Deoghar

सड़क सुरक्षा माह 2026 के आठवें दिन देवघर में चला व्यापक जागरूकता अभियान

#देवघर #सड़क_सुरक्षा : वाल पेंटिंग, काउंसलिंग और जागरूकता रथ से सुरक्षित यातायात का संदेश।

देवघर जिले में सड़क सुरक्षा माह 2026 के आठवें दिन प्रशासन की ओर से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा के निर्देश और जिला परिवहन पदाधिकारी शैलेश प्रियदर्शी के नेतृत्व में जिले के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित हुए। इस दौरान वाल पेंटिंग, लर्नर लाइसेंस काउंसलिंग, सड़क मरम्मती कार्य और जागरूकता रथ के माध्यम से आम लोगों को यातायात नियमों के प्रति सचेत किया गया। अभियान का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और नागरिकों में जिम्मेदार ड्राइविंग की संस्कृति विकसित करना रहा।

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  • सड़क सुरक्षा माह 2026 के आठवें दिन जिले भर में जागरूकता कार्यक्रम।
  • उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा के निर्देश पर हुआ आयोजन।
  • जिला परिवहन पदाधिकारी शैलेश प्रियदर्शी के नेतृत्व में अभियान।
  • सड़क सुरक्षा विषयक वाल पेंटिंग और लर्नर लाइसेंस काउंसलिंग
  • मधुपुर अनुमंडल में जागरूकता रथ का किया गया भ्रमण।
  • दुर्घटना संभावित स्थलों पर मरम्मती कार्य और सुरक्षा उपकरण लगाए गए।

देवघर जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण और सुरक्षित यातायात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चल रहे सड़क सुरक्षा माह 2026 के अंतर्गत गुरुवार को आठवें दिन विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया। यह अभियान जिला प्रशासन की समन्वित पहल के तहत संचालित हुआ, जिसमें परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और अन्य संबंधित इकाइयों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रमों के माध्यम से आम नागरिकों को यातायात नियमों की जानकारी देने के साथ-साथ उनके पालन के लिए प्रेरित किया गया।

प्रशासनिक नेतृत्व में चला जागरूकता अभियान

इस पूरे अभियान का संचालन उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा के निर्देशानुसार किया गया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता का विषय है। जिला परिवहन पदाधिकारी शैलेश प्रियदर्शी के नेतृत्व में गठित टीमों ने जिले के विभिन्न प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।

अधिकारियों ने बताया कि सड़क सुरक्षा माह के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग थीम पर कार्यक्रम किए जा रहे हैं, ताकि लोगों का ध्यान लगातार यातायात नियमों की ओर बना रहे और यह संदेश केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए।

वाल पेंटिंग से स्थायी संदेश देने की पहल

आठवें दिन सेफ्टी सेटअप डे के तहत सड़क सुरक्षा विषयक वाल पेंटिंग कराई गई। प्रमुख सड़कों, चौराहों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों की दीवारों पर बनाए गए चित्रों और संदेशों में हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और नशे की हालत में वाहन न चलाने जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई।

इन वाल पेंटिंग्स का उद्देश्य यह है कि लोग रोजमर्रा की जिंदगी में जब इन स्थानों से गुजरें, तो उन्हें बार-बार सुरक्षित यातायात का संदेश दिखाई दे और धीरे-धीरे यह आदत में शामिल हो जाए।

लर्नर लाइसेंस काउंसलिंग पर विशेष जोर

कार्यक्रम के तहत लर्नर लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले नागरिकों की विशेष काउंसलिंग भी की गई। इस दौरान यातायात नियमों की बुनियादी जानकारी, सड़क संकेतों की पहचान, पैदल यात्रियों के अधिकार और आपातकालीन स्थितियों में व्यवहार के बारे में विस्तार से बताया गया।

अधिकारियों ने आवेदकों को समझाया कि वाहन चलाना केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। नियमों की अनदेखी से न केवल स्वयं की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि दूसरों के जीवन पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

दुर्घटना संभावित स्थलों पर सुधारात्मक कार्य

जिले में चिन्हित दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में विशेष रूप से मरम्मती और सुधारात्मक कार्य किए गए। इन स्थानों पर सड़क की मरम्मत, चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर, स्पीड ब्रेकर और अन्य सुरक्षा उपकरण लगाए गए, ताकि वाहन चालकों को समय रहते सतर्क किया जा सके।

परिवहन विभाग के अनुसार, इन सुधारात्मक कार्यों से भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आने की उम्मीद है, खासकर रात के समय और खराब मौसम में।

जागरूकता रथ से गांव-गांव पहुंचा संदेश

आठवें दिन मधुपुर अनुमंडल में विशेष रूप से जागरूकता रथ का भ्रमण कराया गया। इस रथ के माध्यम से लाउडस्पीकर और दृश्य सामग्री के जरिए आम लोगों को यातायात नियमों, सुरक्षित ड्राइविंग और सड़क सुरक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

रथ के माध्यम से नेक नागरिक योजना और हिट एंड रन मुआवजा योजना के बारे में भी बताया गया, ताकि दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों और उनके परिजनों को मिलने वाली सहायता की जानकारी आमजन तक पहुंच सके।

तेज गति और लापरवाह ड्राइविंग पर दी गई चेतावनी

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और स्वयंसेवकों ने तेज गति, गलत साइड ड्राइविंग, मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए वाहन चलाने और नशे की हालत में ड्राइविंग के दुष्परिणामों पर विस्तार से चर्चा की। लोगों को बताया गया कि सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण मानवीय लापरवाही है, जिसे थोड़ी सतर्कता से रोका जा सकता है।

जिला परिवहन पदाधिकारी शैलेश प्रियदर्शी ने कहा:
“सड़क सुरक्षा माह का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाना है। यदि हर नागरिक नियमों का पालन करे, तो दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।”

न्यूज़ देखो: सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सक्रिय पहल

यह खबर दिखाती है कि देवघर जिला प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर केवल औपचारिक अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधारात्मक और जागरूकता से जुड़े प्रयास कर रहा है। वाल पेंटिंग से लेकर मरम्मती कार्य तक, यह पहल प्रशासन की गंभीरता को दर्शाती है। अब चुनौती यह है कि आम नागरिक इस संदेश को कितना अपनाते हैं। सड़क सुरक्षा में प्रशासन और जनता दोनों की साझा जिम्मेदारी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षित सड़कें, जिम्मेदार नागरिक जीवन बचाने की दिशा में एक कदम

सड़क पर निकलते समय आपकी एक छोटी सी सावधानी किसी की जिंदगी बचा सकती है। नियमों का पालन केवल जुर्माने से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपने और दूसरों के सुरक्षित भविष्य के लिए जरूरी है।
हेलमेट पहनें, सीट बेल्ट लगाएं और तेज गति से बचें।
नशे की हालत में वाहन न चलाएं और मोबाइल फोन से दूरी रखें।
इस संदेश को अपने परिवार और दोस्तों तक पहुंचाएं।
अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और सड़क सुरक्षा के लिए जागरूकता फैलाने में भागीदार बनें।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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