थोलकोबेडा गांव में अष्टप्रहरी हरि कीर्तन यज्ञ संपन्न, शांति और जागरूकता का दिखा नया माहौल

थोलकोबेडा गांव में अष्टप्रहरी हरि कीर्तन यज्ञ संपन्न, शांति और जागरूकता का दिखा नया माहौल

author Shivnandan Baraik
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#बानो #सिमडेगा #धार्मिक_आयोजन : उग्रवाद प्रभावित गांव में यज्ञ के जरिए सामाजिक बदलाव की झलक दिखी।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड के थोलकोबेडा गांव में दो दिवसीय अष्टप्रहरी हरि कीर्तन यज्ञ का आयोजन किया गया। कभी उग्रवाद की चपेट में रहे इस गांव में अब शांति और जागरूकता का माहौल देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों ने वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-शांति की कामना की। आयोजन में आसपास के गांवों की भी सक्रिय भागीदारी रही।

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  • थोलकोबेडा गांव, बानो में अष्टप्रहरी हरि कीर्तन यज्ञ संपन्न।
  • कभी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र, अब दिख रही शांति और जागरूकता।
  • दो दिवसीय आयोजन में ग्रामीणों ने किया सामूहिक भजन-कीर्तन
  • बडकेतुंगा, लोटवा, रामजडी, छोटकाटोली से कीर्तन मंडली की भागीदारी।
  • गांव में अब भी सड़क और विकास की कमी, प्रशासन से लगाई उम्मीद।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत थोलकोबेडा गांव में दो दिवसीय अष्टप्रहरी हरि कीर्तन यज्ञ का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जागरूकता की एक नई मिसाल भी प्रस्तुत करता नजर आया।

यह वही गांव है जहां कभी उग्रवादियों की गोलियों की आवाज गूंजती थी और लोग भय के साए में जीवन जीने को मजबूर थे। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। गांव में शांति का वातावरण स्थापित हो रहा है और लोग शिक्षा व विकास की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

वैदिक विधि-विधान से हुआ यज्ञ अनुष्ठान

इस अष्टप्रहरी यज्ञ का आयोजन पूरे वैदिक विधि-विधान के साथ किया गया। दो दिनों तक लगातार चले इस धार्मिक कार्यक्रम में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

ढोल, मंजीरा और भक्ति गीतों के साथ गांव में “हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे” और “हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे” के जयघोष गूंजते रहे।

ग्रामीणों ने कहा: “हम अपने गांव की सुख-शांति और समृद्धि के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं, ताकि हमारा जीवन बेहतर हो सके।”

आसपास के गांवों की रही भागीदारी

इस आयोजन में केवल थोलकोबेडा ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के लोग भी शामिल हुए। बडकेतुंगा, लोटवा, रामजडी और छोटकाटोली गांवों की कीर्तन मंडलियों ने भी अपनी सहभागिता निभाई।

इससे आयोजन में और अधिक उत्साह और भक्ति का वातावरण बना रहा।

उग्रवाद से विकास की ओर बढ़ते कदम

थोलकोबेडा गांव का यह परिवर्तन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां पहले लोग भयभीत रहते थे, वहीं अब वे शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि अब वे अपने बच्चों को पढ़ाकर बेहतर भविष्य देना चाहते हैं और मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं।

अब भी विकास की जरूरत

हालांकि गांव में जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी बनी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि आज भी गांव में सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव है।

लोगों ने प्रखंड प्रशासन से मांग की है कि वे गांव का दौरा कर समस्याओं को समझें और उन्हें दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएं।

ग्रामीणों ने जताई उम्मीद

गांव के लोगों को उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेंगे और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास करेंगे।

इस आयोजन में भुवनेश्वर सिंह, कृष्णा सिंह, केदारनाथ सिंह सहित गांव के कई लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनके सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

न्यूज़ देखो: बदलाव की ओर बढ़ता गांव, अब प्रशासन की जिम्मेदारी

थोलकोबेडा गांव का यह उदाहरण दिखाता है कि जब समाज खुद जागरूक होता है, तो बदलाव संभव होता है। उग्रवाद से निकलकर शांति और विकास की ओर बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है। अब जरूरत है कि प्रशासन भी आगे बढ़कर इस बदलाव को मजबूती दे और गांव की मूलभूत समस्याओं का समाधान करे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बदलाव की इस पहल को आगे बढ़ाएं

जब गांव जागरूक होता है, तो विकास की राह खुद बनती है।

हमें ऐसे प्रयासों को सराहना चाहिए और उन्हें और मजबूत बनाना चाहिए।

आइए, हम सब मिलकर ऐसे गांवों के विकास के लिए आवाज उठाएं और सकारात्मक बदलाव का हिस्सा बनें।

आप भी अपनी राय कमेंट में जरूर दें, खबर को शेयर करें और जागरूकता फैलाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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