
#सिमडेगा #विदाई_समारोह : संत अन्ना स्कूल में दसवीं व बारहवीं छात्रों को भावभीनी विदाई।
सिमडेगा के संत अन्ना हाई स्कूल सह प्लस टू इंटर कॉलेज सामटोली में दसवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए विदाई समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि युवा समाजसेवी भरत प्रसाद ने विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों और संघर्ष की सीख दी। समारोह में शिक्षकों, अतिथियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता रही। यह आयोजन छात्रों के शैक्षणिक जीवन में एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक बना।
- संत अन्ना स्कूल सामटोली में दसवीं व बारहवीं के छात्रों का विदाई समारोह।
- भरत प्रसाद मुख्य अतिथि और कुश बड़ाईक विशिष्ट अतिथि रहे उपस्थित।
- माता-पिता के त्याग और संघर्ष को जीवन की प्रेरणा बनाने का संदेश।
- छात्रों को अनुशासन, सच्चाई और परिश्रम अपनाने की सीख।
- विदा हो रहे छात्रों को उपहार देकर सम्मानित किया गया।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम और डेढ़ हजार से अधिक विद्यार्थियों के बीच मिठाई वितरण।
सिमडेगा जिले के सामटोली स्थित संत अन्ना हाई स्कूल सह प्लस टू इंटर कॉलेज परिसर में उस समय भावुक वातावरण देखने को मिला, जब दसवीं और बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया। यह समारोह छात्रों के लिए केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्कूल जीवन की यादों और भविष्य की नई जिम्मेदारियों का संगम था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों की उपस्थिति ने इसे यादगार बना दिया।
प्रेरक संदेश के साथ समारोह की शुरुआत
विदाई समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में युवा समाजसेवी सह सब्जी व्यवसायी भरत प्रसाद तथा विशिष्ट अतिथि कुश बड़ाईक उपस्थित रहे। अतिथियों ने मंच से सभी विदा हो रहे विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। भरत प्रसाद ने अपने संबोधन में छात्रों से जीवन को गंभीरता से लेने और संघर्ष से घबराने के बजाय उसे अपनी ताकत बनाने की बात कही।
भरत प्रसाद ने कहा:
“दोस्तों से बिछड़ने का गम जरूर होता है, लेकिन यही समय नई उड़ान भरने का होता है। माता-पिता के त्याग और संघर्ष के पीछे उनके सपने जुड़े होते हैं, जिन्हें पूरा करना ही सच्ची सफलता है।”
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने माता-पिता और शिक्षकों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए निरंतर मेहनत करें और जीवन में सच्चाई के मार्ग पर चलें।
जीवन मूल्यों पर विशेष जोर
अपने प्रेरक भाषण में भरत प्रसाद ने छात्रों को आत्मसंयम और विनम्रता का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि सफलता मिलने पर भी कभी पद या पैसे का घमंड नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा:
“जब आप ऊँचे मुकाम पर पहुँचें, तब अपने संघर्ष भरे बीते दिनों को अवश्य याद रखें। अगर कोई कहे कि आप यह नहीं कर सकते, तो उसी बात को अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ें।”
उन्होंने यह भी कहा कि अच्छाई और बुराई को जानने के बावजूद कई बार लोग सही रास्ते से भटक जाते हैं, जिसमें सुधार की आवश्यकता है। नशापान जैसे बुरे रास्तों से दूर रहकर ज्ञान के प्रकाश से जीवन को उज्ज्वल बनाने की अपील की।
शिक्षकों ने दिया मार्गदर्शन
इस अवसर पर हाई स्कूल व इंटर कॉलेज के प्राचार्य फा. नीलम राकेश मिंज तथा प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक फा. प्रदीप केरकेट्टा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। दोनों शिक्षकों ने छात्रों को अनुशासन, परिश्रम और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा देने का स्थान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला है। यहां से मिले संस्कार ही विद्यार्थियों को आगे चलकर समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं।
सम्मान, खुशियां और सांस्कृतिक रंग
कार्यक्रम के दौरान विदा हो रहे सभी छात्रों को फाइल, पेन सहित अन्य उपहार देकर सम्मानित किया गया। वहीं समारोह में उपस्थित डेढ़ हजार से अधिक विद्यार्थियों के बीच बिस्कुट के पैकेट और टॉफी वितरित कर खुशियां बांटी गईं।
इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्कूल के विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य और अन्य प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। बच्चों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साह बढ़ाया।
शिक्षकों की अहम भूमिका
इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के सभी शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। शिक्षकों ने मंच संचालन से लेकर कार्यक्रम की व्यवस्था तक सक्रिय भूमिका निभाई। विदाई समारोह ने छात्रों के मन में स्कूल के प्रति आत्मीयता और भविष्य के प्रति आत्मविश्वास पैदा किया।
न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कारों की मजबूत नींव
संत अन्ना स्कूल का यह विदाई समारोह दिखाता है कि शिक्षा केवल परीक्षा और अंक तक सीमित नहीं है। माता-पिता के संघर्ष, शिक्षकों के मार्गदर्शन और सामाजिक मूल्यों को जोड़कर विद्यार्थियों को जीवन के लिए तैयार करना ही सच्ची शिक्षा है। ऐसे कार्यक्रम छात्रों को आत्ममंथन और आत्मविश्वास दोनों प्रदान करते हैं। यह पहल समाज को जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक देने की दिशा में अहम है।
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नई उड़ान के लिए तैयार हों सपनों के पंख
विदाई का यह क्षण छात्रों के जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ है। आज लिया गया संकल्प ही कल की सफलता की नींव बनता है। माता-पिता के सपनों, शिक्षकों की सीख और अपने आत्मविश्वास को साथ लेकर आगे बढ़ें।







