
#पलामू #धार्मिक_आयोजन : मकर संक्रांति के पावन अवसर पर श्री बेनुगोपाल मंदिर परिसर में पांच दिवसीय मेले का शुभारंभ हुआ।
पलामू जिले के पांडू प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत डाला कलां के बृद्धखैर गांव में मकर संक्रांति के अवसर पर पांच दिवसीय भव्य धार्मिक मेला शुरू हुआ। श्री बेनुगोपाल मंदिर सह मठ परिसर में आयोजित इस मेले का उद्घाटन मंदिर के महंत और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से किया। हर वर्ष की तरह इस बार भी झारखंड, बिहार और आसपास के राज्यों से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। यह मेला धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और ग्रामीण मेल-जोल का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
- बृद्धखैर, पांडू में श्री बेनुगोपाल मंदिर परिसर में पांच दिवसीय मकर संक्रांति मेला शुरू।
- महंत श्री विष्णुचित स्वामी जी महाराज सहित जनप्रतिनिधियों ने फीता काटकर किया उद्घाटन।
- मेले में सर्कस, झूला, जादूगर, मीना बाजार, ब्रेक डांस सहित कई मनोरंजन आयोजन।
- 1956 से लगातार मकर संक्रांति मेला आयोजन की चली आ रही परंपरा।
- बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना।
पांडू प्रखंड के ग्राम पंचायत डाला कलां अंतर्गत बृद्धखैर गांव में स्थित श्री बेनुगोपाल मंदिर सह मठ परिसर एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर यहां हर वर्ष की तरह इस वर्ष 2026 में भी पांच दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया गया है। मेले का शुभारंभ श्रद्धा, उत्साह और जनभागीदारी के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
फीता काटकर हुआ मेले का उद्घाटन
मेले का उद्घाटन श्री बेनुगोपाल मंदिर के महंत श्री विष्णुचित स्वामी जी महाराज, पांडू जिला परिषद सदस्य मीना देवी, पांडू प्रमुख प्रतिनिधि प्रद्युम्न कुमार सिंह उर्फ सिंटू सिंह, पांडू क्षत्रिय महासंघ अध्यक्ष सह पांडू मुखिया संघ अध्यक्ष प्रतिनिधि अभिनाश कुमार सिंह उर्फ सिंटू सिंह ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।
उद्घाटन के दौरान मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चारण और भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। जनप्रतिनिधियों ने मेले की परंपरा और इसके सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की।
मनोरंजन और संस्कृति का संगम
पांच दिवसीय इस मेले में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के मनोरंजन के लिए विविध आयोजन किए गए हैं। मेले में सर्कस, झूला, जादूगर, मीना बाजार, ब्रेक डांस सहित कई प्रकार के सांस्कृतिक और मनोरंजन कार्यक्रम लगाए गए हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए मेले में आकर्षण का विशेष ध्यान रखा गया है।
मेला समिति के सदस्यों द्वारा सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवस्था को लेकर सक्रिय भूमिका निभाई जा रही है। वहीं, किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क और तैनात है।
1956 से चली आ रही परंपरा
श्री बेनुगोपाल मंदिर के महंत श्री विष्णुचित स्वामी जी महाराज ने बताया:
“यह मकर संक्रांति मेला वर्ष 14 जनवरी 1956 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। हर वर्ष मकर संक्रांति पर यहां पांच दिवसीय मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।”
उन्होंने बताया कि इस मेले में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आपसी मेल-जोल और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
महंत श्री विष्णुचित स्वामी जी ने मंदिर के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि श्री बेनुगोपाल मंदिर की आधारशिला वर्ष 1946 में विष्णु संप्रदाय के संत श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के तत्वावधान में रखी गई थी। मंदिर निर्माण कार्य 11 मार्च 1954 को पूर्ण हुआ, जिसके बाद भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं की विधिवत स्थापना की गई।
यह मंदिर खैरांचल क्षेत्र के गोद में स्थित है और वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
वर्ष भर होते हैं चार प्रमुख उत्सव
महंत श्री विष्णुचित स्वामी जी ने बताया कि मंदिर में वर्ष भर चार बड़े धार्मिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं। इनमें मकर संक्रांति पर पांच दिवसीय मेला, चैत्र मास में रामनवमी उत्सव, कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव और दीपावली पर अंकुट नामक उत्सव शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि दीपावली के अवसर पर भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाता है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है।
श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क व्यवस्था
मंदिर प्रशासन द्वारा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क ठहरने और प्रसाद की उत्तम व्यवस्था की गई है। महंत जी के अनुसार, यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि सेवा और आतिथ्य की परंपरा को भी निभाता आ रहा है।
मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए भोजन, जल और आवास की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है।
आयोजन में स्थानीय जनों की भागीदारी
इस अवसर पर शंभूशरण सिंह, अरविंद सिंह, ज्वाला विश्वकर्मा, पंचम विश्वकर्मा, राजेंद्र विश्वकर्मा, नीरज सिंह, राजकुमार सिंह, लालजी मेहता, सुरेन्द्र विश्वकर्मा, अमरनाथ बैठा सहित कई स्थानीय गणमान्य लोग और मेला समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर मेले के सफल आयोजन के लिए सहयोग और सहभागिता का संकल्प लिया।
न्यूज़ देखो: परंपरा, आस्था और जनसहभागिता का जीवंत उदाहरण
बृद्धखैर में आयोजित मकर संक्रांति मेला यह दर्शाता है कि ग्रामीण भारत में धार्मिक आयोजन आज भी सामाजिक एकता का मजबूत आधार हैं। दशकों पुरानी परंपरा का निर्वाह स्थानीय समाज और मंदिर प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी को उजागर करता है। ऐसे आयोजनों में प्रशासनिक सहयोग और सुरक्षा व्यवस्था भी अहम भूमिका निभाती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में इस ऐतिहासिक मेले को और किस तरह संरक्षित व विकसित किया जाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था से जुड़कर ही संस्कृति जीवित रहती है
मकर संक्रांति जैसे पर्व हमारी परंपरा और सामूहिक चेतना को मजबूत करते हैं।
धार्मिक मेले केवल पूजा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम होते हैं।
ऐसे आयोजनों में सहभागिता कर अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजना हम सबकी जिम्मेदारी है।
यदि आप भी इस मेले से जुड़े हैं, तो अपने अनुभव साझा करें।
खबर को आगे बढ़ाएं, दूसरों तक पहुंचाएं और सांस्कृतिक जागरूकता का हिस्सा बनें।





