
#रांची #छात्र_आंदोलन : छात्रवृत्ति बंद करने के विरोध में एनएसयूआई सड़कों पर उतरी, केंद्र सरकार को चेतावनी।
झारखंड की राजधानी रांची में एनएसयूआई ने छात्रवृत्ति राशि रोके जाने के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ विशाल प्रदर्शन मार्च निकाला। इस आंदोलन में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र की नीतियों से लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में है। प्रदर्शन के माध्यम से छात्रवृत्ति तुरंत बहाल करने की मांग की गई।
- एनएसयूआई ने केंद्र सरकार के खिलाफ निकाला विशाल प्रदर्शन मार्च।
- छात्रवृत्ति फंड रोके जाने को बताया छात्रों के भविष्य से खिलवाड़।
- स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल।
- रांची की सड़कों पर हजारों छात्र और युवा कार्यकर्ता उतरे।
- बीजेपी सरकार पर हर वर्ग को ठगने का आरोप।
- छात्र हित में छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता तुरंत जारी करने की मांग।
झारखंड में छात्रवृत्ति संकट को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। राजधानी रांची में बुधवार को एनएसयूआई के बैनर तले केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ एक विशाल और उग्र प्रदर्शन मार्च का आयोजन किया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा केंद्र सरकार द्वारा छात्रों के लिए मिलने वाली छात्रवृत्ति राशि को रोकना बताया गया, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया है।
एनएसयूआई का आरोप: हर वर्ग को ठग रही है भाजपा सरकार
प्रदर्शन के दौरान झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने समाज के हर वर्ग को धोखा दिया है और अब छात्रों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा:
“भाजपा सरकार ने हर वर्ग को ठगने का काम किया है। जनता बहुत कुछ सह चुकी है, लेकिन युवाओं को दबाने और कुचलने की साजिश भाजपा को बहुत महंगी पड़ेगी।”
उन्होंने कहा कि पहले केंद्र सरकार द्वारा छात्रों को छात्रवृत्ति के रूप में आर्थिक सहायता दी जाती थी, जिससे गरीब और मेधावी छात्र अपनी पढ़ाई जारी रख पाते थे। लेकिन अब इस सहायता को रोक दिया गया है, जो सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य पर हमला है।
छात्रवृत्ति बंद होने से लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में
एनएसयूआई नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा छात्रवृत्ति फंड रोके जाने से लाखों छात्रों की पढ़ाई अधर में लटक गई है। खासकर गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्र आर्थिक तंगी के कारण आगे पढ़ाई नहीं कर पाएंगे।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है और यदि छात्रों से शिक्षा का अधिकार छीना गया, तो देश का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। एनएसयूआई ने केंद्र सरकार से स्पष्ट शब्दों में मांग की कि किसी भी परिस्थिति में छात्रों की छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता तुरंत जारी की जाए।
रांची की सड़कों पर उमड़ा छात्र-युवा जनसैलाब
इस मांग को लेकर हजारों एनएसयूआई कार्यकर्ता और छात्र रांची की सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन मार्च के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। युवाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर छात्रवृत्ति बहाल करने की मांग उठाई और भाजपा सरकार को छात्र विरोधी बताया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की रही मजबूत मौजूदगी
प्रदर्शन मार्च में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए, जिससे आंदोलन को राजनीतिक और संगठनात्मक मजबूती मिली। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, बंधु तिर्की, शहजादा अनवर, कुमार राजा, जयशंकर पाठक जी समेत कई युवा नेता और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
नेताओं ने एक सुर में कहा कि जब तक छात्रों को उनका हक नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यह सिर्फ एनएसयूआई का आंदोलन नहीं, बल्कि पूरे छात्र समाज की लड़ाई है।
युवाओं को दबाने की साजिश का आरोप
प्रदर्शन के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार सुनियोजित तरीके से युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। रोजगार, शिक्षा और छात्रवृत्ति जैसे मुद्दों पर सरकार की चुप्पी युवाओं में गुस्सा पैदा कर रही है।
एनएसयूआई नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।
छात्र हित में सड़क से संसद तक संघर्ष का ऐलान
एनएसयूआई ने साफ किया कि छात्रवृत्ति बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा। जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाई जाएगी। संगठन ने छात्रों से अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए एकजुट रहें और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाएं।
न्यूज़ देखो: छात्रवृत्ति पर राजनीति नहीं, जिम्मेदारी चाहिए
रांची में हुआ यह प्रदर्शन बताता है कि छात्रवृत्ति का मुद्दा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा है। लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर है और ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। आंदोलन यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या केंद्र सरकार छात्रों की शिक्षा को प्राथमिकता देगी या विरोध की आवाज और तेज होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा बचेगी, तभी भविष्य बनेगा
छात्रवृत्ति केवल सहायता नहीं, बल्कि गरीब छात्रों का सहारा है। जब शिक्षा पर संकट आता है, तो पूरा समाज प्रभावित होता है। आज जरूरत है कि छात्र, अभिभावक और समाज मिलकर शिक्षा के अधिकार की रक्षा करें। अपनी राय जरूर साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और छात्र हित की इस लड़ाई को मजबूत बनाएं, ताकि हर छात्र का भविष्य सुरक्षित रह सके।




