
#गुमला #धान_अधिप्राप्ति : खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में धान अधिप्राप्ति कार्य सुचारू व पारदर्शी रूप से संचालित करने हेतु विस्तृत समीक्षा।
- उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक सम्पन्न।
- 60,000 किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य, अब तक 12,000 पंजीकरण पूर्ण।
- ई-उपार्जन पोर्टल पर समयबद्ध पंजीकरण व सत्यापन कराने के निर्देश।
- जिले में चयनित 24 लैम्पस/पैक्स की कार्यप्रणाली नियमानुकूल पाई गई।
- किसानों को क्रमवार एसएमएस भेजकर ही धान बिक्री के लिए बुलाया जाएगा।
- एक किसान से अधिकतम 200 क्विंटल धान अधिप्राप्ति की सीमा तय।
गुमला जिले में खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के तहत धान अधिप्राप्ति कार्य को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए। उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक में पंजीकरण, सत्यापन, अधिप्राप्ति केन्द्रों की तैयारी और अधिकारियों की जिम्मेदारी से जुड़े सभी बिंदुओं पर चर्चा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक पात्र किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पूरा लाभ मिले, इसके लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकरण और सत्यापन को तेजी से पूरा करना अनिवार्य होगा।
किसानों का पंजीकरण और सत्यापन की अद्यतन स्थिति
जिला प्रशासन के मुताबिक अब तक 12,000 किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 60,000 किसानों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पंजीकरण के साथ-साथ किसानों के दस्तावेजों का सत्यापन भी तेजी से कराया जा रहा है, ताकि किसी भी पात्र किसान को लाभ से वंचित न होना पड़े।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों—अंचल अधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी तथा तकनीकी सहायकों—को निर्देश दिया कि पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करें।
उन्होंने कहा कि यह अभियान सीधे किसानों के हित से जुड़ा है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिप्राप्ति केन्द्रों की व्यवस्था और निगरानी
जिला आपूर्ति पदाधिकारी-सह-जिला प्रबंधक, गुमला ने बैठक में बताया कि धान अधिप्राप्ति केन्द्रों का चयन धान उत्पादक क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
- सभी केन्द्रों की नियमित जाँच,
- भौतिक सुविधाओं की उपलब्धता,
- सुरक्षित भंडारण व्यवस्था,
- पूर्व बकाया रहित स्थिति,
- और नियमित अंकेक्षण — अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाएगा।
जिला सहकारिता पदाधिकारी द्वारा 24 चयनित लैम्पस/पैक्स की सूची प्रस्तुत की गई, जिनकी कार्यप्रणाली नियमानुसार पाई गई है। इन सभी केन्द्रों पर प्रखंड स्तरीय अधिकारियों तथा कर्मचारियों को पर्यवेक्षक और दंडाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
पारदर्शी और सुव्यवस्थित धान क्रय प्रक्रिया
धान विक्रय को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने हेतु जिले में एसएमएस आधारित बुलाने की प्रणाली लागू की जाएगी।
- किसानों को क्रमवार एसएमएस भेजकर ही बुलाया जाएगा।
- एक किसान से अधिकतम 200 क्विंटल धान की अधिप्राप्ति की जाएगी।
- धान की गुणवत्ता, वजन और दस्तावेजों का सत्यापन ई-पॉस मशीन के माध्यम से किया जाएगा।
- अधिप्राप्ति केन्द्र के अध्यक्ष/सचिव, प्रतिनियुक्त पर्यवेक्षक, तथा मिल प्रतिनिधि—तीनों की संयुक्त उपस्थिति में धान उठाव होगा।
- अधिप्राप्त धान का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि प्रक्रिया की हर स्तर पर निगरानी होगी और किसानों के साथ किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता पाए जाने पर लैम्पस/पैक्स प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण और समीक्षा की सुदृढ़ व्यवस्था
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि:
- सभी अधिप्राप्ति केन्द्रों की नियमित जाँच प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी द्वारा की जाएगी।
- जिला सहकारिता पदाधिकारी एवं जिला कृषि पदाधिकारी निरीक्षण की समीक्षा करेंगे।
- निरीक्षण प्रतिवेदन साप्ताहिक रूप से जिला आपूर्ति कार्यालय को भेजा जाएगा।
- प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में प्रत्येक 20 दिनों में प्रखंड स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
इन कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले में धान अधिप्राप्ति का समूचा अभियान पारदर्शिता, जवाबदेही और किसानों के हितों की सुरक्षा के साथ पूरा हो।
उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने बैठक में कहा:
“किसानों को उनका अधिकार दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई गई तो संबंधित पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
बैठक में अपर समाहर्ता गुमला, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, सहकारिता पदाधिकारी, कृषि विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: पारदर्शी धान खरीद से किसानों में बढ़ेगा भरोसा
गुमला प्रशासन का यह प्रयास किसानों के लिए राहत और उम्मीद दोनों लेकर आया है। केंद्रीकृत पंजीकरण, ई-पॉस सत्यापन और नियमित निगरानी जैसी प्रक्रियाएं धान खरीद में पारदर्शिता को मजबूत करती हैं। इससे न सिर्फ MSP का लाभ वास्तव में किसानों तक पहुँचेगा, बल्कि अनियमितताओं पर भी लगाम लगेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
किसानों के अधिकारों के लिए जागरूक रहें
धान अधिप्राप्ति से जुड़े नियम, पंजीकरण प्रक्रिया और एमएसपी के लाभों के बारे में स्वयं जागरूक रहें और दूसरों को भी जानकारी दें। यदि किसी केन्द्र पर अनियमितता दिखे तो संबंधित अधिकारी को तुरंत सूचित करें। अपनी फसल, अधिकार और मेहनत—तीनों की सुरक्षा के लिए सक्रिय रहें। इस खबर को साझा करें और अपने सुझाव कमेंट में लिखें।





