#बरवाडीह #निर्माण_अनियमितता : गुणवत्ता में कमी के आरोप पर ग्रामीणों ने रुकवाया कार्य।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड के अमाही गांव स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय में चारदीवारी निर्माण कार्य पर अनियमितता के आरोप लगे हैं। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ने गुणवत्ता में कमी का हवाला देते हुए कार्य को रुकवा दिया। ग्रामीणों ने भी निर्माण में मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। फिलहाल निर्माण कार्य बंद है और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।
- अमाही गांव के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय में चारदीवारी निर्माण पर विवाद।
- विद्यालय प्रबंधन समिति अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने कार्य रुकवाया।
- निर्माण में मानक के अनुरूप सरिया उपयोग नहीं होने का आरोप।
- कॉलम में 16 एमएम और 12 एमएम सरिया मिश्रित इस्तेमाल पर उठे सवाल।
- ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
बरवाडीह प्रखंड के छेंचा पंचायत अंतर्गत अमाही गांव स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय में चल रहे चारदीवारी निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहरा गया है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी के आरोप सामने आने के बाद रविवार को विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भी आक्रोश देखा जा रहा है और मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चारदीवारी का निर्माण कार्य कराया जा रहा था। लेकिन निर्माण के दौरान ही इसमें गड़बड़ी की शिकायतें सामने आने लगीं।
विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में तय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह कार्य जारी रहा, तो भविष्य में दीवार कमजोर साबित हो सकती है, जिससे विद्यालय के बच्चों और परिसर की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
सरिया की गुणवत्ता पर उठे सवाल
राजेंद्र सिंह ने विस्तार से बताते हुए कहा कि चारदीवारी के बीम में निर्धारित मानक के अनुसार सरिया का उपयोग नहीं किया गया है। वहीं कॉलम में भी अलग-अलग प्रकार के स्टील का इस्तेमाल किया गया है।
उनके अनुसार:
“कॉलम में दो 16 एमएम और दो 12 एमएम के सरिया का उपयोग किया गया है, जो मानक के अनुरूप नहीं है। इससे निर्माण की मजबूती पर सवाल उठते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की अनियमितता से भवन की गुणवत्ता और दीर्घकालिक मजबूती दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
अभियंता की अनुपस्थिति पर भी सवाल
मामले को लेकर संबंधित अभियंता से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान अभियंता की उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
राजेंद्र सिंह ने कहा:
“निर्माण कार्य अभियंता की निगरानी में ही होना चाहिए। बिना तकनीकी देखरेख के काम होने से गड़बड़ी की संभावना बढ़ जाती है।”
ग्रामीणों का विरोध और जांच की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं में इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
ग्रामीणों के अनुसार:
- निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है
- कार्य में पारदर्शिता की कमी है
- गुणवत्ता से समझौता कर सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।
फिलहाल कार्य बंद, कार्रवाई का इंतजार
विवाद बढ़ने के बाद फिलहाल चारदीवारी निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
स्थानीय लोगों की मांग है कि:
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो
- दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो
- मानकों के अनुरूप दोबारा निर्माण कार्य कराया जाए
न्यूज़ देखो: गुणवत्ता से समझौता क्यों
यह मामला एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है। जब स्कूल जैसे संवेदनशील स्थानों पर भी मानकों की अनदेखी होती है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। क्या निगरानी तंत्र सही तरीके से काम कर रहा है? क्या अभियंताओं की जिम्मेदारी तय होगी? प्रशासन को इस मामले में पारदर्शी जांच कर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जिम्मेदारी निभाएं, विकास को सही दिशा दें
सरकारी योजनाएं जनता के हित के लिए होती हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
अगर कहीं भी गड़बड़ी दिखे, तो आवाज उठाना जरूरी है।
जागरूक नागरिक बनकर ही हम अपने गांव और समाज को बेहतर बना सकते हैं।
आइए, मिलकर पारदर्शिता और जवाबदेही की संस्कृति को मजबूत करें।
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