
#पालकोट #गुमला #धार्मिकआयोजन : कोयल नदी तट स्थित जोगी मठ में मकर संक्रांति पर भव्य मेला और रात्रि जागरण का आयोजन हुआ।
गुमला जिले के पालकोट प्रखंड अंतर्गत बागेसरा पंचायत स्थित कोयल नदी के पावन तट पर अवस्थित प्रसिद्ध जोगी मठ परिसर में मकर संक्रांति के अवसर पर भव्य मेला और भक्ति कीर्तन रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। इस आयोजन में क्षेत्र सहित दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मेले ने पूरे इलाके को आस्था और उत्सव के रंग में रंग दिया। आयोजन ने सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूती देने का संदेश दिया।
- पालकोट प्रखंड के बागेसरा पंचायत स्थित जोगी मठ में आयोजन।
- कोयल नदी के तट पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति।
- मां दुर्गा की पूजा के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ।
- भक्ति गीत, कीर्तन और रात्रि जागरण से गूंजा क्षेत्र।
- मेले में झूले, दुकानें और सांस्कृतिक आकर्षण रहे केंद्र में।
मकर संक्रांति के पावन पर्व पर पालकोट प्रखंड का बागेसरा क्षेत्र आस्था, भक्ति और संस्कृति के महासंगम का साक्षी बना। कोयल नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक जोगी मठ परिसर में आयोजित भव्य मेला और रात्रि जागरण ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था, जो देर रात तक जारी रहा।
मां दुर्गा की पूजा से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ किया गया। धार्मिक अनुष्ठान के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त रूप से किया गया। उद्घाटन करने वालों में बागेसरा पंचायत के मुखिया जीतबहान बढ़ाईक, टेंगरिया पंचायत के समाजसेवी भूषण सिंह, बाघिमा पंचायत के समाजसेवी कमल साहू, रोहित कुमार साहू, सुधीर साहू तथा पालकोट थाना के ए.एस.आई. प्रमोद सिंह शामिल रहे।
उद्घाटन के दौरान अतिथियों ने कहा कि जोगी मठ का यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का कार्य करता है और सामाजिक एकता को मजबूत करता है। उन्होंने स्थानीय लोगों के प्रयासों की सराहना की, जिनके सहयोग से यह भव्य आयोजन संभव हो सका।

भक्ति कीर्तन और रात्रि जागरण से भक्तिमय माहौल
रात्रि जागरण के दौरान आमंत्रित कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भक्ति गीत, कीर्तन, झांकी और लोक-संगीत प्रस्तुत किए। माता के भजनों और धार्मिक गीतों से पूरा जोगी मठ परिसर गूंज उठा। श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में लीन होकर झूमते और भजनों का आनंद लेते नजर आए।
भक्ति संगीत की प्रस्तुति ने न सिर्फ बुजुर्गों बल्कि युवाओं और बच्चों को भी आकर्षित किया। कई श्रद्धालुओं ने इसे आत्मिक शांति देने वाला अनुभव बताया।
मेले में बच्चों और युवाओं के लिए खास आकर्षण
मेला परिसर में बच्चों के लिए झूले, खिलौनों की दुकानें, मिठाइयों और खाने-पीने के स्टॉल खास आकर्षण का केंद्र बने रहे। बच्चे झूलों का आनंद लेते दिखे, वहीं परिवारों ने मेले का भरपूर आनंद उठाया।
युवा वर्ग कोयल नदी के तट पर प्राकृतिक सौंदर्य के बीच सेल्फी और फोटो खिंचवाते नजर आया। नदी किनारे उमड़ी भारी भीड़ इस आयोजन की भव्यता और लोकप्रियता को स्वतः ही दर्शा रही थी।
प्रशासन और स्थानीय लोगों की रही अहम भूमिका
आयोजन को सफल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और स्वयंसेवकों की अहम भूमिका रही। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
स्थानीय लोगों ने बताया कि हर वर्ष मकर संक्रांति पर जोगी मठ में इसी तरह श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है, जिससे क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिलती है।
सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
जोगी मठ में आयोजित यह मेला और रात्रि जागरण केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और जनभागीदारी का भी सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया। विभिन्न पंचायतों से आए लोगों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया।
श्रद्धालुओं का कहना था कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

न्यूज़ देखो: आस्था के साथ सामाजिक समरसता का संदेश
पालकोट के जोगी मठ में मकर संक्रांति पर आयोजित यह भव्य आयोजन बताता है कि धार्मिक पर्व किस तरह समाज को एक सूत्र में बांधते हैं। हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता और शांतिपूर्ण आयोजन प्रशासन व स्थानीय समाज के बेहतर समन्वय को दर्शाता है। ऐसे आयोजनों से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और भी मजबूत होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था से संस्कृति तक, सहभागिता से मजबूती तक
धार्मिक आयोजनों की असली ताकत लोगों की सहभागिता में होती है।
जोगी मठ का यह आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को आगे बढ़ाता है।
ऐसे पर्व हमें अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं और आपसी भाईचारे को मजबूत करते हैं।
आप भी अपनी आस्था और संस्कृति से जुड़े आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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