
#गुमला #लापरवाही_मौत : किताम गांव में उपचार के अभाव में छात्रा की दर्दनाक मौत हुई।
गुमला जिले के जारी थाना क्षेत्र के किताम गांव में 15 वर्षीय छात्रा की मौत का मामला सामने आया है। कुत्ते के काटने के बाद परिजनों ने समय पर चिकित्सीय उपचार नहीं कराया और झाड़-फूंक का सहारा लिया। हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। यह घटना जागरूकता और समय पर इलाज की जरूरत को रेखांकित करती है।
- किताम गांव, जारी थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय दीपिका कुमारी की मौत।
- दो महीने पहले आवारा कुत्ते ने काटा, समय पर इलाज नहीं मिला।
- परिजनों ने अस्पताल के बजाय झाड़-फूंक और जड़ी-बूटी का सहारा लिया।
- हालत बिगड़ने पर सदर अस्पताल गुमला लाया गया, फिर रिम्स रेफर।
- रांची ले जाते समय अस्पताल गेट के पास ही मौत हो गई।
- डॉक्टरों ने एंटी-रेबीज टीके की जरूरत पर जोर दिया।
गुमला जिले के जारी थाना क्षेत्र के किताम गांव से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक 15 वर्षीय छात्रा दीपिका कुमारी की मौत कुत्ते के काटने के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण हो गई। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी बनकर उभरी है। दो महीने पहले हुई इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसका परिणाम जानलेवा साबित हुआ।
कुत्ते के काटने के बाद नहीं मिला सही इलाज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपिका कुमारी दो महीने पहले स्कूल से घर लौट रही थी, तभी रास्ते में एक आवारा कुत्ते ने उसे काट लिया। इस घटना के बाद परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और जड़ी-बूटी के सहारे इलाज कराने की कोशिश की।
समय बीतने के साथ उसकी स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती गई, लेकिन फिर भी उसे उचित चिकित्सीय उपचार नहीं मिल सका। यह लापरवाही अंततः उसकी जान पर भारी पड़ गई।
हालत बिगड़ने पर अस्पताल, लेकिन देर हो चुकी थी
मंगलवार को जब दीपिका की स्थिति बेहद गंभीर हो गई, तब परिजन उसे सदर अस्पताल गुमला लेकर पहुंचे। वहां मौजूद चिकित्सक डॉ. असीम विक्रांत मिंज ने उसकी हालत को गंभीर देखते हुए तुरंत रिम्स रांची रेफर कर दिया।
परिजन उसे रांची ले जाने के लिए निकले, लेकिन अस्पताल गेट के पास ही उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
डॉ. असीम विक्रांत मिंज ने कहा:
“कुत्ते के काटने के बाद समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लेना बेहद जरूरी होता है, इसमें देरी जानलेवा साबित हो सकती है।”
अजीब लक्षणों से बिगड़ी स्थिति
परिजनों के अनुसार, दीपिका की हालत मंगलवार को अचानक बहुत खराब हो गई थी। वह असामान्य व्यवहार करने लगी थी, जिसमें कुत्ते की तरह भौंकना और पानी से डरना जैसे लक्षण शामिल थे।
ये लक्षण रेबीज संक्रमण के संकेत माने जाते हैं, जो समय पर इलाज नहीं मिलने पर जानलेवा हो जाते हैं।
मेधावी छात्रा थी दीपिका
मृतका की फुआ कुंती देवी ने बताया कि दीपिका सातवीं कक्षा की मेधावी छात्रा थी और पढ़ाई में काफी अच्छी थी।
कुंती देवी ने दुख जताते हुए कहा:
“अगर समय रहते सही इलाज कराया जाता, तो आज दीपिका हमारे बीच होती।”
घटना ने दी बड़ा संदेश
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि कुत्ते के काटने जैसी घटनाओं को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर एंटी-रेबीज टीका और उचित चिकित्सा ही जीवन बचा सकती है।
झाड़-फूंक या घरेलू उपायों पर भरोसा करना ऐसे मामलों में बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
न्यूज़ देखो: अंधविश्वास बना जानलेवा, जागरूकता की सख्त जरूरत
किताम गांव की यह घटना बताती है कि आज भी कई जगहों पर अंधविश्वास और जागरूकता की कमी लोगों की जान ले रही है। एक मासूम छात्रा की मौत केवल इसलिए हो गई क्योंकि समय पर वैज्ञानिक इलाज नहीं कराया गया। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को ऐसे मामलों में जागरूकता अभियान तेज करने की जरूरत है। क्या ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य शिक्षा को और मजबूत किया जाएगा, यह अब एक बड़ा सवाल है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक बनें, सही समय पर सही इलाज चुनें
यह घटना हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक सोच अपनाना जरूरी है।
कुत्ते के काटने जैसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और एंटी-रेबीज टीका लगवाएं।
आपकी जागरूकता किसी की जिंदगी बचा सकती है, इसलिए सही जानकारी को फैलाना जरूरी है।
अपनी राय कमेंट में जरूर दें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें और जागरूकता फैलाने में अपना योगदान दें।






