
#आनंदपुर #मंगला_पूजा : घटयात्रा और भिक्षाटन से गूंजा क्षेत्र—महिलाओं ने संतान सुख की कामना की।
पश्चिम सिंहभूम के आनंदपुर में चैत्र माह के अवसर पर माँ मंगला पूजा धूमधाम से मनाई गई। श्रद्धालुओं ने घटयात्रा निकालकर मंदिर में पूजा-अर्चना की और मन्नतें मांगी। बच्चों ने भिक्षाटन कर प्रसाद संग्रह किया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण शामिल हुए। यह परंपरा क्षेत्र में विशेष धार्मिक महत्व रखती है।
- आनंदपुर प्रखंड में माँ मंगला पूजा का आयोजन।
- अंबेडकर बस्ती मंगला मंदिर में निकली भव्य घटयात्रा।
- बच्चों ने भिक्षाटन कर प्रसाद संग्रह किया।
- महिलाओं ने संतान सुख के लिए व्रत रखा।
- श्रद्धालुओं ने फल-फूल और पशु बलि अर्पित की।
पश्चिम सिंहभूम जिले के आनंदपुर प्रखंड में चैत्र माह के अवसर पर माँ मंगला पूजा पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस दौरान पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की।
भिक्षाटन की परंपरा से शुरुआत
मंगलवार की सुबह बच्चों ने पारंपरिक भिक्षाटन की प्रक्रिया के तहत घर-घर जाकर प्रसाद संग्रह किया। यह प्रसाद माँ मंगला को अर्पित किया जाता है, जो इस पूजा की एक विशेष परंपरा मानी जाती है।
स्थानीय लोगों ने बताया: “भिक्षाटन से बच्चों को आशीर्वाद और संस्कार दोनों मिलते हैं।”
भव्य घटयात्रा का आयोजन
दोपहर बाद प्रखंड के अंबेडकर बस्ती और हरिजन टोला स्थित मंगला मंदिर में भव्य घटयात्रा निकाली गई। व्रती महिलाओं ने सांपु नाला के मंगला घाट से कलश में जल भरकर बाजे-गाजे के साथ मंदिर तक यात्रा की।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और जयकारों के साथ यात्रा को उत्सव का रूप दे दिया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़
मंगला मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे और विधिवत पूजा-अर्चना की। महिलाओं और बच्चों की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली।
बच्चों ने पुजारी और व्रती महिलाओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
पारंपरिक भोग और बलि
माँ मंगला को महुआ, आम, केंदू, चाहर जैसे स्थानीय फल-फूल अर्पित किए गए। इसके साथ ही कुछ श्रद्धालुओं ने अपनी मन्नत पूरी होने पर बकरे और मुर्गे की बलि भी दी।
यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और स्थानीय संस्कृति का हिस्सा है।
संतान प्राप्ति के लिए विशेष व्रत
इस पूजा का विशेष महत्व संतान प्राप्ति से जुड़ा हुआ है। महिलाएं संतान सुख की कामना करते हुए व्रत रखती हैं और घटयात्रा में शामिल होती हैं।
श्रद्धालु महिलाओं ने कहा: “माँ मंगला की कृपा से हमारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।”
मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु पुनः पूजा कर धन्यवाद अर्पित करते हैं।
परंपरा और आस्था का संगम
मंगला पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इसमें स्थानीय संसाधनों और परंपराओं का समावेश इसे और विशेष बनाता है।
न्यूज़ देखो: परंपरा में छिपा सामाजिक संदेश
आनंदपुर की मंगला पूजा यह दर्शाती है कि ग्रामीण समाज आज भी अपनी परंपराओं और आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का भी माध्यम है। अब यह देखना होगा कि आने वाली पीढ़ियां इसे किस तरह आगे बढ़ाती हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपनी संस्कृति को सहेजें, पहचान को मजबूत करें
हमारी परंपराएं हमारी असली पहचान हैं।
ऐसे आयोजनों से हमें अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
जरूरी है कि हम इन परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं।
आस्था और संस्कृति ही समाज को एकजुट रखती है।
अगर आपको यह आयोजन प्रेरणादायक लगा हो तो इसे जरूर साझा करें।
अपनी राय कमेंट में दें और इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।






