देवघर में साइबर अपराध पर बड़ा एक्शन प्लान, म्यूल खातों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की तैयारी

देवघर में साइबर अपराध पर बड़ा एक्शन प्लान, म्यूल खातों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की तैयारी

author News देखो Team
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#देवघर #साइबर_अभियान : पुलिस-बैंक समन्वय से संदिग्ध खातों पर कड़ी निगरानी।

देवघर में बढ़ते साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ की अध्यक्षता में बैंकों के साथ समीक्षा बैठक हुई। बैठक में संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान, एटीएम सुरक्षा और बैंकिंग तंत्र की निगरानी पर विस्तृत चर्चा की गई। सभी बैंकों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने और संदिग्ध लेन-देन की तत्काल सूचना देने के निर्देश दिए गए। यह पहल आम नागरिकों की जमा पूंजी को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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  • पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित।
  • संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की तैयारी।
  • प्रत्येक बैंक को नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश।
  • एटीएम कियोस्क में गार्ड और सीसीटीवी अनिवार्य करने की बात।
  • बैंक शाखाओं की भौतिक सुरक्षा ऑडिट नियमित रूप से होगी।

देवघर में लगातार सामने आ रहे साइबर ठगी के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ की अध्यक्षता में जिले के एलडीएम एवं विभिन्न प्रमुख बैंकों के शाखा प्रबंधकों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहे संदिग्ध ‘म्यूल खातों’ की पहचान कर उन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना था।

बैठक में साइबर सुरक्षा, एटीएम सुरक्षा और बैंक शाखाओं की भौतिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और कई अहम निर्देश जारी किए गए।

म्यूल खातों पर सख्त निगरानी के निर्देश

साइबर अपराध में अक्सर ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें ‘म्यूल खाते’ कहा जाता है। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर स्थानांतरित किया जाता है। इस पर रोक लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक ने बैंकों को कई स्पष्ट निर्देश दिए।

पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ ने कहा:
“साइबर अपराध को रोकने के लिए पुलिस और बैंकिंग प्रणाली के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। संदिग्ध खातों की पहचान होते ही तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

निर्देश दिए गए कि प्रत्येक बैंक एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा, जो साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस से सीधा संपर्क बनाए रखेगा। किसी भी खाते में असामान्य लेन-देन दिखने पर बैंक तुरंत साइबर थाना को सूचित करेगा।

जिन शाखाओं में असामान्य रूप से अधिक संख्या में नए खाते खोले जा रहे हों, उनके लेन-देन पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया। साथ ही सीएसपी (कस्टमर सर्विस पॉइंट) पर भी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए।

नए खाते खोलते समय ग्राहक का भौतिक सत्यापन और पूर्ण केवाईसी या ई-केवाईसी प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से पूरा करने पर जोर दिया गया। सभी संबंधित दस्तावेज शाखा स्तर पर सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए।

एटीएम सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश

बैठक में एटीएम कियोस्क की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। बिना गार्ड वाले एटीएम कियोस्क में गार्ड की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके साथ ही हर एटीएम के अंदर और बाहर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया गया, ताकि हर गतिविधि रिकॉर्ड हो सके।

अगर किसी एटीएम पर असामान्य रूप से लेन-देन की संख्या बढ़ती है, तो संबंधित बैंक को तुरंत निगरानी बढ़ाने और पुलिस को सूचित करने को कहा गया।

बैंक शाखाओं की भौतिक सुरक्षा पर जोर

बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी बैंक शाखाओं में पर्याप्त और सक्रिय सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति होनी चाहिए। अलार्म सिस्टम को हमेशा कार्यशील स्थिति में रखने का निर्देश दिया गया।

हर बैंक शाखा के अंदर और बाहर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने को अनिवार्य बताया गया, ताकि बैंक परिसर और आसपास की गतिविधियों की निगरानी की जा सके। पुलिस टीमों द्वारा समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट भी किया जाएगा।

इस समन्वित पहल के माध्यम से देवघर पुलिस ने यह संकेत दिया है कि साइबर अपराधियों के लिए अब जिले में सक्रिय रहना आसान नहीं होगा।

न्यूज़ देखो: साइबर अपराध पर समन्वित रणनीति

देवघर में पुलिस और बैंकों के बीच यह समन्वित पहल साइबर अपराध के खिलाफ एक मजबूत रणनीति का संकेत देती है। म्यूल खातों पर निगरानी और एटीएम सुरक्षा को सुदृढ़ करना आम लोगों की मेहनत की कमाई को बचाने की दिशा में अहम कदम है। अब सवाल यह है कि इन निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर कितनी सख्ती से होता है और अपराधियों पर कितना असर पड़ता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

डिजिटल सतर्कता ही असली सुरक्षा

साइबर युग में जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। बैंक और पुलिस की जिम्मेदारी के साथ नागरिकों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है।

अजनबी कॉल, संदिग्ध लिंक और अनजान खातों से दूरी बनाए रखें। अपने दस्तावेज और ओटीपी किसी से साझा न करें।

अगर आपको यह खबर महत्वपूर्ण लगी हो तो अपनी राय कमेंट में जरूर दें, इसे साझा करें और दूसरों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाएं।

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