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कुपोषण के खिलाफ सशक्त पहल, चैनपुर के सुदूरवर्ती गांवों से 11 बच्चों की सीएचसी में स्वास्थ्य जांच

#चैनपुर #कुपोषण_उन्मूलन : सुदूरवर्ती क्षेत्रों के चिन्हित बच्चों को जांच व उपचार के लिए अस्पताल लाया गया।

चैनपुर प्रखंड के सुदूरवर्ती गांवों में बच्चों में कुपोषण की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष स्वास्थ्य अभियान चलाया गया। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से एकजुट संस्थान द्वारा संचालित इस मुहिम के तहत बुधवार को 11 कुपोषित बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चैनपुर लाया गया। यहां बच्चों की आयु और वजन के अनुपात के आधार पर स्वास्थ्य जांच की गई। अभियान का उद्देश्य गंभीर कुपोषण की पहचान कर समय पर उपचार सुनिश्चित करना है।

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  • अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और एकजुट संस्थान के सहयोग से अभियान का संचालन।
  • सीएचसी चैनपुर में 11 कुपोषित बच्चों की स्वास्थ्य जांच।
  • डॉ. दीपशिखा किंडो द्वारा आयु और वजन के अनुपात की विस्तृत जांच।
  • गंभीर कुपोषण वाले बच्चों को पोषण केंद्र डुमरी व रायडीह रेफर किया गया।
  • सुदूरवर्ती गांवों से बच्चों को लाने में सहियाओं की अहम भूमिका

चैनपुर प्रखंड के दूरदराज और दुर्गम गांवों में रहने वाले बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की चिंता एक बार फिर सामने आई है। कुपोषण की समस्या से जूझ रहे बच्चों की पहचान कर उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह विशेष पहल की गई। अभियान के तहत चयनित बच्चों को बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चैनपुर लाया गया, जहां उनकी विस्तृत स्वास्थ्य जांच की गई। यह कदम क्षेत्र में बाल स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कुपोषण उन्मूलन के लिए संयुक्त अभियान

चैनपुर प्रखंड में यह अभियान अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से एकजुट संस्थान द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सुदूरवर्ती गांवों में रहने वाले ऐसे बच्चों की पहचान करना है, जो कुपोषण का शिकार हैं और जिन तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। अभियान के तहत पहले गांव-गांव सर्वे कर बच्चों की स्थिति का आकलन किया गया, इसके बाद गंभीर रूप से प्रभावित बच्चों को स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल लाया गया।

सीएचसी चैनपुर में हुई विस्तृत स्वास्थ्य जांच

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चैनपुर में अस्पताल में पदस्थापित डॉ. दीपशिखा किंडो ने सभी 11 बच्चों की गहन जांच की। इस दौरान बच्चों की आयु के अनुसार वजन, शारीरिक विकास और पोषण स्तर का मिलान किया गया। जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बच्चों में कुपोषण का स्तर कितना गंभीर है और उन्हें किस प्रकार के उपचार की आवश्यकता है।

डॉ. दीपशिखा किंडो ने कहा:

“कुपोषण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है। समय पर पहचान और सही उपचार से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।”

गंभीर मामलों में विशेष उपचार की व्यवस्था

जांच के दौरान जिन बच्चों में गंभीर तीव्र कुपोषण और अति-निम्न वजन की समस्या पाई गई, उन्हें तुरंत विशेष देखभाल के लिए निर्देशित किया गया। ऐसे बच्चों को मातृ एवं शिशु पोषण केंद्र डुमरी या रायडीह में भर्ती कर उपचार दिए जाने की योजना बनाई गई है। इन केंद्रों पर बच्चों को विशेष डाइट चार्ट, आवश्यक दवाइयां और नियमित चिकित्सकीय निगरानी के साथ इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।

विशेषज्ञों की टीम बच्चों के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए चरणबद्ध योजना तैयार करेगी, ताकि उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर आ सके।

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सहियाओं की भूमिका रही निर्णायक

इस पूरे अभियान को धरातल पर सफल बनाने में सहियाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने प्रखंड के अत्यंत सुदूरवर्ती गांवों पाकरकोना, पुरनाडीह, कोरकोटोली, लुरु और कोटाम बहेराटोली से बच्चों को चिन्हित कर उनके अभिभावकों को जागरूक किया। इसके बाद बच्चों को सुरक्षित रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चैनपुर तक लाने की जिम्मेदारी भी सहियाओं ने निभाई।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर सहियाएं सक्रिय भूमिका न निभातीं, तो इन बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच पाना मुश्किल होता।

ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण की चुनौती

चैनपुर प्रखंड के सुदूरवर्ती इलाकों में कुपोषण आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। गरीबी, जागरूकता की कमी, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं और संतुलित आहार का अभाव इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। ऐसे में इस तरह के विशेष अभियान न केवल बच्चों की जान बचाने में मदद करते हैं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ बनाने की दिशा में भी अहम कदम साबित होते हैं।

न्यूज़ देखो: कुपोषण के खिलाफ जमीनी स्तर पर असरदार पहल

यह अभियान बताता है कि यदि सामाजिक संस्थाएं, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय कार्यकर्ता मिलकर काम करें तो सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी प्रभावी बदलाव संभव है। कुपोषण जैसे गंभीर मुद्दे को केवल आंकड़ों तक सीमित रखने के बजाय, बच्चों तक सीधे पहुंच बनाना सराहनीय कदम है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उपचार के बाद इन बच्चों की प्रगति पर कितनी नियमित निगरानी होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

स्वस्थ बचपन, सुरक्षित भविष्य की ओर एक कदम

कुपोषण के खिलाफ यह पहल केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता और जिम्मेदारी का संदेश भी देती है। समाज के हर वर्ग की सहभागिता से ही बच्चों को बेहतर भविष्य दिया जा सकता है।
आपके आसपास यदि कोई बच्चा कुपोषण से जूझ रहा है, तो उसे स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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Aditya Kumar

डुमरी, गुमला

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