चैनपुर में शब-ए-बारात पूरी धार्मिक आस्था के साथ मनाई गई।

चैनपुर में शब-ए-बारात पूरी धार्मिक आस्था के साथ मनाई गई।

author Aditya Kumar
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#चैनपुर #शबबारात : इबादत, तिलावत और दुआओं के साथ शांति व एहतराम से मनाया गया पर्व।

चैनपुर में इस्लाम धर्म का महत्वपूर्ण पर्व शब-ए-बारात मंगलवार की रात पूरी अकीदत, शांति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस मुबारक रात में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मस्जिदों और घरों में इबादत कर अल्लाह से मगफिरत और रहमत की दुआ मांगी। ईशा की नमाज के बाद विशेष इबादत का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक चला। पर्व के दौरान सामाजिक सौहार्द और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया।

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  • चैनपुर में शब-ए-बारात पूरी धार्मिक आस्था के साथ मनाई गई।
  • जामा मस्जिद चैनपुर में विशेष नमाज और कुरआन की तिलावत।
  • हाफिज गुलाम मुस्तफा ने शब-ए-बारात की फजीलत पर बयान दिया।
  • कब्रिस्तानों में अकीदतमंदों ने फातिहा पढ़कर दुआ मांगी।
  • युवाओं ने मस्जिदों की रोशनी और साज-सज्जा का प्रबंधन संभाला।

चैनपुर में मंगलवार की रात शब-ए-बारात के अवसर पर पूरा माहौल इबादत और दुआओं से सराबोर नजर आया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस पवित्र रात को रहमत, बरकत और मगफिरत की रात मानते हुए पूरी श्रद्धा के साथ मनाया। मस्जिदों में सामूहिक नमाज, कुरआन की तिलावत और नवाफिल का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। कई लोगों ने अपने घरों में भी इबादत कर अल्लाह की बारगाह में सजदा किया।

मस्जिदों में विशेष इबादत का आयोजन

मंगलवार को ईशा की नमाज के बाद चैनपुर की विभिन्न मस्जिदों में शब-ए-बारात की विशेष इबादत शुरू हुई। जामा मस्जिद चैनपुर में बड़ी संख्या में अकीदतमंद जमा हुए, जहां पूरी रात नमाज, तिलावत और जिक्र किया गया। मस्जिद परिसर को बिजली के झालरों और आकर्षक साज-सज्जा से रोशन किया गया था, जिससे माहौल और भी रूहानी हो गया।

इमाम का संदेश, फिजूलखर्ची से बचने की अपील

जामा मस्जिद चैनपुर के इमाम हाफिज गुलाम मुस्तफा ने इस मौके पर शब-ए-बारात की अहमियत पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा:

“शब-ए-बारात तकदीर लिखे जाने और अल्लाह की रहमत बरसने की रात है। इस रात को इबादत, दुआ और तिलावत में बिताना सबसे बेहतर अमल है।”

उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे आतिशबाजी और फिजूलखर्ची से बचें और अपना समय केवल अल्लाह के जिक्र, कुरआन की तिलावत और नवाफिल नमाज में लगाएं।

कब्रिस्तानों में फातिहा और मगफिरत की दुआ

रात के अंतिम पहर में बड़ी संख्या में अकीदतमंद स्थानीय कब्रिस्तानों में पहुंचे। वहां उन्होंने अपने मरहूम परिजनों की कब्रों पर फातिहा पढ़ी और उनकी रूह के सुकून व मगफिरत के लिए विशेष दुआएं मांगी। इस दौरान माहौल पूरी तरह शांत और भावुक नजर आया, जहां हर कोई अपने गुनाहों की माफी और अपनों की सलामती की दुआ करता दिखा।

युवाओं ने संभाली व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी

शब-ए-बारात के सफल आयोजन में स्थानीय युवाओं की भूमिका भी सराहनीय रही। उन्होंने मस्जिदों की रोशनी, साज-सज्जा और व्यवस्था को संभालते हुए यह सुनिश्चित किया कि इबादत में किसी प्रकार की बाधा न आए। पूरी रात मस्जिदों में अनुशासन और शांति बनी रही, जिससे पर्व का धार्मिक महत्व और अधिक उजागर हुआ।

बुधवार को रखा गया नवाफिल रोजा

धार्मिक परंपरा के अनुसार, शब-ए-बारात के बाद बुधवार को बड़ी संख्या में लोगों ने नवाफिल रोजा रखा। दिनभर खुदा की इबादत, दुआ और सब्र के साथ रोजेदारों ने यह दिन गुजारा। माना जाता है कि इस रोजे से इंसान को आत्मिक शांति और सवाब प्राप्त होता है।

रमजान की तैयारियों ने पकड़ा जोर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शब-ए-बारात के लगभग 15 दिन बाद रमजान का मुकद्दस महीना शुरू हो जाएगा। इसे लेकर चैनपुर में भी तैयारियां तेज होने लगी हैं। लोग इबादत के साथ-साथ रमजान की तैयारियों में जुटने लगे हैं, जिससे आने वाले दिनों में धार्मिक गतिविधियां और बढ़ने की संभावना है।

प्रमुख रूप से रहे उपस्थित

इस अवसर पर सदर शकील खान, जावेद खान, इस्तियाक खान, नसरुद्दीन, जाहिर सहित बड़ी संख्या में धर्मावलंबी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर शांति, भाईचारे और आपसी सौहार्द के साथ इस पावन रात को मनाया।

न्यूज़ देखो: आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

चैनपुर में शब-ए-बारात का आयोजन यह दर्शाता है कि धार्मिक पर्व केवल इबादत तक सीमित नहीं होते, बल्कि सामाजिक अनुशासन और सौहार्द का भी संदेश देते हैं। इमाम द्वारा फिजूलखर्ची से बचने और इबादत पर जोर देने की अपील सराहनीय है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच और आपसी सम्मान को मजबूत करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

इबादत से जुड़ा पर्व, एकता और शांति की सीख

शब-ए-बारात की रात ने चैनपुर में आस्था, सब्र और भाईचारे का संदेश दिया। यह पर्व आत्ममंथन और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।
धार्मिक आयोजनों में शांति और अनुशासन बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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Written by

डुमरी, गुमला

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