बोलबा में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन, एकता और सांस्कृतिक मूल्यों पर दिया गया जोर

बोलबा में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन, एकता और सांस्कृतिक मूल्यों पर दिया गया जोर

author Satyam Kumar Keshri
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#बोलबा #हिंदू_सम्मेलन : बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति में सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया गया।

सिमडेगा के बोलबा प्रखंड में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने समाज में एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया। संत-महात्माओं और संगठन के पदाधिकारियों ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया। आयोजन शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।

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  • बोलबा प्रखंड मुख्यालय में आयोजित हुआ विराट हिंदू सम्मेलन।
  • चंद्रकांत रायपत और कुणाल जी रहे मुख्य अतिथि।
  • समाज में एकता और संगठन पर दिया गया जोर।
  • हनुमान चालीसा पाठ और पुजारियों का सम्मान।
  • बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की भागीदारी

सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड मुख्यालय में शनिवार को विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और पूरे परिसर में उत्साह और आस्था का माहौल देखने को मिला।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर कई संत-महात्मा और समाज के प्रमुख लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने आयोजन को गरिमा प्रदान की।

प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक कुणाल जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इसके अलावा रामरेखा धाम के महंत अखंड दास महाराज सहित कई अन्य संत-महात्माओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

सामाजिक एकता पर जोर

अपने संबोधन में वक्ताओं ने समाज में एकता, संगठन और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

चंद्रकांत रायपत ने कहा: “समाज को बांटने वाले भ्रम और दुष्प्रचार से सावधान रहने की जरूरत है।”

उन्होंने सरना और सनातन परंपरा के प्रकृति पूजक स्वरूप का उल्लेख करते हुए सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया।

संगठन और पर्यावरण पर चर्चा

कार्यक्रम में कुणाल जी ने संगठन की शक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों पर विशेष जोर दिया।

कुणाल जी ने कहा: “समाज की मजबूती संगठन और संस्कारों से ही संभव है।”

राम के आदर्शों को अपनाने की अपील

रामरेखा धाम के महंत अखंड दास महाराज ने अपने संबोधन में भगवान राम के आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने जात-पात और अंधविश्वास से ऊपर उठकर समाज में समरसता स्थापित करने की अपील की।

अखंड दास महाराज ने कहा: “हमें राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना चाहिए और समाज में भाईचारा बढ़ाना चाहिए।”

हनुमान चालीसा पाठ और सम्मान समारोह

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने भाग लिया। इसके साथ ही समाज में योगदान देने वाले पहान पुजारियों को सम्मानित किया गया।

स्थानीय लोगों का सहयोग

इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके सहयोग से कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।

न्यूज़ देखो: सामाजिक एकता की दिशा में पहल

बोलबा में आयोजित यह सम्मेलन दर्शाता है कि समाज में एकता और समरसता बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। विभिन्न वर्गों को जोड़ने और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में यह एक सकारात्मक पहल है। अब यह देखना होगा कि इन संदेशों को जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

एकता में ही समाज की शक्ति

समाज की मजबूती उसकी एकता और आपसी सहयोग में निहित होती है। जब हम मिलकर आगे बढ़ते हैं, तभी विकास और शांति संभव होती है। हमें अपने संस्कारों और मूल्यों को बनाए रखते हुए एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए।

आइए, हम सभी मिलकर समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करें।
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Written by

सिमडेगा नगर क्षेत्र

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