बानो के केतुंगाधाम स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में 9 मार्च से वार्षिक परीक्षा शुरू, विद्यालय प्रशासन ने पूरी की तैयारियां

बानो के केतुंगाधाम स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में 9 मार्च से वार्षिक परीक्षा शुरू, विद्यालय प्रशासन ने पूरी की तैयारियां

author Shivnandan Baraik
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#बानो #वार्षिक_परीक्षा : केतुंगाधाम स्थित विद्यालय में शांतिपूर्ण और अनुशासित परीक्षा संचालन की तैयारी पूरी।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड के केतुंगाधाम स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शैक्षणिक सत्र 2025-26 की वार्षिक परीक्षा 9 मार्च 2026 से शुरू होगी। परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और अनुशासित वातावरण में संपन्न कराने के लिए विद्यालय प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रधानाचार्य सुकरा केरकेट्टा ने बताया कि परीक्षा संचालन के लिए कक्षाओं की व्यवस्था, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और कक्ष निरीक्षण की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। विद्यार्थियों को आत्मविश्वास और ईमानदारी के साथ परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया गया है।

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  • सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, केतुंगाधाम (बानो) में 9 मार्च 2026 से वार्षिक परीक्षा प्रारंभ होगी।
  • परीक्षा के सफल संचालन के लिए विद्यालय प्रशासन ने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं।
  • प्रधानाचार्य सुकरा केरकेट्टा ने बताया कि कक्षाओं की व्यवस्था और निरीक्षण के लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
  • परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अनुशासन और समयबद्ध संचालन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • विद्यार्थियों से आत्मविश्वास और ईमानदारी के साथ परीक्षा देने की अपील की गई।
  • अभिभावकों से बच्चों को समय पर विद्यालय भेजने और सकारात्मक माहौल देने का आग्रह किया गया।

बानो प्रखंड क्षेत्र के केतुंगाधाम स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शैक्षणिक सत्र 2025-26 की वार्षिक परीक्षा 9 मार्च 2026 से शुरू होने जा रही है। परीक्षा को लेकर विद्यालय में तैयारियों का माहौल है और प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। विद्यालय प्रबंधन का लक्ष्य है कि परीक्षा शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और अनुशासित वातावरण में संपन्न हो। इसके लिए विद्यालय के सभी आचार्यों और कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

परीक्षा संचालन के लिए की गई व्यापक तैयारी

विद्यालय प्रशासन के अनुसार वार्षिक परीक्षा को व्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए पहले से ही विस्तृत योजना बनाई गई है। कक्षाओं में बैठने की व्यवस्था इस प्रकार की गई है कि विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।

विद्यालय के प्रधानाचार्य सुकरा केरकेट्टा ने बताया कि परीक्षा के सफल संचालन के लिए प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, कक्ष निरीक्षण और समयबद्ध परीक्षा संचालन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके साथ ही विद्यालय परिसर में अनुशासन बनाए रखने के लिए भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।

विद्यार्थियों के लिए बैठने और निरीक्षण की विशेष व्यवस्था

परीक्षा के दौरान प्रत्येक विद्यार्थी के लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था की गई है ताकि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके। कक्ष निरीक्षण के लिए विद्यालय के आचार्यों को जिम्मेदारी दी गई है।

विद्यालय प्रशासन का कहना है कि परीक्षा के दौरान अनुशासन बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विद्यालय परिसर में आवश्यक निगरानी और नियंत्रण की व्यवस्था भी की गई है।

विद्यार्थियों को किया गया प्रेरित

विद्यालय के आचार्यों ने विद्यार्थियों को परीक्षा को लेकर प्रेरित करते हुए कहा कि परीक्षा जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है। यह पूरे वर्ष की पढ़ाई और मेहनत को परखने का अवसर प्रदान करती है।

सुकरा केरकेट्टा ने कहा: “पूरे वर्ष की मेहनत, नियमित अध्ययन और अनुशासन ही अच्छे परिणाम की कुंजी है। सभी विद्यार्थी आत्मविश्वास और ईमानदारी के साथ परीक्षा में शामिल हों।”

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि परीक्षा को किसी दबाव के रूप में नहीं बल्कि अपने ज्ञान और क्षमता को प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में देखें।

बिना तनाव के परीक्षा देने की सलाह

विद्यालय के आचार्यों ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे बिना किसी भय या तनाव के परीक्षा में शामिल हों। उनका कहना है कि यदि विद्यार्थी पूरे मनोयोग से परीक्षा देंगे तो निश्चित रूप से उन्हें अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे।

आचार्यों ने यह भी कहा कि परीक्षा विद्यार्थियों के ज्ञान और परिश्रम को परखने का अवसर होती है। इसलिए आवश्यक है कि विद्यार्थी पूरे आत्मविश्वास और ईमानदारी के साथ अपने उत्तर लिखें।

अभिभावकों से सहयोग की अपील

विद्यालय प्रशासन ने अभिभावकों से भी सहयोग की अपील की है। उनसे आग्रह किया गया है कि वे अपने बच्चों को समय पर विद्यालय भेजें और घर में पढ़ाई के लिए सकारात्मक वातावरण प्रदान करें।

विद्यालय परिवार का मानना है कि विद्यार्थियों की सफलता में अभिभावकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि घर और विद्यालय दोनों का सहयोग मिले तो विद्यार्थी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

विद्यालय प्रशासन ने यह विश्वास व्यक्त किया है कि विद्यार्थियों की मेहनत, आचार्यों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग से इस वर्ष की वार्षिक परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न होगी और बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

न्यूज़ देखो: अनुशासन और तैयारी से ही बनता है बेहतर परिणाम

केतुंगाधाम स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में वार्षिक परीक्षा को लेकर की गई तैयारी यह दर्शाती है कि शिक्षा संस्थान विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर हैं। जब विद्यालय प्रशासन, शिक्षक और अभिभावक मिलकर जिम्मेदारी निभाते हैं तो शिक्षा का वातावरण और मजबूत बनता है। अनुशासित और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाती है और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विद्यार्थी अपनी मेहनत को किस तरह उत्कृष्ट परिणाम में बदलते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मेहनत और अनुशासन से ही बनता है उज्ज्वल भविष्य

परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि सीखने और आगे बढ़ने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यदि विद्यार्थी पूरे वर्ष मेहनत और अनुशासन के साथ पढ़ाई करें तो सफलता निश्चित होती है।

आज की मेहनत ही आने वाले कल की सफलता का आधार बनती है। इसलिए हर विद्यार्थी को आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ अपनी परीक्षा देनी चाहिए।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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