
#लातेहार #न्यायिक_निरीक्षण : मुख्य न्यायाधीश ने सिविल कोर्ट का औचक निरीक्षण कर न्यायिक व्यवस्था की समीक्षा की।
झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक ने 21 फरवरी 2026 को लातेहार सिविल कोर्ट का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान न्यायालय कक्षों, लंबित मामलों और आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा की गई। बार एसोसिएशन अध्यक्ष लाल अरविंद नाथ शाहदेव ने उनका स्वागत कर सम्मानित किया। इस दौरे को न्यायिक व्यवस्था सुदृढ़ करने की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
- 21 फरवरी 2026 को मुख्य न्यायाधीश का लातेहार सिविल कोर्ट का औचक निरीक्षण।
- न्यायालय कक्षों का भ्रमण कर लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन पर जोर।
- बार एसोसिएशन अध्यक्ष लाल अरविंद नाथ शाहदेव ने पुष्पगुच्छ देकर किया सम्मान।
- डीएलएसए कार्यालय पहुंचकर निःशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं की समीक्षा।
- न्यायालय परिसर की स्वच्छता, आधारभूत सुविधाओं व समग्र वातावरण का लिया जायजा।
लातेहार में शनिवार को न्यायिक व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक क्षण तब देखने को मिला जब झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक ने व्यवहार न्यायालय (सिविल कोर्ट) का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण कार्यक्रम ने न केवल न्यायिक कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा का अवसर प्रदान किया, बल्कि बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय का सकारात्मक संदेश भी दिया। न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और प्रशासनिक पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह दौरा न्याय व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
न्यायालय कक्षों का निरीक्षण और न्यायिक कार्यवाही का अवलोकन
निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने विभिन्न न्यायालय कक्षों का भ्रमण किया और चल रही न्यायिक कार्यवाहियों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन, समयबद्ध सुनवाई और गुणवत्तापूर्ण न्याय सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।
उन्होंने संबंधित न्यायिक अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाना आवश्यक है, ताकि आम नागरिकों को शीघ्र न्याय मिल सके। निरीक्षण के क्रम में न्यायालय की कार्यप्रणाली, केस मैनेजमेंट और सुनवाई व्यवस्था को भी विस्तार से परखा गया।
आधारभूत सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा
मुख्य न्यायाधीश ने न्यायालय परिसर की स्वच्छता, आधारभूत सुविधाओं और समग्र वातावरण का भी निरीक्षण किया। उन्होंने न्यायालय आने वाले वादकारियों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
निरीक्षण के दौरान परिसर की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिससे न्यायालय का वातावरण अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सके।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय का भी किया दौरा
अपने निरीक्षण कार्यक्रम के तहत मुख्य न्यायाधीश जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) कार्यालय भी पहुंचे। यहां उन्होंने गरीब, जरूरतमंद और वंचित वर्गों को प्रदान की जा रही निःशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं की जानकारी ली।
उन्होंने निर्देश दिया कि कानूनी सहायता योजनाओं की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति आर्थिक कारणों से न्याय से वंचित न रहे। यह पहल न्याय को अधिक सुलभ और जनहितकारी बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
बार एसोसिएशन कार्यालय में हुआ सम्मान, अधिवक्ताओं में उत्साह
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण जिला अधिवक्ता संघ कार्यालय में देखने को मिला, जहां बार एसोसिएशन के अध्यक्ष लाल अरविंद नाथ शाहदेव ने मुख्य न्यायाधीश को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका सम्मान किया। इस अवसर पर अधिवक्ताओं में उत्साह का माहौल देखा गया और न्यायपालिका के प्रति सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से झलकी।
अध्यक्ष लाल अरविंद नाथ शाहदेव ने न्यायपालिका के मार्गदर्शन को अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणादायी बताते हुए न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
लाल अरविंद नाथ शाहदेव ने कहा: “न्यायपालिका का मार्गदर्शन अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणादायी है और हम न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में हर संभव सहयोग देंगे।”
बार और बेंच के समन्वय पर मुख्य न्यायाधीश का विशेष बल
मुख्य न्यायाधीश ने अधिवक्ताओं की भूमिका को न्याय प्रणाली की आधारशिला बताते हुए बार और बेंच के समन्वय को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों के बेहतर तालमेल से ही आमजन को प्रभावी, पारदर्शी और त्वरित न्याय मिल सकता है।
उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया को अधिक जनोन्मुखी, सुलभ और संवेदनशील बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। साथ ही यह भी संकेत दिया कि न्यायिक सुधार और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाएगी।
न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर जिले के न्यायिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान न्यायिक तंत्र की मजबूती, पारदर्शिता और दक्षता को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
मुख्य न्यायाधीश का यह दौरा न्यायिक प्रणाली की कार्यक्षमता बढ़ाने, लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाने और न्यायिक सेवाओं को आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
न्यूज़ देखो: न्यायिक सुधार और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
लातेहार सिविल कोर्ट का यह औचक निरीक्षण न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की गंभीर पहल को दर्शाता है। बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय का संदेश भी इस दौरे से स्पष्ट रूप से सामने आया है। यदि निर्देशों का प्रभावी अनुपालन होता है तो लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी आ सकती है और आम जनता को समयबद्ध न्याय मिल सकेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
न्याय व्यवस्था सशक्त बने, यही लोकतंत्र की असली ताकत
न्यायालय केवल भवन नहीं बल्कि न्याय और विश्वास की संस्था है।
समयबद्ध और पारदर्शी न्याय से ही आम नागरिक का भरोसा मजबूत होता है।
ऐसे निरीक्षण न्यायिक सुधार और जवाबदेही को नई दिशा देते हैं।
हम सभी की जिम्मेदारी है कि न्याय व्यवस्था के प्रति सम्मान और सहयोग बनाए रखें।
सजग नागरिक बनें, न्याय और कानून के प्रति जागरूक रहें।
अपनी राय कमेंट करें, खबर को शेयर करें और न्यायिक पारदर्शिता की इस पहल को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।






