
#कुरडेग #विराटहिन्दूसम्मेलन : हजारों लोगों की उपस्थिति में धर्म, संस्कृति और परंपरा संरक्षण का आह्वान।
सिमडेगा जिले के कुरडेग स्थित माइकल किंडो स्टेडियम में रविवार को विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों लोग शामिल हुए और धर्म, संस्कृति तथा प्राचीन परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया गया। सम्मेलन में जशपुर के राजकुमार विक्रमादित्य सिंह जूदेव सहित कई धार्मिक और सामाजिक प्रतिनिधियों ने समाज की एकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता को पुष्प अर्पित और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ से हुई।
- कुरडेग के माइकल किंडो स्टेडियम में आयोजित हुआ विराट हिन्दू सम्मेलन।
- कार्यक्रम में हजारों ग्रामीणों और समाज के प्रतिनिधियों की रही भागीदारी।
- मुख्य रूप से विक्रमादित्य सिंह जूदेव, कौशल राज सिंह देव और अजय कुमार रहे उपस्थित।
- सम्मेलन में धर्म, संस्कृति और प्राचीन परंपराओं के संरक्षण पर दिया गया जोर।
- पहान, पुजारी और बैगा को अंग वस्त्र देकर किया गया सम्मानित।
- कार्यक्रम का संचालन सूरज कुमार बीसी ने और धन्यवाद ज्ञापन श्रीवास्तव ने किया।
सिमडेगा जिले के कुरडेग स्थित माइकल किंडो स्टेडियम में रविवार को विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज को एकजुट करना और धर्म, संस्कृति तथा प्राचीन सभ्यता के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करना था। कार्यक्रम में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे और समाज में एकता बनाए रखने का संदेश दिया।
पारंपरिक विधि से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि के अनुसार भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इसके बाद उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया, जिससे पूरे माहौल में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण बन गया।
सम्मेलन में विभिन्न गांवों से आए लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को भव्य रूप दिया।
समाज की एकता और परंपराओं के संरक्षण पर जोर
विश्व हिंदू परिषद सिमडेगा के जिला अध्यक्ष कौशल राज सिंह देव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को एकजुट करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
कौशल राज सिंह देव ने कहा: “ऐसे सम्मेलन हिन्दू समाज की एकता और जागरूकता का प्रतीक हैं। आज आवश्यकता है कि हम सभी अपनी धर्म संस्कृति और परंपराओं को बचाने के लिए संगठित होकर आगे बढ़ें।”
उन्होंने कहा कि समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने के कई प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे समय में सभी लोगों को जागरूक रहकर अपनी परंपराओं की रक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि गांवों की पारंपरिक रीति-रिवाज और मान्यताएं ही समाज की असली पहचान हैं। नदी, पर्वत, सूर्य और पेड़-पौधों की पूजा सनातन संस्कृति की विशेष पहचान है।
भगवान श्रीराम और माता शबरी के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश
कौशल राज सिंह देव ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें उनके आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने एक आदर्श पुत्र, पति और राजा के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया था और समाज को आदर्श जीवन का मार्ग दिखाया था।
इसके साथ ही उन्होंने माता शबरी के जीवन चरित्र का भी उल्लेख किया और कहा कि समाज में भेदभाव को समाप्त कर समरसता स्थापित करना बेहद जरूरी है।
समाज को संगठित रहने का आह्वान
सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जशपुर के राजकुमार विक्रमादित्य सिंह जूदेव ने भी लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज हमेशा से संस्कारी और सहिष्णु रहा है और सभी धर्मों का सम्मान करता है।
विक्रमादित्य सिंह जूदेव ने कहा: “हिन्दू समाज सदैव से संस्कारी और सहिष्णु रहा है। लेकिन यदि कोई हमारे धर्म और संस्कृति पर आघात करेगा तो समाज उसका जवाब देने में भी सक्षम है।”
उन्होंने कहा कि समाज को संगठित होकर कुरीतियों, अंधविश्वास और समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ खड़ा होना होगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने का भी उल्लेख
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अजय कुमार जी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को जागरूक और संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अजय कुमार जी ने कहा: “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भी देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे समाज में राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत किया जा सके।”
उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।
पारंपरिक प्रतिनिधियों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से आए समाज के प्रतिनिधियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही गांवों के पहान, पुजारी और बैगा को भी सम्मानित किया गया और समाज में उनकी पारंपरिक भूमिका की सराहना की गई।
इस अवसर पर संतोष जी, उमाकांत महाराज सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी समाज की एकता और संस्कृति संरक्षण पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का मंच संचालन सूरज कुमार बीसी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन श्रीवास्तव ने किया। आयोजन को सफल बनाने में सभी प्रखंडों के सनातनी और ऊर्जावान कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
न्यूज़ देखो: संस्कृति संरक्षण के लिए समाज का संगठित होना जरूरी
कुरडेग में आयोजित यह विराट हिन्दू सम्मेलन इस बात का संकेत देता है कि ग्रामीण समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को लेकर सजग है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर देते हैं।
हालांकि संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ समाज में समरसता, आपसी सम्मान और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। समाज की मजबूती तभी संभव है जब सभी वर्ग मिलकर विकास और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाएं।
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संस्कृति और एकता से मजबूत बनता है समाज
हमारी संस्कृति और परंपराएं केवल इतिहास नहीं, बल्कि हमारी पहचान और भविष्य की दिशा भी तय करती हैं। जब समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, तब वह हर चुनौती का सामना मजबूती से कर सकता है।
जरूरी है कि नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को समझे और उन्हें आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाए। समाज की एकता और जागरूकता ही विकास की असली ताकत है।
यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसे सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, तो अपनी राय जरूर साझा करें। खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और समाज में सकारात्मक जागरूकता फैलाने में अपना योगदान दें।






