
#लातेहार #कृषि_प्रशिक्षण : जिला स्तरीय कार्यशाला में डिजिटल फसल कटनी प्रक्रिया पर जोर दिया गया।
लातेहार जिला मुख्यालय में कृषि सांख्यिकी और फसल कटनी प्रयोग को लेकर जिला स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें GCES PMFBY मोबाइल ऐप के माध्यम से फसल कटनी को डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला सांख्यिकी पदाधिकारी समीर कुल्लू ने की। प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मियों ने भाग लिया।
- लातेहार जिला मुख्यालय में आयोजित हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- समीर कुल्लू की अध्यक्षता में संपन्न हुई कार्यशाला।
- GCES PMFBY मोबाइल ऐप से फसल कटनी को डिजिटल बनाने पर जोर।
- कृषि सांख्यिकी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण।
- कई विभागों के अधिकारी व कर्मियों की सहभागिता।
लातेहार जिला मुख्यालय स्थित उपविकास आयुक्त सभागार में सोमवार को कृषि क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य कृषि सांख्यिकी प्रणाली को मजबूत करना और फसल कटनी प्रयोग को डिजिटल माध्यम से अधिक पारदर्शी बनाना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला सांख्यिकी पदाधिकारी समीर कुल्लू ने की। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि कृषि सांख्यिकी देश की नीतियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है, इसलिए इससे जुड़े सभी प्रतिवेदन समय पर और सटीक तरीके से तैयार करना बेहद आवश्यक है।
कृषि सांख्यिकी की भूमिका पर दिया गया जोर
प्रशिक्षण के दौरान जिला सांख्यिकी पदाधिकारी समीर कुल्लू ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि से जुड़े आंकड़े सरकार की योजनाओं और नीतियों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए संबंधित अधिकारियों को अपने कार्य में गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ योगदान देना चाहिए।
समीर कुल्लू ने कहा: “कृषि सांख्यिकी के सही और समयबद्ध आंकड़े ही नीति निर्माण को सशक्त बनाते हैं, इसलिए सभी प्रतिवेदन समय पर उपलब्ध कराना आवश्यक है।”
उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान एकाग्रता बनाए रखने और सीखी गई जानकारियों को व्यवहार में लागू करने का निर्देश दिया।
GCES PMFBY ऐप से डिजिटल होगा फसल कटनी प्रयोग
कार्यशाला का मुख्य आकर्षण GCES PMFBY मोबाइल ऐप के माध्यम से फसल कटनी प्रयोग को डिजिटल रूप देने की प्रक्रिया रही। मास्टर ट्रेनर राहुल कुमार गुप्ता ने पीपीटी और वीडियो के माध्यम से इस ऐप के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से फसल कटनी प्रयोग को अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा सकेगा। इससे किसानों को भी लाभ मिलेगा और डेटा संग्रहण की प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी।
विभिन्न विषयों पर दिया गया विस्तृत प्रशिक्षण
मास्टर ट्रेनर राहुल कुमार गुप्ता ने कृषि सांख्यिकी के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की। इसमें द्रुत और सामान्य जिंसवार आंकड़े, खेसरा पंजी, फसल कटनी प्रयोग, प्रक्षेत्र मूल्य, कृषि श्रमिक मजदूरी तथा कृषकों के क्रय-विक्रय मूल्य प्रतिवेदन शामिल रहे।
प्रशिक्षण के दौरान इन सभी विषयों को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया, जिससे प्रतिभागियों को बेहतर तरीके से जानकारी प्राप्त हो सके।
राहुल कुमार गुप्ता ने कहा: “डिजिटल माध्यम से फसल कटनी प्रयोग न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि आंकड़ों की गुणवत्ता में भी सुधार करेगा।”
अधिकारियों और कर्मियों की रही सक्रिय भागीदारी
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उप निदेशक आत्मा, सभी अंचल निरीक्षक, प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, सहायक तकनीकी प्रबंधक, जनसेवक एवं राजस्व उप निरीक्षक सहित कई विभागों के अधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे।
सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग लिया और नई तकनीकों को समझने में रुचि दिखाई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को लेकर प्रशासन गंभीर है।
न्यूज़ देखो: डिजिटल खेती की ओर बढ़ता लातेहार
लातेहार में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। GCES PMFBY ऐप के उपयोग से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि किसानों को भी सही आंकड़ों के आधार पर लाभ मिल सकेगा। हालांकि, यह जरूरी है कि प्रशिक्षण के बाद इसका प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाए। क्या यह पहल जमीनी स्तर पर बदलाव ला पाएगी, इस पर नजर बनी रहेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
तकनीक से जुड़ेगा किसान, तभी बदलेगी खेती की तस्वीर
आज के दौर में तकनीक के बिना विकास संभव नहीं है। कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव किसानों के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बना सकता है।
जरूरी है कि हम सभी नई तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार रहें और किसानों तक इसकी जानकारी पहुंचाने में सहयोग करें। जागरूकता ही बदलाव की पहली सीढ़ी है।
आप भी इस तरह की पहल को समर्थन दें, अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें और इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाकर जागरूकता फैलाने में भागीदार बनें।






