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बेरनीबेडा में बजरंग बली मंदिर वार्षिक उत्सव पर आस्था का उमड़ा सैलाब, 251 कलश यात्रियों संग संपन्न हुआ अष्ट प्रहरी यज्ञ

#बानोसिमडेगा #धार्मिकआयोजन : बजरंग बली मंदिर उत्सव में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से पूजा-अर्चना की।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित बेरनीबेडा में श्री श्री बजरंग बली मंदिर के वार्षिक उत्सव के अवसर पर अष्ट प्रहरी यज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 251 श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा में भाग लिया, जो दक्षिण कोयल नदी से मंदिर तक पहुंची। पूरे आयोजन में क्षेत्र के श्रद्धालुओं की सक्रिय भागीदारी रही। यह आयोजन धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा।

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  • बानो प्रखंड के बेरनीबेडा में बजरंग बली मंदिर वार्षिक उत्सव का आयोजन।
  • 251 कलश यात्रियों ने दक्षिण कोयल नदी से मंदिर तक निकाली भव्य यात्रा।
  • रामनाथ सिंह व अकेली देवी बने मुख्य यजमान, बृजेंद्र मिश्रा ने किया पुरोहित का कार्य।
  • एक दिवसीय अखंड हरि कीर्तन और यज्ञ पूजन का हुआ आयोजन।
  • आयोजन को सफल बनाने में महिपाल सिंह बागेश्वर प्रधान सहित कई ग्रामीणों की अहम भूमिका।
  • आसपास के गांवों सूत्रीउली, गोहारोम, बेडाइरगी के श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत बेरनीबेडा गांव में स्थित श्री श्री बजरंग बली मंदिर के वार्षिक उत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर अष्ट प्रहरी यज्ञ और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 251 कलश यात्रियों की भव्य यात्रा रही, जिसने पूरे आयोजन को खास बना दिया।

भव्य कलश यात्रा के साथ हुई धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत

वार्षिक उत्सव के अवसर पर बेरनीबेडा डोंगा घाट से कलश यात्रा निकाली गई। इसमें 251 श्रद्धालुओं ने भाग लेते हुए दक्षिण कोयल नदी से पवित्र जल भरकर बजरंग बली मंदिर तक यात्रा की। श्रद्धालु पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन करते हुए मंदिर पहुंचे और मंदिर की परिक्रमा करते हुए विधिवत पूजा-अर्चना की।

इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया और हर ओर “जय बजरंग बली” के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

अष्ट प्रहरी यज्ञ और अखंड हरि कीर्तन का आयोजन

मंदिर परिसर में अष्ट प्रहरी यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। साथ ही एक दिवसीय अखंड हरि कीर्तन का भी आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने पूरे दिन भगवान के भजन गाकर माहौल को और भी पवित्र बना दिया।

कार्यक्रम में मुख्य यजमान के रूप में रामनाथ सिंह और उनकी धर्मपत्नी अकेली देवी उपस्थित रहे। वहीं यज्ञ के संचालन में पुरोहित बृजेंद्र मिश्रा और पुजारी के रूप में धीरेन्द्र मिश्रा ने अपनी भूमिका निभाई।

बृजेंद्र मिश्रा ने कहा: “धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोगों में एकता और श्रद्धा की भावना मजबूत होती है।”

ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से सफल हुआ आयोजन

इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेष रूप से महिपाल सिंह बागेश्वर प्रधान, नरेंद्र सिंह, मुकुंद सिंह, लक्ष्मण प्रधान, राधा सिंह, दुखन सिंह, गजेंद्र, बिमला देवी, लीलावती देवी, बेलावती देवी, लीलांबर, कालेश्वर सहित कई लोगों ने सक्रिय योगदान दिया।

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इन सभी के सहयोग से पूरे कार्यक्रम का संचालन सुचारू रूप से हुआ और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।

आसपास के गांवों से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

कार्यक्रम में केवल बेरनीबेडा ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों से भी श्रद्धालु पहुंचे। सूत्रीउली, गोहारोम, और बेडाइरगी सहित अन्य गांवों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उनकी आस्था ने इस आयोजन को एक बड़े धार्मिक उत्सव का रूप दे दिया, जिसने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक संदेश दिया।

न्यूज़ देखो: धार्मिक आयोजन से मजबूत होती सामाजिक एकता

बेरनीबेडा में आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता और सामूहिक भागीदारी का भी उत्कृष्ट उदाहरण बना। ग्रामीणों की एकजुटता और सहयोग ने यह दिखाया कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। प्रशासनिक स्तर पर ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए ताकि सांस्कृतिक विरासत जीवित रहे। क्या भविष्य में ऐसे आयोजनों को और व्यापक स्तर पर बढ़ाया जा सकेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था के संग जुड़ाव बढ़ाएं और समाज को मजबूत बनाएं

धार्मिक आयोजन केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम होते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेकर हम अपनी संस्कृति को जीवित रखते हैं और नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ते हैं।

यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसे आयोजन हो रहे हैं, तो उसमें सक्रिय भागीदारी निभाएं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाएं।आपकी छोटी-सी सहभागिता भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकती है।

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Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

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