
#दुमका #सड़क_हादसा : कोयला वाहनों की तेज रफ्तार बनी खतरा, बच्चों की जान पर आई आफत
दुमका–पाकुड़ मुख्य पथ पर नकटी गांव के समीप सोमवार को कोयला लदे एक तेज रफ्तार हाईवा की लापरवाही से बड़ा हादसा होते-होते टल गया। हाईवा ने पीछे से स्कूली बच्चों से भरे टोटो को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें छह मासूम बच्चे घायल हो गए। सभी घायल बच्चे लिटिल एंजेल स्कूल के छात्र बताए जा रहे हैं।
टक्कर के बाद मचा हड़कंप
हाईवा की टक्कर से टोटो अनियंत्रित होकर सड़क किनारे जा रुका। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को बाहर निकाला और तुरंत फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल, दुमका में भर्ती कराया, जहां सभी का इलाज जारी है।
सड़क जाम कर जताया आक्रोश
घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों और ग्रामीणों ने दुमका–पाकुड़ मुख्य पथ को जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कोयला लदे भारी वाहनों की मनमानी और तेज रफ्तार से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने मांग की कि—
- सड़क का फोरलेन निर्माण पूरा होने तक
- शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक
- कोयला लदे वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
प्रशासन और कोल कंपनियों पर आरोप
छात्र नेता डॉ. श्यामदेव हेम्ब्रम ने प्रशासन के साथ-साथ कोल कंपनियों जीबीआर और बीजीआर पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कोयला ढोने वाले वाहनों पर न तो तिरपाल लगाया जाता है और न ही पानी का छिड़काव होता है, जिससे प्रदूषण के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
लंबा जाम, लोग परेशान
सड़क जाम के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। समाचार लिखे जाने तक जाम की स्थिति बनी हुई थी, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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इस हादसे ने एक बार फिर कोयला वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इससे भी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।




