
#हुसैनाबाद #पीएमआवासविवाद : जांच में सही पाए गए आवेदक—कब्जा दिलाने को प्रशासन से गुहार।
पलामू के हुसैनाबाद प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घर पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। पीड़ित श्याम नारायण पाल परिवार सहित झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। जांच में आवास उन्हीं के नाम होने की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद कब्जा नहीं दिलाए जाने से पीड़ित ने उच्च अधिकारियों से न्याय की मांग की है।
- लोटनिया टोला पिपरडिह में पीएम आवास पर कब्जे का मामला।
- पीड़ित श्याम नारायण पाल परिवार सहित झोपड़ी में रह रहे।
- जांच में आवास श्याम नारायण के नाम सही पाया गया।
- सत्येन्द्र पाल पर अवैध कब्जे का आरोप।
- पीड़ित ने प्रशासन से कब्जा दिलाने की मांग की।
पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड के लोटनिया गांव के पिपरडिह टोला में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घर पर अवैध कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित श्याम नारायण पाल अपनी पत्नी और बच्चों के साथ झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं और न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
2019-20 में मिला था आवास
जानकारी के अनुसार, श्याम नारायण पाल को वर्ष 2019-20 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर आवंटित किया गया था। उन्होंने सरकारी राशि का उपयोग कर मकान का निर्माण कराया।
पीड़ित ने कहा: “हमने मेहनत से घर बनाया, लेकिन अब हमें ही बेघर कर दिया गया है।”
परिवार के भीतर ही विवाद
पीड़ित का आरोप है कि उनके भाई सत्येन्द्र पाल और छोटे पुत्र ने मिलकर मारपीट कर उन्हें घर से बाहर कर दिया और आवास पर कब्जा कर लिया।
इस कारण पूरा परिवार अब झोपड़ी में रहने को विवश है।
जांच में स्पष्ट हुआ अधिकार
इस मामले में हुसैनाबाद अनुमंडल पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा जांच कर यह स्पष्ट किया गया कि आवास श्याम नारायण पाल के नाम से ही आवंटित है।
बीडीओ सुनील कुमार वर्मा की रिपोर्ट में भी कहा गया कि—
“दस्तावेजों के अनुसार आवास श्याम नारायण पाल का है और उस पर किया गया कब्जा गैर-कानूनी है।”
दस्तावेजों से मिला प्रमाण
पीड़ित द्वारा प्रस्तुत बैंक खाते में प्राप्त अनुदान राशि, खर्च और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों से यह साबित हुआ कि आवास का निर्माण उन्होंने ही कराया है।
कब्जा हटाने में प्रशासनिक देरी
जांच में स्पष्ट होने के बावजूद अब तक आवास का कब्जा पीड़ित को नहीं दिलाया गया है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि कब्जा दिलाने के लिए पुलिस बल की आवश्यकता है।
जांच दल ने कहा: “स्थिति को देखते हुए महिला बल सहित पुलिस की प्रतिनियुक्ति जरूरी है।”
प्रशासन पर उठे सवाल
इस मामले में कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि स्पष्ट रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई नहीं होना गंभीर लापरवाही है।
पीड़ित की गुहार
श्याम नारायण पाल ने उच्च अधिकारियों से न्याय की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें उनका हक दिलाया जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सामाजिक और कानूनी सवाल
यह मामला केवल पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि सरकारी योजना के दुरुपयोग और कानून व्यवस्था का भी मुद्दा बन गया है।
न्यूज़ देखो: योजना का लाभ या अन्याय?
हुसैनाबाद का यह मामला दिखाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचना कितना जरूरी है। जब जांच में सब स्पष्ट हो चुका है, तब भी कार्रवाई न होना गंभीर प्रशासनिक चूक है। अब देखना होगा कि पीड़ित को कब न्याय मिलता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपने अधिकार के लिए आवाज उठाएं
सरकारी योजना आपका अधिकार है, इसे छीनने नहीं दें।
अगर कहीं अन्याय हो रहा है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाएं।
जागरूकता और साहस ही न्याय दिला सकते हैं।
आइए, हम सभी मिलकर अन्याय के खिलाफ खड़े हों।
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