
#लातेहार #मनरेगा_प्रशासन : प्रेस वार्ता के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बड़े पैमाने पर तबादले किए।
लातेहार जिले के मनरेगा विभाग में उस समय बड़ी प्रशासनिक हलचल देखी गई, जब एक प्रेस वार्ता के बाद जिले भर में बड़े पैमाने पर तबादले किए गए। झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता सौरभ श्रीवास्तव द्वारा मनरेगा में भ्रष्टाचार को लेकर उठाए गए सवालों के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। 16 जनवरी को हुई प्रेस वार्ता के कुछ ही दिनों बाद 103 रोजगार सेवकों समेत कई कनीय अभियंताओं का तबादला कर दिया गया। इस कार्रवाई को मनरेगा में पारदर्शिता लाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
- 16 जनवरी को हुई प्रेस वार्ता के बाद प्रशासन हुआ सक्रिय।
- जिले भर के 103 रोजगार सेवकों का तबादला।
- कई कनीय अभियंता भी बदले गए।
- सौरभ श्रीवास्तव ने मनरेगा में भ्रष्टाचार पर उठाए थे सवाल।
- तबादलों को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में।
लातेहार जिले में पिछले कुछ दिनों से मनरेगा विभाग को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। इसका कारण बना एक सनसनीखेज प्रेस वार्ता, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता सौरभ श्रीवास्तव ने मनरेगा योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि योजनाएं कागजों पर तो पूरी दिख रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर गरीबों और जरूरतमंदों तक उनका पूरा लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
प्रेस वार्ता के बाद बदला प्रशासन का रुख
16 जनवरी को आयोजित इस प्रेस वार्ता के बाद जिला प्रशासन की सक्रियता साफ तौर पर देखने को मिली। प्रेस वार्ता के कुछ ही दिनों के भीतर लातेहार जिले में मनरेगा से जुड़े 103 रोजगार सेवकों का तबादला कर दिया गया। इसके साथ ही कई प्रखंडों में पदस्थापित कनीय अभियंताओं को भी इधर से उधर किया गया है। लंबे समय से एक ही प्रखंड में जमे कर्मियों को हटाकर नए स्थानों पर भेजा गया, जिससे व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कदम मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। वर्षों से एक ही जगह पदस्थापित कर्मियों पर स्थानीय स्तर पर मिलीभगत और अनियमितता के आरोप लगते रहे हैं, जिसे रोकने के लिए यह व्यापक तबादला किया गया है।
भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की कवायद
जानकारों का मानना है कि सौरभ श्रीवास्तव द्वारा उठाई गई आवाज के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना, जो सीधे तौर पर ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और आदिवासी समुदाय से जुड़ी है, उसमें किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार सरकार की छवि पर भी सवाल खड़े करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है।
सौरभ श्रीवास्तव की प्रतिक्रिया
तबादलों को लेकर जब सौरभ श्रीवास्तव से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने इसे सकारात्मक पहल बताया।
सौरभ श्रीवास्तव ने कहा: “अगर प्रशासन और अधिकारी वास्तव में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर हैं और उसी दृष्टिकोण से ये तबादले किए गए हैं, तो यह निश्चित रूप से स्वागत योग्य कदम है। इससे मनरेगा की योजनाओं में सुधार होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि केवल तबादले ही नहीं, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी भी जरूरी है, ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे।
नए रोजगार सेवकों से उम्मीदें
सौरभ श्रीवास्तव ने नव पदस्थापित रोजगार सेवकों से भी विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि अबुआ सरकार की योजनाओं का लाभ जिले के जंगलों, पहाड़ों और टोंगरियों में रहने वाली गरीब और वंचित जनता तक पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि अधिकारी और कर्मचारी ईमानदारी से काम करेंगे, तो उन्हें समाज और जनप्रतिनिधियों का सहयोग भी मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा केवल रोजगार देने की योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसे मजबूत करने की जिम्मेदारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों की है।
आगे क्या बदलेगा, इस पर टिकी नजरें
मनरेगा विभाग में हुई इस हलचल के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे और क्या-क्या बदलाव देखने को मिलते हैं। क्या केवल तबादलों से व्यवस्था सुधरेगी, या फिर जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में भी वास्तविक सुधार होगा, यह आने वाला समय बताएगा।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि इस प्रशासनिक सख्ती का असर मनरेगा कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर पड़ेगा, जिससे मजदूरों को समय पर काम और भुगतान मिल सकेगा।
न्यूज़ देखो: मनरेगा में जवाबदेही की परीक्षा
लातेहार में मनरेगा को लेकर हुआ यह बड़ा तबादला प्रशासनिक इच्छाशक्ति का संकेत देता है। एक प्रेस वार्ता के बाद त्वरित कार्रवाई यह दिखाती है कि जन दबाव और सवालों का असर होता है। अब चुनौती यह है कि यह कार्रवाई केवल कागजी न रह जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव दिखे। क्या भ्रष्टाचार पर वास्तव में लगाम लगेगी, यह देखना अहम होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जवाबदेही से ही बदलेगी तस्वीर
ग्रामीण योजनाएं तभी सफल होती हैं, जब उनमें पारदर्शिता और ईमानदारी हो। मनरेगा जैसे कार्यक्रम से लाखों परिवारों की आजीविका जुड़ी है।
यदि आप भी अपने क्षेत्र में योजनाओं के सही क्रियान्वयन की मांग करते हैं, तो अपनी आवाज बुलंद करें। इस खबर को साझा करें, चर्चा में भाग लें और जवाबदेही तय करने की इस पहल को मजबूत बनाएं।





