
#बरवाडीह #लातेहार #प्रशासनिक_संवेदनशीलता : कड़ाके की ठंड में जरूरतमंद बुजुर्ग महिलाओं को बीडीओ द्वारा कंबल वितरण कर राहत पहुंचाई गई।
बरवाडीह प्रखंड के अतिदूरवर्ती लात पंचायत से प्रखंड कार्यालय पहुंची बुजुर्ग महिलाओं को कड़ाके की ठंड में प्रशासन की ओर से राहत मिली। प्रखंड विकास पदाधिकारी रेशमा रेखा मिंज ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए स्वयं कंबल वितरित किए। यह पहल ठंड के मौसम में जरूरतमंदों के लिए तत्काल राहत साबित हुई। प्रशासन की इस सक्रियता से आमजन में भरोसा मजबूत हुआ।
- लात पंचायत के सेरनदाग गांव से आईं पांच बुजुर्ग महिलाएं ठंड से थीं परेशान।
- बीडीओ रेशमा रेखा मिंज ने स्वयं बाहर आकर कंबल वितरित किए।
- सूचना मिलने पर त्वरित संज्ञान लेते हुए की गई मानवीय पहल।
- बुजुर्ग महिलाओं के चेहरों पर दिखी संतोष और राहत।
- स्थानीय नागरिकों व कर्मचारियों ने प्रशासनिक कदम की सराहना की।
बरवाडीह (लातेहार) :- कड़ाके की ठंड के बीच बरवाडीह प्रखंड से एक संवेदनशील और मानवीय तस्वीर सामने आई है, जहां प्रशासन ने जरूरतमंद बुजुर्ग महिलाओं को तत्काल राहत पहुंचाकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया। अतिदूरवर्ती लात पंचायत अंतर्गत सेरनदाग गांव से प्रखंड कार्यालय पहुंची पांच बुजुर्ग महिलाएं ठंड से परेशान थीं। उनकी स्थिति को देखते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी रेशमा रेखा मिंज ने मानवीय पहल करते हुए उन्हें कंबल वितरित किए।
इस छोटे से लेकिन प्रभावशाली कदम ने न केवल बुजुर्ग महिलाओं को ठंड से राहत दी, बल्कि यह भी संदेश दिया कि प्रशासन जरूरतमंदों की पीड़ा को समझने और समय पर सहायता देने के लिए तत्पर है।
पत्रकार की सूचना पर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार स्थानीय पत्रकार रवि कुमार गुप्ता ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को अवगत कराया कि लात पंचायत से आई कुछ बुजुर्ग महिलाएं अत्यधिक ठंड के कारण परेशान हैं और उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए बीडीओ रेशमा रेखा मिंज ने बिना किसी औपचारिकता के तुरंत संज्ञान लिया।
सूचना मिलते ही बीडीओ अपने चेंबर से बाहर आईं और स्वयं बुजुर्ग महिलाओं से बातचीत कर उनकी स्थिति को समझा। इसके बाद उन्होंने मौके पर ही कंबल उपलब्ध कराते हुए उन्हें वितरित किया, ताकि ठंड से उन्हें राहत मिल सके।
बुजुर्ग महिलाओं के चेहरों पर दिखी राहत
कंबल पाकर बुजुर्ग महिलाओं के चेहरों पर संतोष और खुशी साफ झलकती नजर आई। महिलाओं ने बताया कि ठंड के इस मौसम में कंबल उनके लिए बड़ी राहत साबित होगा। उन्होंने प्रशासन और बीडीओ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी मदद से उन्हें यह महसूस हुआ कि सरकार और प्रशासन उनके साथ खड़ा है।
एक बुजुर्ग महिला ने कहा:
“इस ठंड में कंबल मिलना हमारे लिए बहुत बड़ी बात है। हमें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी मदद मिलेगी।”
मानवीय प्रशासन की मिसाल
बीडीओ रेशमा रेखा मिंज की इस पहल को प्रखंड कार्यालय में मौजूद लोगों और स्थानीय नागरिकों ने भी सराहा। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस तरह स्वयं आगे बढ़कर मदद करना आम लोगों के लिए भरोसे का कारण बनता है।
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि ठंड के मौसम में गरीब और बुजुर्ग वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होता है। ऐसे में प्रशासन की यह संवेदनशीलता न केवल राहत पहुंचाती है, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी देती है।
दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याओं पर ध्यान जरूरी
लात पंचायत जैसे अतिदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग अक्सर मूलभूत सुविधाओं और त्वरित सहायता से वंचित रह जाते हैं। ठंड, बारिश या अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों में इन इलाकों के बुजुर्गों और जरूरतमंदों को सबसे ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रशासनिक स्तर पर यदि इसी तरह संवेदनशीलता और तत्परता दिखाई जाए, तो दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर राहत मिल सकती है। बीडीओ द्वारा की गई यह पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।
प्रशासन पर बढ़ा भरोसा
स्थानीय लोगों का कहना है कि जरूरतमंदों को समय पर दी जाने वाली ऐसी सहायता से प्रशासन के प्रति आमजन का विश्वास मजबूत होता है। जब अधिकारी स्वयं आगे आकर सहायता करते हैं, तो लोगों को यह एहसास होता है कि उनकी समस्याएं सुनी जा रही हैं।
प्रखंड कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
न्यूज़ देखो: संवेदनशीलता ही सुशासन की पहचान
बरवाडीह में बीडीओ द्वारा बुजुर्ग महिलाओं को कंबल वितरण की यह घटना बताती है कि प्रशासनिक संवेदनशीलता से छोटे-छोटे कदम भी बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। जरूरतमंदों तक समय पर सहायता पहुंचाना ही सुशासन की असली पहचान है। ऐसे प्रयासों से जनता और प्रशासन के बीच भरोसे की खाई कम होती है।
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मानवता से ही मजबूत होता है प्रशासन
ठंड, भूख या जरूरत के समय एक छोटी मदद भी किसी के लिए जीवन रेखा बन सकती है।
समाज और प्रशासन, दोनों की जिम्मेदारी है कि जरूरतमंदों के साथ खड़े रहें।
यदि आपके आसपास कोई सहायता का पात्र है, तो उसकी आवाज बनें।
इस सकारात्मक पहल को साझा करें, अपनी राय कमेंट करें और मानवीय सोच को आगे बढ़ाएं।





