रायकेरा हनुमान मंदिर से निकली भव्य कलश यात्रा, तीन दिवसीय अखंड हरी कीर्तन सह यज्ञ महोत्सव का शुभारंभ

रायकेरा हनुमान मंदिर से निकली भव्य कलश यात्रा, तीन दिवसीय अखंड हरी कीर्तन सह यज्ञ महोत्सव का शुभारंभ

author Shivnandan Baraik
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#सिमडेगा #धार्मिक_आयोजन : रायकेरा में कलश यात्रा के साथ भक्ति का माहौल बना।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत रायकेरा स्थित हनुमान मंदिर परिसर से तीन दिवसीय अखंड हरी कीर्तन सह यज्ञ महोत्सव का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा संपन्न हुई। यह आयोजन क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सामुदायिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा।

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  • रायकेरा हनुमान मंदिर से भव्य कलश यात्रा के साथ आयोजन शुरू।
  • तीन दिवसीय अखंड हरी कीर्तन सह यज्ञ का आयोजन किया जा रहा।
  • पंडित दुर्योधन दास व श्याम सुंदर मिश्रा ने विधिवत पूजा संपन्न कराई।
  • गोपाल शरण साहू व बिंदेश्वरी देवी यजमान की भूमिका में।
  • 20 मार्च से अखंड कीर्तन और 21 मार्च को पूर्णाहुति व भंडारा।
  • सैकड़ों श्रद्धालुओं की भागीदारी से भक्ति का माहौल बना।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड क्षेत्र के रायकेरा चौक स्थित हनुमान मंदिर परिसर में तीन दिवसीय अष्टप्रहरी अखंड हरी कीर्तन सह यज्ञ महोत्सव की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। कीर्तन समिति रायकेरा के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक उत्सव में क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।

भव्य कलश यात्रा से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत यज्ञ स्थल से भव्य कलश यात्रा के साथ की गई। श्रद्धालु विभिन्न मार्गों से होते हुए जलाशय तक पहुंचे, जहां विधि-विधान से कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने जल लेकर पुनः शोभायात्रा के रूप में मंदिर परिसर की ओर प्रस्थान किया।

पूरे मार्ग में “हर हर महादेव” और “जय श्री राम” के जयघोष गूंजते रहे। भगवा ध्वज लिए श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई पूजा

यज्ञ स्थल पर पहुंचने के बाद पुरोहित पंडित बाबा दुर्योधन दास एवं श्याम सुंदर मिश्रा द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कराई गई।

पंडित बाबा दुर्योधन दास ने कहा: “यज्ञ और कीर्तन से वातावरण शुद्ध होता है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।”

इस आयोजन में गोपाल शरण साहू एवं उनकी धर्मपत्नी बिंदेश्वरी देवी यजमान के रूप में शामिल हुए और विधि-विधान से सभी धार्मिक क्रियाओं का निर्वहन किया।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, गांव हुआ भक्तिमय

कलश यात्रा और शोभायात्रा में महिला, पुरुष, युवक-युवतियों और बच्चों की बड़ी संख्या देखने को मिली। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और भजन-कीर्तन के साथ पूरा गांव आध्यात्मिक रंग में रंग गया।

मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।

तीन दिनों तक चलेगा धार्मिक अनुष्ठान

आयोजन समिति के अनुसार यह महोत्सव तीन दिनों तक चलेगा।

  • 20 मार्च (शुक्रवार) को सुबह नामकरण संस्कार के साथ अष्टप्रहरी अखंड हरी कीर्तन का शुभारंभ किया जाएगा।
  • 21 मार्च (शनिवार) को पूर्णाहुति, नगर भ्रमण एवं महाभंडारा के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।

इस दौरान लगातार भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा।

आयोजन को सफल बनाने में इनकी रही अहम भूमिका

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में गुरूदत्त प्रसाद सिंह, शिवशरण सिंह, महेंद्र देहरी, घनश्याम सिंह, रघुवर सिंह सहित कई लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कीर्तन समिति रायकेरा के अध्यक्ष धनंजय साहू, सचिव अर्जुन कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष सुमन कुमार सिंह एवं समिति के अन्य पदाधिकारियों और ग्रामीणों का भी विशेष योगदान रहा।

समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस यज्ञ महोत्सव को सफल बनाने की अपील की है।

न्यूज़ देखो: आस्था और एकता का जीवंत उदाहरण

रायकेरा का यह आयोजन दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी धार्मिक परंपराएं और सामूहिकता कितनी मजबूत है। ऐसे कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं, बल्कि समाज को जोड़ने का भी कार्य करते हैं। प्रशासन और स्थानीय समितियों को ऐसे आयोजनों को और बेहतर बनाने के लिए सहयोग करना चाहिए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था के साथ जुड़ें, संस्कृति को आगे बढ़ाएं

धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये हमारी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम भी हैं। ऐसे आयोजनों में भाग लेकर हम अपनी जड़ों से जुड़ते हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।

आइए हम भी अपने क्षेत्र के ऐसे कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लें और आपसी एकता को मजबूत करें।

अगर आपके आसपास भी ऐसे आयोजन हो रहे हैं, तो उनकी जानकारी साझा करें और दूसरों को भी प्रेरित करें।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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