुमार पासवान, राजा पासवान, डॉ. राकेश पासवान, चक्रवर्ती पासवान, ललन पासवान, शांति देवी, नरेश कुमार पासवान, अजय प्रसाद गुप्ता, चंदन कुमार सिंह, योगेन्द्र सिंह उर्फ गुड्डू सिंह, सोनू कुमार पासवान, शक्ति पासवान, भोला पासवान, रामजवित पासवान, रंजित कुमार पासवान, अमित कुमार पासवान, प्रन्वसुमन, एसआई सुरेश कुमार पासवान, मुन्ना यादव सहित कई लोग शामिल हुए।
सामाजिक एकता का संदेश
यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समरसता का प्रतीक भी बना। इसमें सभी वर्गों के लोगों ने भाग लेकर भाईचारे का संदेश दिया।
परंपरा और संस्कृति का संगम
कार्यक्रम ने क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का कार्य किया और लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का अवसर दिया।

न्यूज़ देखो: परंपरा से मिलता है समाज को बल
गम्हरिया का यह आयोजन यह दर्शाता है कि ऐसे समारोह समाज में एकता और प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। वीर चौहरमल जैसे महापुरुषों के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपने इतिहास से जुड़ें, समाज को मजबूत करें
महापुरुषों की कहानियां हमें प्रेरणा देती हैं।
जरूरी है कि हम उनके विचारों को अपनाएं।
सामाजिक समता और भाईचारा ही असली शक्ति है।
आइए, हम अपने इतिहास से सीख लेकर आगे बढ़ें।
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