
#चतरा #न्यायकीगुहार : लावालौंग थाना क्षेत्र में पुलिस पर झूठा केस दर्ज करने का गंभीर आरोप।
चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र से पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आतमपुर निवासी नवीन साव ने एएसआई सुधिर कुमार पर झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। नवीन साव का कहना है कि पूर्व में हुए जानलेवा हमले के बावजूद हमलावरों पर कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि अब उन्हें ही आरोपी बनाया जा रहा है। वहीं पुलिस ने आरोपों को निराधार बताते हुए दर्ज शिकायत के आधार पर कार्रवाई की बात कही है।
- लावालौंग थाना क्षेत्र से झूठे मुकदमे का गंभीर आरोप।
- नवीन साव ने एएसआई सुधिर कुमार पर लगाया आरोप।
- पूर्व में जानलेवा हमले और तीन महीने रिम्स में इलाज का दावा।
- आरोपियों पर कार्रवाई के बजाय परिजनों को धमकी देने का आरोप।
- 5 जनवरी की घटना को लेकर दर्ज हुआ विवादित मामला।
- पुलिस का पक्ष—परिवादी के आवेदन पर विधिसम्मत कार्रवाई।
चतरा जिले के लावालौंग थाना अंतर्गत आतमपुर गांव से एक बार फिर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गांव निवासी नवीन साव ने मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस, विशेष रूप से एएसआई सुधिर कुमार, उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है। नवीन साव का कहना है कि वे स्वयं एक गंभीर हमले के पीड़ित हैं, लेकिन न्याय दिलाने के बजाय उन्हें ही आरोपी बना दिया गया।
पूर्व में हुए जानलेवा हमले का आरोप
नवीन साव ने बताया कि कुछ दिन पूर्व विक्रम कुमार, अमित कुमार एवं उनके सहयोगियों ने उन पर हमला किया था। इस हमले में उनका हाथ और पैर तोड़ दिया गया, और उन्हें गंभीर हालत में छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि गांव वालों की तत्परता से किसी तरह उन्हें हमलावरों से बचाया गया।
हमले के बाद नवीन साव को इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स में भर्ती कराया गया, जहां लगभग तीन महीने तक इलाज चला। नवीन के अनुसार, अब भी उनके जख्म पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं, और वे शारीरिक व मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं।
पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप
नवीन साव का आरोप है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद लावालौंग पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उल्टा, उनके बुजुर्ग पिता को जेल भेजने की धमकी दी जाने लगी। इस व्यवहार से आहत होकर उनके पिता ने मीडिया के माध्यम से न्याय की गुहार लगाई थी।
नवीन का कहना है कि इसी बात से नाराज होकर पुलिस ने अब उन्हें झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची है।
पैसे के लेन-देन को बताया गया साजिश का आधार
नवीन साव ने यह भी बताया कि उनके ऊपर मोटी रकम की ठगी का आरोप लगाया गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह मामला घर निर्माण सामग्री के बदले पैसों के लेन-देन से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य आर्थिक विवाद था, जिसे जानबूझकर आपराधिक रंग दिया गया।
5 जनवरी की घटना पर सवाल
नवीन साव के अनुसार, विक्रम कुमार और उनके सहयोगियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि 5 जनवरी को नवीन साव, उनके 65 वर्षीय पिता राधेश्याम प्रसाद और उनके भाई ने हथियार लहराते हुए उनके घर में घुसकर जान से मारने की धमकी दी।
नवीन ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि:
- 5 जनवरी को वे स्वयं और उनके पिता रांची में मौजूद थे, जिसका वीडियो फुटेज और अन्य सबूत उनके पास है।
- उनका भाई ओडिशा में काम करता है और उस समय गांव में मौजूद ही नहीं था।
इसके बावजूद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाना उन्हें बेहद पीड़ादायक लग रहा है।
परिवार मानसिक रूप से आहत
नवीन साव ने कहा कि झूठे मुकदमे के कारण वे और उनका पूरा परिवार मानसिक तनाव में है। उन्होंने मांग की कि जिले के वरीय पदाधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करें, ताकि सच्चाई सामने आ सके और निर्दोष लोगों को राहत मिल सके।
पुलिस का पक्ष
इस पूरे मामले में जब एएसआई सुधिर कुमार से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा:
सुधिर कुमार ने कहा: “परिवादी द्वारा जो मामला दर्ज कराया गया है, पुलिस उसी के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई कर रही है। हमें किसी भी व्यक्ति से कोई आपत्ति नहीं है।”
पुलिस का कहना है कि कानून के तहत दर्ज शिकायत पर ही कार्रवाई की जा रही है और मामले की जांच प्रक्रिया जारी है।
उठ रहे हैं कई सवाल
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि नवीन साव के आरोप सही हैं, तो यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। वहीं यदि शिकायतकर्ता का पक्ष सही है, तो कानून को अपना काम करने देना भी आवश्यक है।
न्यूज़ देखो: निष्पक्ष जांच की दरकार
लावालौंग थाना क्षेत्र से सामने आया यह मामला दर्शाता है कि पुलिस और आम नागरिक के बीच विश्वास बनाए रखना कितना जरूरी है। एक ओर गंभीर हमले के पीड़ित होने का दावा, दूसरी ओर झूठे मुकदमे का आरोप—दोनों ही स्थितियां संवेदनशील हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है। अब यह जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह तथ्यों की गहराई से जांच कर न्याय सुनिश्चित करे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
न्याय की उम्मीद और सच की तलाश
जब आम नागरिक न्याय के लिए आवाज उठाता है, तो प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। सच्चाई चाहे जिस पक्ष में हो, न्याय उसी का होना चाहिए। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच ही भरोसे को कायम रख सकती है।





