गिरिडीह में बालमुकुंद फैक्ट्री पर सड़क अतिक्रमण का आरोप, माले नेताओं ने प्रशासन से तत्काल जांच की मांग उठाई

गिरिडीह में बालमुकुंद फैक्ट्री पर सड़क अतिक्रमण का आरोप, माले नेताओं ने प्रशासन से तत्काल जांच की मांग उठाई

author Surendra Verma
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#गिरिडीह #सड़क_अतिक्रमण : फैक्ट्री पर ग्रामीण मार्ग घेरने और आवागमन बाधित करने का आरोप लगा।

गिरिडीह के मुफ्फसिल क्षेत्र में स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री पर ग्रामीण सड़क के बड़े हिस्से पर कब्जा करने का आरोप सामने आया है। माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि पिछले 20 दिनों से सड़क का अधिकांश हिस्सा घेरकर भारी वाहन खड़े किए गए हैं। इस वजह से स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। मामले को लेकर प्रशासन से जांच की मांग की गई है और उच्च स्तर पर शिकायत करने की तैयारी भी चल रही है।

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  • गिरिडीह मुफ्फसिल क्षेत्र में स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री पर सड़क कब्जाने का आरोप।
  • पिछले 20 दिनों से 60% ग्रामीण रास्ता घेरने की बात कही गई।
  • सड़क पर भारी वाहनों की पार्किंग से आवागमन प्रभावित।
  • माले नेता राजेश सिन्हा ने प्रशासन से जांच की मांग उठाई।
  • कन्हाई पांडेय, सनातन साहू, हुबलाल पर मुकदमे का भी आरोप।
  • अगले माह श्रम मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल को आवेदन देने की तैयारी।

गिरिडीह जिले के मुफ्फसिल क्षेत्र में एक बार फिर सड़क अतिक्रमण और औद्योगिक गतिविधियों को लेकर विवाद सामने आया है। भाकपा माले के नेताओं ने बालमुकुंद फैक्ट्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने ग्रामीण सड़क के बड़े हिस्से को कब्जा कर लिया है। इससे स्थानीय लोगों को रोजाना आवाजाही में परेशानी हो रही है और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

सड़क अतिक्रमण को लेकर माले का आरोप

माले नेता राजेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि बालमुकुंद फैक्ट्री प्रबंधन पिछले करीब 20 दिनों से ग्रामीण सड़क के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा जमाए हुए है। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री के बड़े वाहन सड़क पर खड़े कर दिए गए हैं, जिससे आम लोगों का आना-जाना बाधित हो रहा है।

राजेश सिन्हा ने कहा: “मानता हूं फैक्ट्री में कुछ खराबियां होंगी, प्रदूषण को बढ़ा रहा होगा, लेकिन जीएम की रईसी की चर्चा जोरों पर है। क्या जिला प्रशासन को रोड अतिक्रमण का पता नहीं? अगर नहीं पता तो यह गैर जिम्मेदाराना मामला है, प्रशासन इसकी तत्काल जांच करे।”

उन्होंने यह भी कहा कि सड़क सार्वजनिक संपत्ति है और इस तरह का अतिक्रमण सीधे तौर पर आम लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

लोगों की परेशानी बढ़ी, प्रशासन पर सवाल

स्थानीय लोगों को इस स्थिति के कारण रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क का बड़ा हिस्सा घिर जाने से पैदल यात्रियों, साइकिल और छोटे वाहनों के लिए रास्ता बेहद संकरा हो गया है।

माले नेताओं का कहना है कि इतनी बड़ी समस्या के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रशासन को इस अतिक्रमण की जानकारी है या नहीं।

मजदूर नेताओं ने भी लगाए गंभीर आरोप

मामले में जिला कमेटी सदस्य और मजदूर नेता कन्हाई पांडेय ने भी फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बालमुकुंद फैक्ट्री का रवैया हमेशा से मजदूरों और विरोध करने वाले नेताओं के प्रति नकारात्मक रहा है।

कन्हाई पांडेय ने कहा: “बालमुकुंद फैक्ट्री का रवैया पब्लिक, विरोध करने वाले नेताओं और मजदूरों के साथ कभी अच्छा नहीं रहा। कोई वार्ता करने जाता है तो प्रबंधन मुकदमे की धमकी देता है। हाल में मुझ पर, सनातन साहू और हुबलाल जी पर मुकदमा दायर किया गया, अभी हाल में ही बेल मिली है।”

उन्होंने बताया कि फैक्ट्री मजदूरों के बल पर काम करती है, लेकिन उनके अधिकारों और समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता है। प्रदूषण और श्रमिक अधिकारों के मुद्दे उठाने वालों पर भी लगातार कार्रवाई की जाती रही है।

न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेने की तैयारी

कन्हाई पांडेय ने कहा कि इस पूरे मामले में अब न्यायालय का सहारा लिया जा रहा है। उनका मानना है कि जांच के दौरान सच्चाई सामने आएगी और आरोपों की पुष्टि होगी।

कन्हाई पांडेय ने कहा: “जिला प्रशासन के पास सीसीटीवी फुटेज का रिकॉर्ड होगा। जांच होगी ही, प्रबंधन को मुंह की खानी पड़ेगी। आरोप झूठा साबित होगा, लेकिन अब न्यायालय का सहारा लिया जा रहा है, निश्चित न्याय मिलना तय है।”

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो मामला और बड़े स्तर पर उठाया जाएगा।

उच्च स्तर पर शिकायत की तैयारी

माले नेताओं ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे को लेकर वे चुप नहीं बैठेंगे। राजेश सिन्हा ने कहा कि अगले महीने इस मामले को लेकर झारखंड के श्रम मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल को आवेदन दिया जाएगा।

इससे साफ है कि मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर राज्य स्तर तक पहुंचने वाला है, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है।

न्यूज़ देखो: सड़क अतिक्रमण और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल

यह मामला केवल एक फैक्ट्री या सड़क अतिक्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। अगर वास्तव में सड़क का इतना बड़ा हिस्सा घेर लिया गया है, तो यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है। प्रशासन को चाहिए कि वह निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाए और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही यह भी देखना होगा कि मजदूरों और स्थानीय लोगों की समस्याओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक नागरिक बनें, अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं

सड़क, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक का अधिकार हैं और इन पर किसी का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। अगर आपके आसपास भी ऐसी कोई समस्या है तो उसे नजरअंदाज न करें, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों तक बात पहुंचाएं।

लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे बड़ी ताकत होती है। जब लोग एकजुट होकर सवाल उठाते हैं, तभी व्यवस्था में सुधार संभव होता है। अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझें और समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

आपकी एक पहल कई लोगों की परेशानी दूर कर सकती है। इसलिए सजग रहें, सवाल पूछें और सही के साथ खड़े हों।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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