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लचड़ागढ़ में सोना बुरु जंगल प्रोड्यूसर कंपनी की वार्षिक आम बैठक, वनोपज मूल्य संवर्धन और महिला सशक्तिकरण पर बनी रणनीति

#कोलेबिरा #वार्षिकआमबैठक : जंगल आधारित आजीविका सशक्त बनाने पर जोर।

कोलेबिरा प्रखंड के लचड़ागढ़ इनडोर स्टेडियम में सोना बुरु जंगल प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की वार्षिक आम बैठक आयोजित हुई। बैठक में विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी सहित कई जनप्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हुए। वनोपज के वैज्ञानिक संग्रहण, प्रसंस्करण और बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के ठोस प्रस्ताव रखे गए।

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  • लचड़ागढ़ इनडोर स्टेडियम में वार्षिक आम बैठक आयोजित।
  • मुख्य अतिथि विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी की उपस्थिति।
  • वनोपज के वैज्ञानिक संग्रहण व प्रसंस्करण पर जोर।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को उत्पादन व विपणन से जोड़ने पर चर्चा।
  • हजारों महिलाओं व ग्राम प्रधानों की सक्रिय भागीदारी।

सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत लचड़ागढ़ इनडोर स्टेडियम में सोना बुरु जंगल प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, सिमडेगा के बैनर तले वार्षिक आम बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ए ए के कंपनी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक में कंपनी की वार्षिक गतिविधियों, वित्तीय प्रगति और आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

पारंपरिक विधि से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ दीप प्रज्वलन कर की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में अजय एक्का, जिप अध्यक्ष रोस प्रतिमा सोरेंग, विधायक प्रतिनिधि सुलभ नेल्सन डुंगडुंग, प्रदीप टोप्पो, सूर्यमणि भगत, कुंदन गुप्ता, फादर किशोर लकड़ा तथा कामिनी सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

बैठक में कंपनी की उपलब्धियों और सदस्य विस्तार की जानकारी साझा की गई। प्रबंधन ने बताया कि पिछले वर्ष में वनोपज आधारित गतिविधियों के माध्यम से कई परिवारों की आय में वृद्धि हुई है।

वनोपज मूल्य संवर्धन पर विस्तृत चर्चा

बैठक में विशेष रूप से महुआ, तसर, लाख, साल बीज और अन्य वनोपज के वैज्ञानिक संग्रहण, प्रसंस्करण और ब्रांडिंग पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि ग्रामीण उत्पादों को उचित पैकेजिंग और बाजार से सीधा जुड़ाव मिले तो स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बना सकते हैं।

मुख्य अतिथि नमन विक्सल कोनगाड़ी ने कहा:

“वनोपज के वैज्ञानिक संग्रहण, प्रसंस्करण और बाज़ार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करना जरूरी है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों व महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि होगी।”

विशिष्ट अतिथियों ने भी इस बात पर बल दिया कि जंगल आधारित आजीविका को संगठित और पेशेवर ढंग से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

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महिला सशक्तिकरण को मिली प्राथमिकता

बैठक में महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन की पूरी श्रृंखला से जोड़ने पर स्थानीय परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

विशिष्ट अतिथि ने कहा:

“महिला समूहों को प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ना समय की आवश्यकता है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी तो पूरे समाज का विकास सुनिश्चित होगा।”

कंपनी प्रबंधन ने सदस्यों को प्रशिक्षण, गुणवत्ता मानक और पारदर्शी खरीद व्यवस्था का भरोसा दिलाया। इससे ग्रामीण उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।

व्यापक भागीदारी और सामुदायिक सहयोग

कार्यक्रम में अभिनव श्रीवास्तव, अजीत कंदुलना, कामिनी सिंह, चंद्रकांता, सुनीता कुमारी, सुदामा केवट, अशरफ आलम, विनोद राम, जूनास टोपनो, आशीष कुमार, अंकुर रोशन, मूल्यानी डांग, विश्वासी जोजो, लक्ष्मी देवी, सुमंती डांग, सुमंती सोरेंग, प्रमिला टेटे, मोनिका कंदुलना, सलोमी गुड़िया सहित अनेक ग्राम प्रधानों की सहभागिता रही। बैठक में हजारों महिलाओं की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व दिया।

कार्यक्रम का संचालन अगुस्टिना सोरेंग ने किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक का समापन हुआ।

युवाओं और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर

अतिथियों ने युवाओं को जंगल आधारित आजीविका से जोड़ने और पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास की दिशा में मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग किया जाए तो आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों संभव हैं।

न्यूज़ देखो: जंगल आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा

लचड़ागढ़ की यह बैठक बताती है कि वनोपज आधारित आजीविका ग्रामीण विकास का मजबूत आधार बन सकती है। यदि मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित हो, तो स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय पहचान पा सकते हैं। महिला सशक्तिकरण पर दिया गया जोर सकारात्मक संकेत है, लेकिन अब इन योजनाओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना बड़ी चुनौती होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

गांव की समृद्धि का रास्ता जंगल से होकर

जंगल केवल संसाधन नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की आधारशिला है। यदि हम अपने वनोपज को सही पहचान और बाजार दिलाएं, तो गांव की तस्वीर बदल सकती है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से यह बदलाव और तेज हो सकता है।

आइए, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दें और स्वदेशी आजीविका को मजबूत करें।
ग्रामीण उद्यमिता को समर्थन दें और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएं।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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