सिमडेगा के जूनियर कैम्ब्रिज स्कूल में सर्व धर्म सम्मेलन भव्यता के साथ संपन्न, एकता और मानवता का दिया संदेश

सिमडेगा के जूनियर कैम्ब्रिज स्कूल में सर्व धर्म सम्मेलन भव्यता के साथ संपन्न, एकता और मानवता का दिया संदेश

author Birendra Tiwari
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#सिमडेगा #सर्वधर्म_सम्मेलन : विभिन्न धर्मगुरुओं ने एक मंच पर आकर मानवता और सद्भाव का संदेश दिया।

सिमडेगा के जूनियर कैम्ब्रिज स्कूल में स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर सर्व धर्म सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने धर्म के मूल सिद्धांतों और मानव जीवन में उनके महत्व पर विचार साझा किए। इस दौरान एकता, भाईचारे और समन्वय का संदेश दिया गया। आयोजन में प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।

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  • जूनियर कैम्ब्रिज स्कूल, सिमडेगा में स्वर्ण जयंती पर सर्व धर्म सम्मेलन आयोजित।
  • उपायुक्त कंचन सिंह सहित विभिन्न धर्मगुरु और विद्वान हुए शामिल।
  • दीप प्रज्वलन व मंगलाचरण से कार्यक्रम का शुभारंभ
  • विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने मानवता और समरसता पर रखे विचार
  • स्वर्णिम पथ” स्मारिका व “प्राकृत व्याकरण” ग्रंथ का हुआ लोकार्पण।
  • समाजसेवियों को सम्मानित कर बढ़ाया गया उत्साह

सिमडेगा स्थित जूनियर कैम्ब्रिज स्कूल में स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित सर्व धर्म सम्मेलन भव्यता और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि, धर्मगुरु, शिक्षकगण और विद्वान एक मंच पर एकत्र हुए और मानव जीवन में धर्म के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में एकता, सद्भाव और मानवता के मूल्यों को मजबूत करना रहा।

दीप प्रज्वलन और मंगलाचरण से हुई शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ सभी अतिथियों द्वारा समवेत रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात विद्यालय के प्रतिभाशाली बच्चों ने “दीपो ज्योति परम् ज्योति” गीत प्रस्तुत कर मंगलाचरण किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।

उपायुक्त कंचन सिंह का संदेश

कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित उपायुक्त कंचन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सभी धर्मग्रंथों में अहिंसा, सत्य, समन्वय और भाईचारे का संदेश निहित है।

कंचन सिंह ने कहा: “यदि हम धर्मग्रंथों की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएं, तो समाज में शांति और सौहार्द स्थापित किया जा सकता है।”

उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध पंक्ति “पर हित सरिस धर्म नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाई” को आत्मसात करने की प्रेरणा दी।

विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की भूमिका

विद्यालय के प्रबंधक राहुल प्रसाद ने स्वागत भाषण देते हुए सभी अतिथियों का अभिनंदन किया और कहा कि पूजा-पद्धतियों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन धर्म का मूल भाव एक ही होता है।

विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रभा केरकेट्टा ने मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए योग, भक्ति और सकारात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला।

विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने रखे विचार

कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए। वैदिक परंपरा से नारायण दास, इस्लाम परंपरा से मौलाना शाकिब अहमद, जैन परंपरा से गुरुमा वसुंधरा, शिक्षाविद् शंभू जी, गायत्री परिवार से प्रज्ञा कुमारी, आनंदमार्ग के प्रतिनिधि एवं अन्य वक्ताओं ने धर्म को जीवन जीने की कला बताया।

सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य मानवता की सेवा और समाज में समरसता स्थापित करना है।

मुख्य अध्यक्ष का समन्वयात्मक उद्बोधन

कार्यक्रम के मुख्य अध्यक्ष आचार्य पद्मराज स्वामी जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि धर्म एक मंजिल है और विभिन्न धर्म उसके अलग-अलग मार्ग हैं।

आचार्य पद्मराज स्वामी जी महाराज ने कहा: “प्रेम, अहिंसा और अनेकांतवाद के माध्यम से समाज में समरसता और एकता स्थापित की जा सकती है।”

स्मारिका और ग्रंथ का लोकार्पण

इस अवसर पर विद्यालय की स्मारिका “स्वर्णिम पथ” तथा आचार्य पद्मराज स्वामी जी द्वारा लिखित ग्रंथ “प्राकृत व्याकरण” का लोकार्पण किया गया। साथ ही गुरुमा वसुंधरा के नवीन भजन “रामह स्तुति” का विमोचन और मंचन भी किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।

समाजसेवियों का सम्मान और आयोजन की सफलता

कार्यक्रम के दौरान समाज में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को चादर और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस सफल आयोजन में विद्यालय के SMC सदस्यों, विद्या वनस्थली शिक्षा समिति के सदस्यों, शिक्षकगणों और कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा।

कार्यक्रम का संचालन प्रिंस जी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अध्यापिका लक्ष्मी जी द्वारा प्रस्तुत किया गया। अंत में मंगलपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

“धर्म का सार मानवता है” संदेश के साथ समापन

पूरे कार्यक्रम के दौरान एक ही संदेश उभरकर सामने आया कि धर्म का वास्तविक सार मानवता और सेवा में निहित है। यह सम्मेलन समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने का माध्यम बना।

न्यूज़ देखो: विविधता में एकता का सशक्त संदेश

सिमडेगा में आयोजित सर्व धर्म सम्मेलन यह दर्शाता है कि विभिन्न धर्मों के बीच संवाद और समन्वय से समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस तरह के आयोजन आज के समय में बेहद जरूरी हैं, जब समाज को जोड़ने की आवश्यकता पहले से अधिक है। प्रशासन और शैक्षणिक संस्थानों की पहल सराहनीय है, लेकिन इसे निरंतर बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

एकता और मानवता को अपनाएं, समाज को नई दिशा दें

सर्व धर्म सम्मेलन हमें यह सिखाता है कि भले ही हमारे धर्म अलग हों, लेकिन हमारी सोच और उद्देश्य एक हो सकते हैं। समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए हमें एक-दूसरे का सम्मान करना जरूरी है। हम सभी अपने जीवन में मानवता और प्रेम को प्राथमिकता दें, तो एक बेहतर समाज का निर्माण संभव है।

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सिमडेगा

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