
#बिश्रामपुर #महानिर्वाण_दिवस : अघोरेश्वर महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भक्तों ने किया सामूहिक पूजन।
पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड अंतर्गत गुरी ग्राम में अघोरेश्वर महाराज का प्रथम पदार्पण दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया। सर्वेश्वरी समूह प्रार्थना गृह में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। आयोजन की अध्यक्षता रंजित सिंह ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त शिक्षक सुभाष कौशिक उपस्थित रहे। भक्ति गीतों और सम्मान समारोह के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
- गुरी ग्राम के सर्वेश्वरी समूह प्रार्थना गृह में प्रथम पदार्पण दिवस आयोजन।
- अध्यक्षता रंजित सिंह, संचालन संजित मिश्रा ने किया।
- मुख्य अतिथि सुभाष कौशिक ने अघोरेश्वर महाराज के जीवन पर डाला प्रकाश।
- श्रद्धालुओं ने चित्र पर पुष्प अर्पित कर सामूहिक पूजा की।
- कई गणमान्य नागरिक एवं सर्वेश्वरी समूह के सदस्य रहे उपस्थित।
विश्रामपुर प्रखंड के गुरी पंचायत अंतर्गत गुरी ग्राम में मंगलवार को अघोरेश्वर महाराज का प्रथम पदार्पण दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक माहौल के बीच मनाया गया। सर्वेश्वरी समूह प्रार्थना गृह, जो संजित मिश्रा के आवास परिसर में स्थित है, में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। प्रार्थना गृह भक्ति गीतों से गूंजता रहा और श्रद्धालुओं ने गुरु महिमा का गुणगान किया।
प्रार्थना गृह में हुआ सामूहिक पूजन
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान अघोरेश्वर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर, धूप-दीप जलाकर एवं फूलमाला चढ़ाकर की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने अपने परिवार और समाज की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की।
कार्यक्रम के दौरान “तीन लोक नवखंड में गुरु से बड़ा न कोय” और “हे अघोरेश्वर हे भगवान” जैसे भक्ति भाव से ओतप्रोत जयघोषों से पूरा परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा की महिमा का स्मरण करते हुए सामूहिक भजन-कीर्तन में भाग लिया।
अध्यक्षता और अतिथियों के संबोधन
कार्यक्रम की अध्यक्षता रेहला के सुप्रसिद्ध धर्मरक्षक रंजित सिंह ने की, जबकि मंच संचालन संजित मिश्रा ने किया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सेवानिवृत्त शिक्षक सुभाष कौशिक ने अपने संबोधन में कहा:
“भगवान अघोरेश्वर ने 12 वर्ष की आयु से ही ईश्वर की खोज में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका जीवन त्याग, साधना और मानव कल्याण का प्रतीक है।”
अध्यक्षता कर रहे रंजित सिंह ने कहा:
“यह सौभाग्य की बात है कि भगवान अघोरेश्वर के अनुयायी आज भी उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं और अपना जीवन समर्पित करते हैं।”
संचालन कर रहे संजित मिश्रा ने अपने विचार रखते हुए कहा:
“ईश्वर की खोज कोई साधारण कार्य नहीं है। भक्ति मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और भगवान अघोरेश्वर की शरण ही कल्याण का मार्ग है।”
आध्यात्मिक वातावरण और सम्मान समारोह
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। बीच-बीच में भक्ति संगीत की धुनें वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना रही थीं। श्रद्धालुओं ने गुरु के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
बताया गया कि 10 फरवरी 2022 को इस स्थान पर भगवान अघोरेश्वर के आगमन की स्मृति में यहां भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि जहां-जहां उनके चरण पड़े, वह भूमि पवित्र हो गई।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित
कार्यक्रम में जयराम मिश्रा, राधेश्याम मिश्रा, हक्कानी राम, चंद्रदेव राम, राम लखन पांडेय, जवाहिर साव, हीरालाल गुप्ता, नारायण विश्वकर्मा, गणेश साव, बिनोद पांडेय, सतेंद्र मिश्रा, गुरुपद संभव राम बाबा, सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष वृजभूषण पाठक, सुमंत पाठक, रांची से बिनोद राम, दिलीप कुमार, बीरबल राम सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर गुरु की महिमा का स्मरण किया और समाज में प्रेम, सद्भाव और भक्ति का संदेश फैलाने का संकल्प लिया।

न्यूज़ देखो: आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बना आयोजन
गुरी ग्राम में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक भी रहा। स्थानीय स्तर पर ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा देने का कार्य करते हैं। गुरु परंपरा के माध्यम से नैतिक मूल्यों और आस्था को मजबूत करने का प्रयास सराहनीय है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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