नगर निकाय चुनाव में नया प्रयोग: एक ही बैलेट बॉक्स में पड़ेगा पार्षद और मेयर का वोट

नगर निकाय चुनाव में नया प्रयोग: एक ही बैलेट बॉक्स में पड़ेगा पार्षद और मेयर का वोट

author News देखो Team
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#झारखंड #नगरनिकायचुनाव : बैलेट पेपर से होने वाले निकाय चुनाव में पार्षद और मेयर के लिए अलग रंग के बैलेट पेपर दिए जाएंगे।

झारखंड में होने वाले नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस बार मतदाता पार्षद और मेयर दोनों पदों के लिए एक ही बैलेट बॉक्स में वोट डालेंगे। हालांकि भ्रम से बचने के लिए दोनों पदों के लिए अलग-अलग रंग के बैलेट पेपर उपलब्ध कराए जाएंगे। आयोग का मानना है कि इससे मतदान प्रक्रिया सरल होगी, हालांकि मतगणना में समय लग सकता है।

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  • नगर निकाय चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाएंगे।
  • पार्षद और मेयर (अध्यक्ष) के लिए एक ही बैलेट बॉक्स का उपयोग।
  • मेयर का बैलेट पेपर गुलाबी, पार्षद का सफेद रंग का होगा।
  • 16 जनवरी को आरओ और एआरओ का विशेष प्रशिक्षण।
  • 48 नगर निकायों में चुनाव की तैयारी अंतिम चरण में।

झारखंड में लंबे इंतजार के बाद होने जा रहे नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया को स्पष्ट कर दिया है। इस बार चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाएंगे। खास बात यह है कि मतदाताओं को पार्षद और मेयर दोनों पदों के लिए वोट डालने के लिए अलग-अलग बैलेट बॉक्स नहीं दिए जाएंगे, बल्कि एक ही बैलेट बॉक्स में दोनों वोट डाले जाएंगे।

अलग-अलग रंग के बैलेट पेपर से होगी पहचान

मतदाताओं की सुविधा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने बैलेट पेपर के रंग तय कर दिए हैं।
मेयर या अध्यक्ष पद के लिए बैलेट पेपर पिंक (गुलाबी) रंग का होगा, जबकि वार्ड पार्षद के लिए बैलेट पेपर सफेद रंग का रहेगा। इससे मतदान के दौरान और बाद में मतगणना के समय दोनों पदों के मतों को अलग करने में आसानी होगी।

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने कहा:

“प्रत्येक मतदान केंद्र पर पर्याप्त बैलेट बॉक्स की व्यवस्था की गई है। बैलेट बॉक्स की रंगाई और मरम्मती का कार्य जिला स्तर पर पूरा कर लिया गया है।”

16 जनवरी को होगा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम

चुनाव प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और नियमों के अनुरूप संचालित करने के उद्देश्य से राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (एआरओ) को प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है।
इसके लिए 16 जनवरी को राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

इस प्रशिक्षण में मतदान, मतगणना, बैलेट पेपर प्रबंधन और चुनाव से जुड़ी सभी तकनीकी प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर त्रुटि की गुंजाइश न रहे।

प्रत्याशियों को मिलेंगे तय चुनाव चिन्ह

राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों को 50-50 चुनाव चिन्ह उपलब्ध करा दिए हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों को इन्हीं चिन्हों में से आवंटन किया जाएगा। इससे चुनाव प्रक्रिया को मानकीकृत करने और भ्रम की स्थिति से बचने में मदद मिलेगी।

मतगणना में लग सकता है अधिक समय

एक ही बैलेट बॉक्स में पार्षद और मेयर दोनों पदों के वोट डाले जाने के फैसले से मतगणना में देरी की संभावना भी जताई जा रही है।
मतगणना के दौरान सभी बैलेट बॉक्स खोलकर दोनों पदों के बैलेट पेपर को अलग-अलग छांटना होगा। हालांकि अलग-अलग रंग के बैलेट पेपर होने से प्रक्रिया कुछ हद तक आसान होगी, लेकिन इसके बावजूद गणना में स्वाभाविक रूप से अधिक समय लगने की संभावना है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों का मानना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय देना जरूरी है और परिणामों की शुद्धता सर्वोपरि रहेगी।

इस महीने के अंत तक चुनाव की घोषणा संभव

प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद राज्य निर्वाचन आयोग एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक करेगा। इसके पश्चात नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना इस महीने के अंत तक जारी किए जाने की संभावना है।

गौरतलब है कि राज्य में 48 नगर निकायों के लिए वार्ड पार्षद और मेयर/अध्यक्ष पदों का आरक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है। ऐसे में चुनाव की औपचारिक घोषणा अब केवल समय की बात मानी जा रही है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया की तैयारी अंतिम चरण में

नगर निकाय चुनाव शहरी स्थानीय स्वशासन की रीढ़ माने जाते हैं। आयोग का यह प्रयास है कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो, ताकि शहरी विकास से जुड़े प्रतिनिधियों का चयन लोकतांत्रिक तरीके से किया जा सके।

न्यूज़ देखो: पारदर्शिता बनाम समय की चुनौती

एक ही बैलेट बॉक्स में दो पदों के लिए मतदान का निर्णय प्रशासनिक दृष्टि से सरल दिखता है, लेकिन इससे मतगणना में देरी की चुनौती भी सामने आएगी। आयोग की तैयारी यह दर्शाती है कि वह पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं करना चाहता। अब निगाहें चुनाव की अधिसूचना और मतदान की तारीख पर टिकी हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शहरी लोकतंत्र को मजबूत करने का समय

नगर निकाय चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि शहरों के भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है।
मतदाता जागरूक बनें और अपने अधिकार का जिम्मेदारी से उपयोग करें।
इस जानकारी को साझा करें ताकि हर नागरिक मतदान प्रक्रिया को समझ सके।
अपनी राय कमेंट में रखें और लोकतंत्र को मजबूत करने में भागीदार बनें।

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