भंडार में बनेगा भव्य मां गायत्री शक्तिपीठ मंदिर, करोड़ों की लागत से तैयार होगा आस्था का केंद्र

भंडार में बनेगा भव्य मां गायत्री शक्तिपीठ मंदिर, करोड़ों की लागत से तैयार होगा आस्था का केंद्र

author Ram Niwas Tiwary
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#विश्रामपुर #मंदिर_निर्माण : भंडार गांव में नए गायत्री शक्तिपीठ मंदिर निर्माण कार्य में आई तेजी।

विश्रामपुर प्रखंड के भंडार गांव में मां गायत्री शक्तिपीठ मंदिर के भव्य निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। पुराने जर्जर मंदिर के स्थान पर ग्रामीणों के सहयोग से करोड़ों की लागत वाला नया मंदिर तैयार किया जा रहा है। मंदिर में मां गायत्री समेत कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। समिति ने मंदिर निर्माण को जनसहभागिता से पूरा करने के लिए गांव-गांव संपर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

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  • भंडार गांव में मां गायत्री शक्तिपीठ मंदिर का भव्य निर्माण शुरू।
  • पुराने जर्जर मंदिर की जगह बनेगा नया आकर्षक मंदिर।
  • मंदिर में गणेश, बजरंगबली, महादेव और सूर्य देव की प्रतिमाएं भी होंगी स्थापित।
  • फोरलेन मुआवजा राशि से शुरू हुआ निर्माण कार्य।
  • मंदिर समिति गांव-गांव जाकर जुटाएगी सहयोग।
  • बड़ी संख्या में ग्रामीण और समिति सदस्य रहे उपस्थित।

विश्रामपुर प्रखंड के भंडार गांव स्थित फोरलेन-39 के किनारे मां गायत्री शक्तिपीठ मंदिर के निर्माण कार्य में तेजी देखी जा रही है। पुराने मंदिर की स्थिति जर्जर होने के बाद ग्रामीणों ने मिलकर नए और भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि आने वाले समय में यह मंदिर क्षेत्र की आस्था और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा। मंदिर निर्माण को लेकर गांव में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

पुराने मंदिर की जगह बनेगा भव्य धाम

जानकारी के अनुसार, पुराने मंदिर की हालत काफी खराब हो चुकी थी। इसके बाद ग्रामीणों और मंदिर समिति ने मिलकर नए मंदिर निर्माण का निर्णय लिया।

नए मंदिर को आकर्षक और भव्य स्वरूप देने की योजना बनाई गई है, ताकि यह धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन सके।

विभिन्न देवी-देवताओं की होंगी प्रतिमाएं स्थापित

मंदिर में मां गायत्री की प्रतिमा के साथ-साथ भगवान गणेश, बजरंगबली, भगवान महादेव एवं सूर्य देव की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी।

समिति के सदस्यों का कहना है कि मंदिर का निर्माण धार्मिक परंपराओं और आधुनिक वास्तुशिल्प को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

मंदिर समिति के सदस्यों ने कहा: “यह मंदिर क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनेगा।”

ग्रामीणों के सहयोग से हो रहा निर्माण

अब तक मंदिर निर्माण का कार्य फोरलेन सड़क मुआवजा राशि से कराया जा रहा था।

आगे के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए सभी जाति और धर्म के लोगों से सहयोग लेने की योजना बनाई गई है।

घर-घर जाकर जुटाया जाएगा सहयोग

मंदिर जीर्णोद्धार समिति ने पंचायत के प्रत्येक घर तक पहुंचकर सहयोग लेने का संकल्प लिया है।

समिति के सदस्य लोगों को मंदिर निर्माण की जानकारी देकर इसमें भागीदारी निभाने की अपील करेंगे।

जनप्रतिनिधियों से भी मांगा जाएगा सहयोग

समिति ने निर्णय लिया है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों से भी मुलाकात की जाएगी।

मंदिर निर्माण कार्य को तेजी से पूरा करने और अधिक लोगों को जोड़ने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा।

बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद

मंदिर निर्माण को लेकर आयोजित बैठक और निरीक्षण कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग और ग्रामीण उपस्थित रहे।

इस अवसर पर माउंट टेरा चेयरमैन विनोद पांडेय, महेंद्र पांडेय, सौरव पांडेय, अरविंद पांडेय, अरुण पांडेय, आशीष पांडेय, छोटे पांडेय, बिट्टू पांडेय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

आस्था और सामाजिक एकता का केंद्र बनेगा मंदिर

ग्रामीणों का मानना है कि मंदिर निर्माण से क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के बीच सामाजिक एकता भी मजबूत होगी।

स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि यह मंदिर आने वाले समय में आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा।

न्यूज़ देखो: जनसहयोग से मजबूत होती हैं सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान

गांव और समाज की पहचान सिर्फ विकास कार्यों से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से भी जुड़ी होती है। भंडार गांव में मां गायत्री शक्तिपीठ मंदिर का निर्माण जनसहभागिता और सामाजिक एकता का उदाहरण बनकर सामने आ रहा है। सभी वर्गों के लोगों को साथ लेकर मंदिर निर्माण की पहल सामाजिक सौहार्द को भी मजबूत करेगी। अब देखना होगा कि यह धार्मिक केंद्र आने वाले समय में क्षेत्र की पहचान को किस तरह नई दिशा देता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था के साथ सामाजिक एकता भी जरूरी

धार्मिक स्थल समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा देने का माध्यम होते हैं।
जनसहयोग से बनने वाले ऐसे केंद्र सामाजिक समरसता को भी मजबूत करते हैं।
सांस्कृतिक विरासत को बचाना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
एकजुट समाज ही विकास और संस्कार दोनों को आगे बढ़ा सकता है।

अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण में सहयोग करें।
इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और सामाजिक एकता व जनभागीदारी को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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Written by

बिश्रामपुर, पलामू

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