#बरवाडीह #तालाब_अनियमितता : निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ा।
बरवाडीह प्रखंड के केचकी स्थित देनदाहा तालाब के जीर्णोद्धार कार्य में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बांध मरम्मत और पिचिंग कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है। खराब सामग्री के उपयोग से भविष्य में बांध टूटने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
- केचकी के देनदाहा तालाब के जीर्णोद्धार में गड़बड़ी के आरोप।
- बांध मरम्मत और पिचिंग कार्य में मानकों की अनदेखी की शिकायत।
- मृत पत्थरों के उपयोग से मजबूती पर उठे सवाल।
- करीब 9 गांव प्रभावित हो सकते हैं, बांध टूटने का खतरा।
- योजना बोर्ड नहीं लगाए जाने से पारदर्शिता पर सवाल।
बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत केचकी स्थित देनदाहा तालाब के जीर्णोद्धार कार्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि तालाब के बांध मरम्मत और पिचिंग कार्य में गंभीर अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे न केवल निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है बल्कि भविष्य में बड़े खतरे की आशंका भी बढ़ गई है।
निर्माण कार्य में बरती जा रही लापरवाही
ग्रामीणों के अनुसार, तालाब के बांध की मरम्मत आधे-अधूरे तरीके से की जा रही है। जहां पहले मजबूत आधार तैयार किया जाना चाहिए था, वहां सीधे पिचिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। इससे बांध की संरचना कमजोर हो रही है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पिचिंग कार्य में मृत और कमजोर पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जो पानी के दबाव को झेलने में सक्षम नहीं हैं। इससे बांध के टूटने की आशंका बढ़ गई है।
कई गांवों पर मंडरा रहा खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि देनदाहा तालाब में आसपास के लगभग नौ गांवों का पानी आकर जमा होता है। ऐसे में यदि बांध कमजोर बना, तो इसके टूटने से भारी तबाही मच सकती है।
संभावित प्रभावित क्षेत्रों में हड़पड़वा पेट्रोल पंप, केचकी रेलवे स्टेशन, पहाड़ी टोली, कंचनपुर और केचकी सहित करीब सात गांव शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र बाढ़ जैसी स्थिति का सामना कर सकता है।
पारदर्शिता पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माण स्थल पर किसी प्रकार का योजना बोर्ड नहीं लगाया गया है। इससे योजना की लागत, संवेदक का नाम, कार्य अवधि जैसी महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पा रही है।
यह स्थिति न केवल पारदर्शिता पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही को भी उजागर करती है।
जिम्मेदारी से बचते दिखे संबंधित कर्मी
निर्माण कार्य स्थल पर मौजूद मुंशी ने पूछताछ के दौरान बताया कि वे केवल संवेदक के निर्देश पर काम कर रहे हैं। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति ही अनियमितताओं को बढ़ावा देती है।
एक ग्रामीण ने कहा: “अगर अभी ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर यह बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।”
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को भी मजबूर होंगे।

न्यूज़ देखो: विकास कार्यों में लापरवाही कब रुकेगी?
देनदाहा तालाब का मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर विकास कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी आम बात बनती जा रही है। ऐसे निर्माण कार्य, जो जनता की सुरक्षा से जुड़े हैं, उनमें लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करे। आखिर कब तक जनता इस तरह की अनियमितताओं का खामियाजा भुगतती रहेगी? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक बनें, अपनी आवाज उठाएं और विकास को सही दिशा दें
सार्वजनिक योजनाएं जनता के हित के लिए होती हैं, इसलिए उनकी निगरानी भी जनता की जिम्मेदारी है।
यदि कहीं गड़बड़ी दिखे तो चुप न रहें, बल्कि संबंधित अधिकारियों तक अपनी बात जरूर पहुंचाएं।
आपकी एक पहल बड़े हादसे को टाल सकती है और व्यवस्था को बेहतर बना सकती है।
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