
#सिमडेगा #शहीद_दिवस : महात्मा गांधी की शहादत को स्मरण कर सत्य और अहिंसा का संदेश।
सिमडेगा स्थित संत जेवियर्स कॉलेज में 30 जनवरी को महात्मा गांधी के शहादत दिवस पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कॉलेज के सेमिनार हॉल में हुए इस आयोजन में शिक्षकों, छात्रों और अतिथियों ने राष्ट्रपिता को नमन किया। राजनीति विज्ञान, इतिहास विभाग तथा एनएसएस और एनसीसी इकाई के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को गांधी जी के सत्य, अहिंसा और त्याग के मूल्यों से जोड़ना रहा।
- 30 जनवरी को संत जेवियर्स कॉलेज में शहीद दिवस का आयोजन।
- राजनीति विज्ञान, इतिहास विभाग, एनएसएस व एनसीसी का संयुक्त आयोजन।
- डॉ. फादर समीर ज़ेवियर भौंरा और डॉ. फादर नबौर लकड़ा रहे मुख्य अतिथि।
- डॉ. जयंन्त के. कश्यप विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित।
- महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि और दो मिनट का मौन।
- छात्रों ने शांति, अहिंसा और राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।
सिमडेगा जिले के प्रतिष्ठित संत जेवियर्स कॉलेज में शहीद दिवस के अवसर पर गंभीर और प्रेरणादायक वातावरण देखने को मिला। 30 जनवरी को आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में महात्मा गांधी के बलिदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम कॉलेज के सेमिनार हॉल में संपन्न हुआ, जहां शिक्षक, छात्र और अतिथि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन का उद्देश्य गांधी जी के विचारों को वर्तमान संदर्भ में समझना और उन्हें जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
श्रद्धांजलि के साथ कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके पश्चात उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रपिता की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यह क्षण अत्यंत भावपूर्ण रहा, जिसमें पूरे सभागार में शांति और सम्मान का वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी का बलिदान केवल इतिहास की घटना नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए भी मार्गदर्शक है। उनके द्वारा प्रतिपादित सत्य और अहिंसा के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता आंदोलन के समय थे।
अतिथियों के विचार और संदेश
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. फादर समीर ज़ेवियर भौंरा और डॉ. फादर नबौर लकड़ा उपस्थित रहे। वहीं आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. जयंन्त के. कश्यप विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। अतिथियों ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के जीवन और विचारों पर प्रकाश डाला।
डॉ. फादर समीर ज़ेवियर भौंरा ने कहा:
“महात्मा गांधी का जीवन सत्य, अहिंसा और त्याग का जीवंत उदाहरण है। आज के युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है।”
डॉ. फादर नबौर लकड़ा ने गांधी जी के विचारों को वैश्विक संदर्भ में रखते हुए बताया कि शांति और अहिंसा ही स्थायी समाधान का मार्ग है। वहीं डॉ. जयंन्त के. कश्यप ने कहा कि शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों में नैतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करें।
शिक्षकों की सहभागिता और प्रेरणा
कार्यक्रम में कॉलेज के कई शिक्षक उपस्थित रहे, जिनमें प्रो. ईशान तिरु, डॉ. निशा रानी धनवार (एनएसएस समन्वयक), प्रो. रोशन के. गिध (एनसीसी एएनओ), अजय कुमार, प्रो. सनी संतोष टोप्पो, प्रो. शशि ज्योति बक्सला, प्रो. अर्चना सेफाली तथा प्रो. पुष्प लता कुजूर शामिल थे।
सभी शिक्षकों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि गांधी जी के आदर्श केवल भाषणों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सत्य, अहिंसा, सहिष्णुता और सेवा भाव को अपने आचरण का हिस्सा बनाएं।
छात्रों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में छात्रों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। छात्रों ने गांधी जी के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और शांति, अहिंसा तथा राष्ट्र सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कई छात्रों ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती हिंसा और असहिष्णुता के बीच गांधी जी के विचार और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्र निर्माण में महात्मा गांधी के योगदान को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरे आयोजन ने छात्रों और शिक्षकों को आत्ममंथन का अवसर दिया और कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
न्यूज़ देखो: युवाओं को गांधी विचारों से जोड़ने की सार्थक पहल
संत जेवियर्स कॉलेज में आयोजित यह कार्यक्रम दर्शाता है कि शैक्षणिक संस्थान किस प्रकार राष्ट्रीय स्मृति और मूल्यों को जीवंत बनाए रख सकते हैं। गांधी जी के विचारों पर आधारित ऐसे आयोजन युवाओं में नैतिकता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित करते हैं। यह पहल यह भी याद दिलाती है कि राष्ट्र निर्माण केवल नीतियों से नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण से होता है। आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच को मजबूत कर सकते हैं।
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गांधी के रास्ते पर चलकर ही मजबूत होगा राष्ट्र
शहीद दिवस का यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर बना। जब युवा सत्य और अहिंसा के मूल्यों को अपनाते हैं, तभी एक शांत और समावेशी समाज का निर्माण संभव होता है।
आज जरूरत है कि हम महात्मा गांधी के विचारों को शब्दों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार में उतारें। शांति, सहिष्णुता और सेवा का संकल्प लें।







