
#चैनपुर #वन_महोत्सव : सामुदायिक वन अधिकार और पर्यावरण संरक्षण को लेकर ग्रामीणों में नई ऊर्जा दिखी।
चैनपुर प्रखंड के बर्वेनगर पंचायत अंतर्गत सिलफरी गांव में वन महोत्सव का आयोजन कर पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक वन अधिकारों को लेकर जागरूकता फैलाई गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, वन विभाग और सामाजिक संगठनों की भागीदारी रही। ग्रामीणों ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। आयोजन का उद्देश्य सामुदायिक वन प्रबंधन को मजबूत करना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा।
- सिलफरी गांव में वन महोत्सव का आयोजन, पर्यावरण संरक्षण पर जोर।
- जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा सहित कई अतिथियों की सहभागिता।
- वन क्षेत्र पदाधिकारी जगदीश राम और एफआरए सेल के प्रतिनिधि रहे मौजूद।
- फिया फाउंडेशन ने सामुदायिक वन प्रबंधन की जिम्मेदारियों पर किया मार्गदर्शन।
- ग्रामीणों ने जल, जंगल और जमीन बचाने का लिया सामूहिक संकल्प।
- कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण रहे उपस्थित।
चैनपुर प्रखंड के बर्वेनगर पंचायत अंतर्गत सिलफरी गांव में आयोजित वन महोत्सव ने ग्रामीणों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई चेतना का संचार किया। इस आयोजन के माध्यम से न केवल प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया गया, बल्कि सामुदायिक वन अधिकारों के महत्व को भी रेखांकित किया गया। गांव में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला और लोगों ने अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुटता दिखाई।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर की गई। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा, वन क्षेत्र पदाधिकारी जगदीश राम, झारखंड एफआरए सेल के अंकित कुजूर एवं आलोक लकड़ा, फिया फाउंडेशन के प्रखंड समन्वयक ललित कुमार महतो, चैनपुर के पल्ली पुरोहित तथा बर्वेनगर पंचायत की मुखिया अमिता केरकेट्टा उपस्थित रहे। दीप प्रज्वलन के बाद कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।
पर्यावरण संरक्षण पर जागरूकता का संदेश
उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए चैनपुर के पल्ली पुरोहित ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को अधिक जागरूक होने की जरूरत है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना सभी का प्राथमिक कर्तव्य है। उनके संबोधन ने ग्रामीणों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग किया।
सामुदायिक वन अधिकार की बड़ी उपलब्धि
फिया फाउंडेशन के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर ललित कुमार महतो ने ग्रामीणों को वन महोत्सव की बधाई देते हुए सामुदायिक वन पट्टा मिलने को गांव के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा:
“यह जीत सिलफरी के ग्रामीणों की एकता की जीत है। गांव को सामुदायिक वन पट्टा मिलना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब असली काम शुरू होता है। नवगठित समिति का मुख्य दायित्व जंगल का संरक्षण, संवर्धन और बेहतर प्रबंधन करना है। यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने आगे जानकारी दी कि चैनपुर प्रखंड के लगभग 70 गांवों को सामुदायिक वन पट्टा दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें से अब तक 20 गांवों को यह अधिकार प्राप्त हो चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि क्षेत्र में सामुदायिक वन अधिकारों को लेकर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
वन संरक्षण और प्रबंधन की साझा जिम्मेदारी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सामुदायिक वन अधिकार मिलने के बाद जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। जंगलों का संरक्षण, अवैध कटाई पर रोक, वन संपदा का सतत उपयोग और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना अब गांव की नवगठित समिति और समस्त ग्रामीणों की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों को बताया गया कि संगठित प्रयास से ही जंगलों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता
इस अवसर पर संजय टोप्पो, अमरेंद्र, ऊषा, सरिता मिंज, उप मुखिया कांति तिर्की, बर्वेनगर कमल, विवेक सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में पर्यावरण को बचाने, वन संपदा के सदुपयोग और सामुदायिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
सामुदायिक एकता का उदाहरण बना आयोजन
वन महोत्सव के दौरान गांव में सामूहिक सहभागिता और उत्साह देखने को मिला। यह आयोजन इस बात का उदाहरण बना कि जब समुदाय एकजुट होता है, तो पर्यावरण संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। ग्रामीणों ने यह भी चर्चा की कि वन संसाधनों का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।
न्यूज़ देखो: सामुदायिक प्रयास से ही बचेगा पर्यावरण
सिलफरी गांव में आयोजित वन महोत्सव यह दर्शाता है कि सामुदायिक सहभागिता से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिल सकती है। सामुदायिक वन अधिकार मिलने के बाद जिम्मेदारी का भाव और बढ़ जाता है, जिसे ग्रामीणों ने समझा है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों की भूमिका सराहनीय रही, लेकिन अब निरंतर निगरानी और सहयोग की आवश्यकता होगी। ऐसे आयोजनों से ही जल, जंगल और जमीन की रक्षा संभव है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रकृति संरक्षण का संकल्प, भविष्य की सुरक्षा
जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की आधारशिला हैं। यदि आज हमने इन्हें नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।
सिलफरी गांव का यह प्रयास पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन सकता है।
अपने गांव और आसपास के जंगलों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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